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प्रवासी मजदूरों के बहाने मायावती का तंज, 'सरकार इनकी जिंदगी के साथ न करे खिलवाड़'

 Arun Mishra |  6 Jun 2020 10:12 AM GMT

प्रवासी मजदूरों के बहाने मायावती का तंज, सरकार इनकी जिंदगी के साथ न करे खिलवाड़
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लखनऊ : प्रवासी श्रमिकों बेरोजगारों और किसानों के मुद्दे पर बसपा प्रमुख मायावती ने केंद्र और राज्य सरकारों की नीतियों पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा है कि इन सभी के हितों के लिए किए जा रहे दावों का मीडिया या अन्य माध्यमों से प्रचार-प्रसार करने की बजाय उन्हें जमीनी तौर पर लागू करने की सख्त जरूरत है.

बसपा प्रमुख ने यूपी का जिक्र करते हुए कहा कि जब प्रवासी श्रमिक बड़े पैमाने पर बस और ट्रेन के जरिए उत्तर प्रदेश आ रहे थे, तो राज्य सरकार की ओर से कुछ मंत्रियों और अधिकारियों का समूह बनाकर इस बात पर जोर दिया गया कि अन्य राज्यों से आने वाले सभी लोगों की यहां हर संभव मद्द की जाएगी और उनको रोजी-रोटी के साधन उपलब्ध कराए जाएंगे, लेकिन असल में यहां इन लोगों की बहुत खराब हालत है.

'बड़ी-बड़ी डिग्री वाले लोग कर रहे मजदूरी'

उन्होंने कहा कि इन लोगों के हालात इतने दयनीय है कि बड़ी-बड़ी डिग्री रखने वाले प्रवासी कामगारों को मनरेगा के तहत खुदाई करनी पड़ रही है. पिछले कुछ दिनों से मैंने कई चैनलों पर इन हालातों को देखा है कि ये लोग गड्ढे खोद रहे हैं, तो ऐसे में उनके मां-बाप क्या सोचते होंगे, जिन्होंने मेहनत-मजदूरी करके उनको पढ़ाया लिखाया बड़ी-बड़ी डिग्रियां दिलवाईं.

मायावती ने कहा कि राज्य सरकार को भी सोचना चाहिए कि जब बड़ी-बड़ी डिग्री लेकर लोग गड्ढे खोदेंगे तो इसका शिक्षा के ऊपर कितना बुरा प्रभाव पड़ेगा. लोग सोचने को मजबूर होंगे कि पढ़ने-लिखने का क्या फायदा है, जब गड्ढे ही खोदने हैं. अभी तक भी इन सभी के सामने काफी ज्यादा परेशानियां ही नजर आ रही है.

'केंद्र-राज्य सरकारों की नीति के कारण बंद हुए उद्योग'

बसपा सुप्रीमो ने कहा केंद्र और राज्य सरकारों से हमारी पार्टी का ये कहना है कि उनकी नीतियों के कारण जब पहले से स्थापित छोटे-बड़े उद्योग धंधे बंद हो रहे हैं और बड़ी संख्या में लोग बेरोजगार हो रहे हैं, जिसका ताजा उदाहरण गाजियाबाद और कन्नौज जैसे शहरों में देखने को मिला है, तो ऐसे में नए उद्योगों को स्थापित करने में अभी बहुत समय लगेगा और तब तक प्रवासी श्रमिकों के सामने रोजगार की बड़ी समस्या है.

'UP की तरह ही दूसरे राज्यों ने भी नहीं दिया ध्यान'

उन्होंने कहा कि यूपी की तरह ही अन्य राज्यों में भी हमें यही स्थिति देखने को मिल रही है, जिसके कारण पहले से स्थापित उद्योगों से बड़ी संख्या में लोग बेरोजगार हो रहे हैं. प्रवासी श्रमिकों को वापस बुलाने के लिए तैयार पंजाब के अलावा उन सभी राज्यों को उस समय सोचना चाहिए था, जब कोरोना (Coronavirus) की वजह से लॉकडाउन (Lockdown) की घोषणा हुई और छोटे-बड़े उद्योगों के मालिकों ने इन मजदूरों से अपना हाथ खींचकर उन्हें उनके हाल पर भूखे मरने को छोड़ दिया था.

'पहले ही मजदूरों का रखा जाता ध्यान तो नहीं होते मजबूर'

मायावती ने आगे कहा कि अगर उस समय इन सभी प्रवासी श्रमिकों का ध्यान रखा गया होता तो ये लोग अपने-अपने राज्यों में वापस आने को मजबूर नहीं होते. उस समय राज्य सरकारों की जिम्मेदारी बनती थी कि यदि उद्योग धंधों के मालिकों के पास पैसे की समस्या आ गई थी, तो सरकारें उन्हें अलग-अलग मदों से आर्थिक मदद मुहैया कराती, जिससे गरीब और मजदूरों के साथ खिलवाड़ नहीं होता, सरकारों को इन सभी के साथ ऐसा मजाक नहीं करना चाहिए था.

'सरकार मजदूरों की जिंदगी के साथ न करे खिलवाड़'

आखिर में मायावती ने कहा कि अंत में हमारी पार्टी का ये भी कहना है कि केंद्र व राज्य सरकारों को अब भी इनकी जिंदगी के साथ कोई खिलवाड़ नहीं करना चाहिए वर्ना फिर ये लोग मजबूरी में अपनी रोजी-रोटी के लिए सड़कों पर भी उतर सकते है. इस स्थिति से सरकारों को बचना चाहिए क्योंकि सहन करने की भी एक सीमा होती है.

सुप्रीम कोर्ट का किया धन्यवाद

सुप्रीम कोर्ट का धन्यवाद करते हुए मायावती ने कहा, "बहुजन समाज पार्टी श्रमिकों के मामले में सुप्रीम कोर्ट (SC) के दखल का धन्यवाद देती है और मैं केंद्र और राज्य सरकारों से ये कहना चाहूंगी कि माननीय सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के हिसाब से भी इन सभी लोगों के हितों का पूरा ध्यान रखा जाए."

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