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अखिलेश यादव के इस बयान से 2019 में बन रहे महागठबंधन में मची खलबली!

 Special Coverage News |  19 Dec 2018 4:58 AM GMT  |  लखनऊ

अखिलेश यादव के इस बयान से 2019 में बन रहे महागठबंधन में मची खलबली!
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पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव संपन्न होते ही अब सबकी निगाह लोकसभा चुनाव 2019 पर टिक गई है. अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव 2019 को लेकर बन रही विपक्षी एकता पर एक बार फिर ग्रहण लगता नजर आ रहा है. समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने डीएमके सुप्रीमो एमके स्टालिन के बयान पर अपनी असहमति जाहिर कर दी है. अखिलेश यादव ने कहा है कि यह जरूरी नहीं है कि स्टालिन की राय पर गठबंधन के सभी सदस्य सहमत हो.

एमके स्टालिन ने 2019 के आम चुनाव में प्रधानमंत्री पद के लिए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी किए के नाम का प्रस्ताव प्रस्तावित किया है, इसके बाद से विपक्षी दलों के सुर बदल गए हैं, खासकर अब इस घोषणा से अखिलेश यादव भी सहमत नहीं दिख रहे हैं. उन्होंने कहा है कि जनता भाजपा से नाराज है. इसी कारण से कांग्रेस की तीन राज्यों में सरकार बनी है. लेकिन अभी महागठबंधन का खाका तैयार किया जाना बाकी है.

अखिलेश यादव ने कहा कि तेलंगाना के मुख्यमंत्री केसीआर, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार ने गठबंधन बनाने के लिए सभी नेताओं को एक साथ लाने का प्रयास किया था. अगर इस प्रयास पर कोई अपनी राय दे रहा है तो जरूरी नहीं है महागठबंधन की राय समान हो. प्रधानमंत्री पद के लिए किसी भी नाम की घोषणा आपसी तालमेल और बातचीत के बाद हो तो ज्यादा बेहतर होगा.

बता दें कि स्टालिन ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को देश का अगला प्रधानमंत्री बनाने का संकल्प जताते हुए रविवार को तमिलनाडु में कहा था कि गांधी में केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार को परास्त करने की क्षमता है. उन्होंने कहा था 2018 में थलैवार कलाइगनर की प्रतिमा के अनावरण के अवसर पर मैं प्रस्ताव रखता हूं कि हम दिल्ली में नया प्रधानमंत्री बनाएंगे और एक नया भारत बनाएंगे. मैं तमिलनाडु की ओर से राहुल गांधी की उम्मीदवार की पेशकश करता हूं. कयास लगाया जा रहा है कि शायद यही वजह है कि मध्य प्रदेश और राजस्थान के शपथ ग्रहण समारोह में मायावती अखिलेश और ममता बनर्जी नहीं पहुंचे. इसके बाद अखिलेश का बयान अब अपने आप में बहुत कुछ साबित करता नजर आ रहा है.

डीएमके प्रमुख स्टालिन के इस प्रस्ताव पर अखिलेश यादव के अलावा चंद्रबाबू नायडू की टीडीपी, ममता बनर्जी की टीएमसी. फारूक अब्दुल्लाह की नेशनल कॉन्फ्रेंस. लालू यादव की राजद ,सीपीएम और एनसीपी ने भी इससे असहमति जताई थी. इन दलों का कहना था कि चुनाव के बाद विपक्षी दलों को एक साथ बैठकर इस पर फैसला करना चाहिए था. टीएमसी ने कहा स्टालिन का बयान अपरिपक्व है इसे विपक्षी दलों में दरार आ सकती है.

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