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मायावती के बयान यादवों ने दिया वोट का खुलासा, बसपा का 38 सीटों पर वोट शेयर फिर इतना कैसे बढ़ा?

 Special Coverage News |  7 Jun 2019 4:17 AM GMT  |  दिल्ली

मायावती के बयान यादवों ने दिया वोट का खुलासा, बसपा का 38 सीटों पर वोट शेयर फिर इतना कैसे बढ़ा?
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लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और रालोद का गठबंधन बना. जिसने बीजेपी से दस सीटें छीन लीं. लेकिन फिर भी यह गठबंधन अपने मकसद में कामयाब नहीं हुआ और यह टूट गया. टूटना कोई राजनीत में बड़ी बात नहीं है लेकिन जिन आरोपों को लेकर तोडा गया उनमे कोई सच्चाई नजर नहीं आ रही है. इसका साक्षात उदाहरण बसपा को मिले 38 सीटों पर मिले वोट है.

बहुजन समाज पार्टी को जिन लोकसभा सीटों 2014 के चुनव में कम वोट मिले थे. उन पर काफी वोट बढ़ा हुआ मिला. यह देखकर भी अगर बसपा आरोप लगाती है तो यह आरोप बेबुनियाद है . लेकिन जिस तरह अखिलेश यादव ने उनका जबाब बड़ी शालीनता से दिया है वो वाकई एक सुलझे हुए राजनैतिक व्यक्तित्व का परिचय है. राजनीत में अक्सर जीत हार बनी रहती है लेकिन कभी अपना पेसेंस खोने की जरूरत नहीं होती है. जिसका अखिलेश यादव ने भरपूर पालन किया है, जबकि मायावती ने एक समुदाय विशेष को फिर से नाराज करने का काम किया है. अगर अब भूलकर भी सपा बसपा साथ आते है तो शायद इस बार कोई यादव बसपा को वोट नहीं करेगा.

अब देखिये जिन सीटों पर बसपा लड़ी उन पर कितना वोट ज्यादा मिला




मायावती का आरोप

लोकसभा चुनाव में मिली हार के बाद उत्तर प्रदेश में सपा-बसपा गठबंधन टूटने की कगार पर खड़ा है. इस बात की पुष्टि तो नहीं हुई है लेकिन अखिलेश यादव और मायावती के बयानों से साफ है कि गठबंधन में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है. मायावती ने मंगलवार को मीडिया से बात करते हुए कहा कि चुनाव नतीजों से साफ है कि बेस वोट भी सपा के साथ खड़ा नहीं रह सका है. सपा की यादव बाहुल्य सीटों पर भी सपा उम्मीदवार चुनाव हार गए हैं. कन्नौज में डिंपल यादव और फिरोजबाद में अक्षय यादव का हार जाना हमें बहुत कुछ सोचने पर मजबूर करता है. उन्होंने कहा कि बसपा और सपा का बेस वोट जुड़ने के बाद इन उम्मीदवारों को हारना नहीं चाहिए था.

मायावती ने गठबंधन पर कहा कि सपा का बेस वोट ही छिटक गया है तो उन्होंने बसपा को वोट कैसे दिया होगा, यह बात सोचने पर मजबूर करती है. मायावती ने कहा कि हमने पार्टी की समीक्षा बैठक में पाया कि बसपा काडर आधारित पार्टी है और खास मकसद से सपा के साथ मिलकर चुनाव लड़ा गया था लेकिन हमें सफलता नहीं मिल पाई है. सपा के काडर को भी बसपा की तरह किसी भी वक्त में तैयार रहने की जरूरत है. इस बार के चुनाव में सपा ने यह मौका गंवा दिया है. मायावती ने कहा कि सपा प्रमुख अपने राजनीतिक कार्यों को करने के साथ-साथ कार्यकर्ताओं को मिशनरी बनाते हैं तो फिर हम आगे साथ लड़ेगे, अगर वह ऐसा नहीं कर पाते तो हमें अकेले ही चुनाव लड़ना होगा.

मायावती ने कहा कि उपचुनाव में हमारी पार्टी ने कुछ सीटों पर अकेले लड़ने का फैसला किया है लेकिन गठबंधन पर फुल ब्रेक नहीं लगा है. उन्होंने कहा कि चुनाव में ईवीएम की भूमिका भी ठीक नहीं पाई गई है. गठबंधन के बाद से सपा प्रमुख अखिलेश यादव और उनकी पत्नी डिंपल उनका खूब सम्मान करते हैं. वह दोनों मुझे अपना बड़ा और आदर्श मानकर इज्जत देते हैं और मेरी ओर से भी उन्हें परिवार के तरह ही सम्मान दिया गया है. उन्होंने कहा कि हमारे रिश्ते केवल स्वार्थ के लिए नहीं बने हैं और हमेशा बने भी रहेंगे.

यूपी में चुनाव से पहले मोदी के मैजिक को ध्वस्त करने के इरादे से सपा और बसपा ने पुराने बैर को भुलाते हुए बड़ा सियासी दांव चला था लेकिन नतीजों में यह कदम कारगर साबित नहीं हुआ. जो मायावती गठबंधन से नुकसान का हवाला दे रही हैं वह सपा के मुकाबले फिर भी फायदे में रहीं क्योंकि उनकी पार्टी बसपा जीरों से 10 लोकसभा सीटों पर पहुंच गई है जबकि बसपा के साथ लड़ने से अखिलेश को बड़ा नुकसान हुआ है. पिछली बार परिवार से 5 सीटें जीतने वाले अखिलेश फिर से 5 ही सीटों पर ही अटक गए हैं लेकिन इस बार उनकी पत्नी डिंपल यादव समेत परिवार के 2 अन्य नेता भी चुनाव हार चुके हैं.

17वीं लोकसभा में यूपी में सपा बसपा और रालोद के गठबंधन के बाद भी भाजपा को कोई खास प्रभाव नही पड़ा। 80 सीटों में गंठबंधन कर 37 सपा और 38 बसपा और 3 सीटों पर रालोद ने चुनाव लड़ा था। जिसमें बसपा 10 सपा 5 सीटों पर ही जीत सकी। इसके बाद गंठबंधन की गांठ टूटने के कगार में चला गया। और यूपी विधानसभा उपचुनाव में अकेले ही सब पार्टी चुनाव लड़ने के विचार में है।

बसपा सुप्रीमो मायावती ने ट्वीट कर भाजपा को बेरोजगारी और गरीबी पर घेरने पर लगी है और कहा है कि पहला ट्वीट ''श्रम मंत्रालय ने लोकसभा चुनाव के बाद अब अपने डाटा से इस बुरी खबर को प्रमाणित कर दिया है कि देश में बेरोजगारी की दर पिछले 45 सालों में सबसे अधिक 6.1 प्रतिशत पर जा पहुँची है। परन्तु गरीबी व बेरोजगारी के शिकार करोड़ों लोगों द्वारा अब पछताने से क्या होगा जब चिड़िया चुग गई खेत?''

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