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यूपी DHFL घोटाला : महकमे के साथी कहते थे, एपी यानी अरबपति मिश्रा!

 अनमोल |  7 Nov 2019 3:14 AM GMT  |  लखनऊ

यूपी DHFL घोटाला : महकमे के साथी कहते थे, एपी यानी अरबपति मिश्रा!
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स्वप्निल द्विवेदी

लखनऊ। यूपी पावर कॉरपोरेशन के पूर्व एमडी एपी मिश्रा ने यह कभी सपने में भी नहीं सोचा होगा कि उन्हें अरबों के पीएफ घोटाले में आरोपित होकर यह दिन देखने पड़ेंगे..। सपा सरकार में एपी मिश्रा का पावर कॉरपोरेशन की ऐसी शख्सियतों में शुमार था कि बड़े इंजीनियरों से लेकर आईएएस तक सत्ता के गलियारे में पहुंच बनाने की खातिर उनके आगे-पीछे घूमते थे। यही वजह थी कि बिजली महकमे में सपा सरकार के दौरान यह चर्चा आम थी कि ' मिश्रााजी ' यानी 'सरकार' समझो। वह महकमे में रामचरित मानस के जरिए प्रबंधन पर व्याख्यान देने के लिए भी खासे चर्चित रहे।

कुंभ के जरिए बढ़़ाई सियासी नज़दीकियां

इसे उनकी कार्यदक्षता कहें या सियासी जलवा कि वह कई बार प्रयागराज में आयोजित कुंभ में तैनात रहे। अपनी किताब में उन्होंने खुद स्वीकार किया है कि चूंकि वह 2007 में कुंभ में तैनात रहे और इसी दौरान उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के निर्देश पर कामकाज किया था, लिहाजा वह उनके करीबी हो गए। एपी मिश्रा ने अपनी किताब 'यह सब मैं निज नयनन्हि देखीं...' में लिखा है कि नेताजी के कहने पर ही वर्ष 2012 में कुंभ होने पर सपा मुखिया ने उन्हें बुलाया और कुंभ का जिम्मा सौंपा।

दो बार मिला सेवा विस्तार

एपी मिश्रा के हुनर का ही कमाल कहें या भाग्य की बलिहारी कि 31 जुलाई 2012 को प्रदेश में ग्रिड फेल हो गया। वह पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के एमडी थे, उन्हें आनन-फानन में उसी रोज़ पावर कॉरपोरेशन का एमडी बना दिया गया। यह उनकी सपा सरकार में पहुंच का ही नतीजा था कि उन्हें तीन वर्ष का कार्यकाल पूरा करने पर 62 वर्ष की उम्र में 13 फरवरी 2015 को एमडी पद पर पहली बार सेवा विस्तार दिया गया। ऐसा नियमों में बदलाव करने के बाद किया गया था। फिर उन्हें दोबारा 64 वर्ष की उम्र में वर्ष 12 फरवरी 2017 को एक साल का और सेवा विस्तार दिया गया। लेकिन विधानसभा चुनाव के बाद भाजपा सरकार बनने पर उन्होंने 23 मार्च 2019 को इस्तीफा दे दिया।

मार्निंग वाक से ही शुरू कर देते थे ड्यूटी

एपी मिश्राा को सुबह और शाम को टहलने की आदत थी। वह इसे किसी भी कीमत पर छोड़ते नहीं थे। बिजली विभाग के एक कर्मचारी नेता बताते हैं आलम यह था कि सुबह छह बजे से ही विभाग के इंजीनियर उनके घर पहुंच जाते। साहब टहलने जा रहे हों तो उनके साथ टहलते-टहलते रामचरितमानस के प्रसंग छेड़ते। फिर क्या था, एमडी साहब के अध्यात्म की प्रशंसा के पुल बांध दिए जाते। कुछ तो उन्हें रामभक्त ही क्या करुणामयी राम की संज्ञा तक दे डालते।

'एपी' यानी अरबपति मिश्रा

बिजली महकमे में उनके सरल स्वभाव, सबसे मिलने और बात-बात पर रामचरितमानस के अध्यात्म को समझाने की आदत से आजिज़ उनके कुछ विरोधियों ने उनका 'निक नेम' रख दिया था 'अरबपति मिश्रा'। इंजीनियर व कर्मचारी नेता अक्सर उनकी गैरहाजिरी में उन्हें अरबपति मिश्रा कह कर पुकारते थे।

अखिलेश यादव ने किया था आत्मकथा का विमोचन

उन्होंने अपनी किताब का विमोचन तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से करवाया था। किताब पर चर्चा के कार्यक्रम गाजियाबाद के एक पांच सितारा होटल में रखे गए और उसमें सपा के वरिष्ठ नेता रामगोपाल यादव शामिल हुए। वर्ष 2019 के चुनाव में तो चर्चा यहां तक थी कि सपा-बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ेंगे, लेकिन बाद में बात नहीं बनी।

एपी मिश्रा का करियर

एपी मिश्रा गोण्डा के कोचवा खंता गांव के एक मध्यमवर्गीय परिवार में 2 जुलाई 1953 को हुआ। शुरुआती शिक्षा गोण्डा के शहीदे आज़म भगत सिंह इंटर कॉलेज (थाम्सन) से हुआ। इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग उन्होंने गोरखपुर के मदन मोहन मालवीय इंजीनियरिंग कॉलेज से की और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से एलएलबी किया। करियर की शुरुआत उन्होंने मेघालय विद्युत परिषद से शिलांग में की। बाद में वह 8 सितंबर 1976 को उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन में बतौर सहायक अभियंता भर्ती हुए। वह नोएडा, मेरठ, गाजियाबाद व लखनऊ में भी महत्वपूर्ण पदों पर रहे।

एपी मिश्रा के कार्यकाल में हुआ था 5 अरब का बिलिंग घोटाला

बिजली कर्मियों के पीएफ घोटाले में गिरफ्तार किये गये पावर कॉरपोरेशन के पूर्व एमडी एपी मिश्रा की कारगुजारियों की पोल अब खुलने लगी है। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक उनके ही कार्यकाल में चार साल पहले यानि वर्ष 2015 में पांच अरब रुपये के बिलिंग घोटाला हुआ था। यह घोटाला एक निजी कंपनी के सिस्टम में हेराफेरी कर किया गया। इस घोटाले में भी पावर कॉरपोरेशन के तत्कालीन एमडी की भूमिका पर सवाल उठे थे। एसटीएफ ने जोरशोर से जांच शुरू की लेकिन ऊपर के दबाव में मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।

यूपी पावर कॉरपोरेशन में चार साल पहले पांच अरब रुपये का बिलिंग घोटाला हुआ था। इसके जरिये बिजली बिल कम करके पावर कारपोरेशन को करोड़ों की चपत लगाई गई थी। मामले का खुलासा होने पर तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के आदेश पर एसटीएफ ने 17 अप्रैल 2015 को महानगर से बिलिंग सिस्टम में सेंध लगाने वाले एचसीएल के दो इंजीनियरों पंकज सिंह, परवेज अहमद और अमित टंडन समेत जालसाजों को गिरफ्तार किया था।

फर्जी यूजर आईडी और पासवर्ड बनाते थे

ये तीनों पावर कारपोरेशन के अधिकारियों के मिलते-जुलते नामों से बिलिंग साफ्टवेयर की फर्जी यूजर आईडी और पासवर्ड बनाते थे। उपभोक्ताओं के बिजली का बिल कम करके पावर कारपोरेशन को करोड़ों की चपत लगा रहे थे। जांच पड़ताल आगे बढ़ने के साथ ही पावर कॉरपोरेशन के कई बड़े अधिकारियों के नाम भी आने लगे।

200 यूजर आईडी का ब्यौरा नहीं उपलब्ध कराया

पावर कॉरपोरेशन अभी तक एसटीएफ को प्रदेश के लगभग 200 यूजर आईडी का ब्यौरा उपलब्ध नहीं करा सका है। अधिकारिक सूत्रों का दावा है कि देरी के कारण दोषी अधिकारियों को अपनी संलिप्तता के सबूत छिपाने का मौका मिल गया और असली दोषियों पर अब तक कार्रवाई नहीं हुई।

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