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लखनऊ से चुनाव लड़ने वाले प्रमोद कृष्णम कौन है, जानिए इनकी पूरी गाथा

हाल में बीते मध्य प्रदेश और राजस्थान विधानसभा चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के स्टार प्रचारक का जिम्मा संभाला. संयोग से कांग्रेस की यहां सरकार भी बनी. प्रमोद कृष्णम की वाकपटुता को देखते हुए ही कांग्रेस ने उन्हें फिर स्टार प्रचारकों की सूची में प्रमुखता से जगह दी है.

 Special Coverage News |  17 April 2019 9:37 AM GMT  |  लखनऊ

लखनऊ से चुनाव लड़ने वाले प्रमोद कृष्णम कौन है, जानिए इनकी पूरी गाथा
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Acharya Pramod Krishnam (File Photo)

कांग्रेस ने लखनऊ से आचार्य प्रमोद कृष्णम को चुनावी मैदान में उतारा है. कृष्णम ब्राह्मण हैं और लखनऊ सीट पर ब्राह्मण उम्मीदवारों की जीत-हार तय करते हैं. जिस कांग्रेस ने राम मंदिर मुद्दे पर कभी खुल कर नहीं बोला, उसने राम मंदिर के गंभीर पैरोकार प्रमोद कृष्णम को टिकट देकर जताने की कोशिश की है कि उसे भी अयोध्या की फिक्र है. आचार्य कृष्‍णम अब तक अयोध्या में राम मंदिर न बन पाने के पीछे नरेंद्र मोदी सरकार को जिम्‍मेदार ठहराते रहे हैं. प्रमोद कृष्णमजी का जन्म ४ जनवरी १९६५ को उत्तर प्रदेश के संभल जनपद के एक गांव एंचोड़ा कम्बोह में ब्राह्मण परिवार में हुआ था।[1] प्रमोद कृष्णम कांग्रेस के नेता रहे हैं,वे संभल कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ चुके हैं जहां उन्होंने महिमा चौधरी और मोनिका बेदी को चुनाव प्रचार में उतारा था। हालांकि वे चुनाव हार गए थे। प्रमोद कृष्णम को कांग्रेस ने 2019 लोकसभा चुनाव में लखनऊ से प्रत्याशी बनाया है वहां उनका मुकाबला देश के गृह मंत्री राजनाथ सिंह से है।

पुराणों का उद्घोष है कि भगवान हरिविष्णु का दसवां व अंतिम अवतार श्री कल्कि के रूप में इसी संभल नमक स्थान पर होगा। पुराणों की इस उद्घोषणा को जन जन तक पहुंचने का महानतम कार्य करने का श्रेय आचार्य प्रमोद कृष्णम को ही दिया जाता है। यूँ तो विश्व में अनेको पीठ और धाम स्थापित है, परन्तु श्री कल्कि पीठ एक ऐसा सिद्ध स्थान है जिसकी स्थापना भगवान के अवतरण से पूर्व हुई है। २ नवंबर २००७ को भारत के प्रमुख संतो की उपस्थिति में श्री कल्कि पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम जी ने श्री कल्कि धाम के निर्माण का संकल्प लेते हुए यह घोषणा की, कि श्री कल्कि धाम विश्व का एक अनूठा धाम होगा जिसमे भगवान श्री हरी विष्णु के दसावतार के १० अलग अलग गर्भ गृह होंगे।

जन -जन के ह्रदय तक श्री कल्कि भगवान की भक्ति पहुँचाने के लिए आचार्य प्रमोद कृष्णम निरंतर रूप से कार्यरत है। विश्वबंधुत्व और वसुधेव कुटुंबकम के भाव को आत्मसात करते हुए श्री आचार्य प्रमोद कृष्णम जी ने हिन्दू मुस्लिम एकता के लिए अत्यंत सराहनीय कार्य किया है। ऋषि परंपरा में आचार्य प्रमोद एक ऐसे विलक्षण संत है जिनके लाखों अनुयायी ईसाई और इस्लाम धर्म के मानने वाले है हालांकि उन्हें अपने कार्यो को लेकर कई बार विरोध भी झेलना पड़ा है। परन्तु श्री आचार्य प्रमोद जी का एक मत है कि परमात्मा एक है और हम सब परमात्मा की संतान है तो फिर हम अलग कैसे हो सकते है कट्टरता और संकीर्णता का नाम धर्म नहीं हो सकता इसलिए विश्व के प्रत्येक भाग में रहने वाला प्रत्येक मानव हमारा है। श्री कल्कि पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम जी का प्रयास है कि भगवान श्री कल्कि के नाम से एक आध्यात्मिक विश्वविद्यालय, वैदिक गुरुकुल गौशाला और एक अस्पताल का निर्माण भी श्री कल्किधाम के साथ ही पूर्ण हो।

श्री कल्कि फाउंडेशन और परमार्थ ट्रस्ट द्वारा समाज के कमजोर वर्गों के लिए शिक्षा और स्वस्थ्य के साथ साथ मासिक निर्वाण पत्रिका का प्रकाशन किया जा रहा है। धर्म एवं राष्ट्र से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर देश के विचारको और दूसरे धर्म के धर्म गुरुओं के साथ चिंतन करके ज्वलंत समस्याओ के समाधान हेतु श्री आचार्य प्रमोद जी निरंतर प्रयासरत रहते है।

आचार्य प्रमोद कृष्णम ने राम मंदिर निर्माण की जबर्दस्‍त पैरवी की है. कांग्रेस की राजनीति में खासकर यूपी से कोई ऐसा नेता नहीं है जो राम मंदिर निर्माण को लेकर मुखर रहा हो लेकिन कृष्णम इसके अपवाद हैं. उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में राम मंदिर को लेकर असरकारी मुहिम दिखती रही है. साधु संत कई बार सरकार से गुहार लगा चुके हैं कि सरकार इस मुद्दे पर गंभीरता से सोचे.

साधु संतों का एक गुट कांग्रेस के समर्थन में उतरा और मोदी सरकार को मंदिर निर्माण में ढिलाई के लिए दोषी ठहराया. इस अभियान में प्रमोद कृष्णम अक्सर अगली कतार में खड़े दिखे. कांग्रेस भी पिछले 5 साल में राम मंदिर के लिए कुछ न कर पाने को लेकर बीजेपी को निशाना बनाती रही है. शायद इसीलिए कांग्रेस ने प्रमोद कृष्‍णम पर दांव लगाया है, ताकि वे और मजबूती से इसके लिए आवाज बुलंद कर सकें और बीजेपी को घेर सके. बता दें कि पिछले चुनाव में प्रमोद कृष्‍णम संभल से चुनाव लड़ चुके हैं.

आचार्य प्रमोद कृष्णम संभल जिले के एचोड़ा कंबोह गांव के रहने वाले हैं. यह गांव असमोली क्षेत्र में पड़ता है. राजनीति से ज्यादा इनके कल्कि पीठ की चर्चा होती है जो इन्होंने अपने गांव में बनाई है. कृष्णम कल्कि पीठाधीश्वर के रूप में जाने जाते हैं. हालांकि राजनीति में उनकी गहरी दिलचस्पी भी जगजाहिर है जिसे टीवी डिबेट्स में आसानी से देखा जा सकता है. देश में ऐसे कम ही साधु-संत हैं जो किसी पार्टी लाइन से जुड़कर अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा जताते हैं. इनमें एक नाम प्रमोद कृष्णम का भी प्रमुखता से लिया जाता है. 2014 के लोकसभा चुनाव में संभल से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े थे. अब काग्रेस ने उन्हें दोबारा मौका दिया है और लखनऊ जैसी हाई प्रोफाइल सीट से उतारा है.

संत के रूप में राजनीति में गहरी दिलचस्पी प्रमोद कृष्णम की बड़ी खासियत है. टीवी चैनलों पर कांग्रेस का राजनीतिक स्टैंड रखने के अलावा चुनावी रैलियों में भी वे लोगों का ध्यान खींचते रहे हैं. हाल में बीते मध्य प्रदेश और राजस्थान विधानसभा चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के स्टार प्रचारक का जिम्मा संभाला. संयोग से कांग्रेस की यहां सरकार भी बनी. प्रमोद कृष्णम की वाकपटुता को देखते हुए ही कांग्रेस ने उन्हें फिर स्टार प्रचारकों की सूची में प्रमुखता से जगह दी है.



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