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तो अब बीजेपी के डर से मुसलमान नहीं करेगा बसपा को वोट!

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लोकसभा चुनाव बाद सपा-बसपा गठबंधन टूटने से एक बार यूपी की सियासत में मुस्लिम वोटों को लेकर खींचतान बढ़ गई है. मायावती अखिलेश को कठघरे में खड़ा कर खुद को मुसलामानों का रहनुमा बता रही हैं. कहा जा रहा है कि एक बार फिर यूपी की सियासत के केंद्र में मुस्लिम वोटर ही है. लिहाजा मायावती बीजेपी से मोर्चा लेने के लिए दलित और मुस्लिम समीकरण को धार देने में जुट गई हैं. लोकसभा चुनाव की समीक्षा के बाद से जो संकेत मिल रहे हैं उससे यही लग रहा है कि मायावती 2007 के सोशल इंजीनियरिंग के सहारे ही 2022 के चुनावी समर में उतरने की कोशिश है. उसके केंद्र में दलित और मुसलमान ही है.

हालांकि मायावती की इस रणनीति से अब्दुल नसीर इत्तेफाक नहीं रखते. अब्दुल नासिर आंबेडकर महासभा के संस्थापक सदस्य हैं और वो शख्स हैं जो कभी कांशीराम और मायावती के साथ काम कर चुके हैं. बसपा की सहयोगी संस्था बीएस-4 के सदस्य भी रह चुके हैं. अब्दुल नसीर का आरोप है कि मायवती चार बार सूबे की मुख्यमंत्री बनी, लेकिन उन्होंने माइनॉरिटी और मुसलमानों से किया एक भी वादा पूरा नहीं किया. अब मुसलमान भरोसा करे तो कैसे करे.

मायावती ने नहीं किया एक भी वादा पूरा

उन्होंने कहा कि जब पहली बार मायावती मुख्यमंत्री बनी थीं तो कांशीराम ने कहा था कि उन्हें गुरुमुखी, उर्दू और इंग्लिश आती है. उन्होंने मायावती से कहा था कि उर्दू को प्रमोट करेंगी. प्रदेश के सभी स्कूलों में एक उर्दू टीचर होगा, क्योंकि यूपी की दूसरी भाषा उर्दू ही है. लेकिन लखनऊ के बेगम हजरत महल पार्क में उर्दू को हटाकर उन्होंने हिंदी का प्रयोग किया. इसके अलावा जब वे बीजेपी के साथ मिलकर मुख्यमंत्री बनीं तो कांशीराम ने कहा था कि बैकवर्ड मुसलमानों को अलग से आरक्षण दिया जाएगा. लेकिन चार बार मुख्यमंत्री रहते हुए भी उन्होंने दोनों में से एक वादा भी पूरा नहीं किया.

मायावती करें घोषणा मुस्लिम होगा उपमुख्यमंत्री

मायावती दलित-मुस्लिम गठजोड़ की रणनीति पर नसीर कहते हैं कि अगर वे मुस्लिमों की हिमायती हैं तो यह घोषणा कर दें कि एक दलित मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री मुस्लिम होगा. यह लिखित में दे दें कि मुसलमानों को 8.44 प्रतिशत आरक्षण देंगी, जैसा कि बिहार और साउथ के कुछ राज्यों में है. अब मुसलमान विश्वास करे तो कैसे करे.

गौरक्षा के नाम पर बीजेपी हिंसा रोके तो मुसलमान साथ आने को तैयार

नसीर आगे कहते हैं कि अब मुसलमान सिर्फ बीजेपी के खौफ से किसी को वोट नहीं देगा. वे कहते हैं कि मुसलमान भी जागरूक हो रहा है. मुस्लिमों में एक पढ़ा लिखा वर्ग है जो यह समझ चुका है. उन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी की तारीफ भी की और कहा कि पीएम आवास योजना, उज्जवला योजना और सौभाग्य योजना के तहत मुसलमानों को घर, बिजली और गैस कनेक्शन मिले हैं. अगर बीजेपी मुसलमानों को यह विश्वास दिलाये की गौरक्षा के नाम पर हिंसा नहीं होगी तो वह बीजेपी के साथ भी जाने को तैयार हो जाएगा.

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