Top
Home > राज्य > उत्तर प्रदेश > लखनऊ > यूपी के राजनैतिक घमासान में कैसे मायावती का बचेगा स्वाभिमान?

यूपी के राजनैतिक घमासान में कैसे मायावती का बचेगा स्वाभिमान?

उत्तर प्रदेश में ताजा हालातों में सभी दल अपने अस्तित्व की लड़ाई में जुटे हुए जिसमें सबसे बड़ी परेशानी मायावती के लिए है.

 Shiv Kumar Mishra |  24 Jan 2020 3:28 AM GMT  |  लखनऊ

यूपी के राजनैतिक घमासान में कैसे मायावती का बचेगा स्वाभिमान?
x

उत्तर प्रदेश में इस समय राजनैतिक घमासान मचा हुआ है. जहाँ बीजेपी के खिलाफ खड़े होकर अपने अपने बर्चस्व की लड़ाई लड़ी जा रही है. इस लड़ाई में कांग्रेस की प्रियंका गाँधी ने कूदकर सभी विपक्षी दलों में बेचैनी पैदा कर दी है. इस बेचैनी से सभी दलों के मुखिया परेशान है.

लेकिन सबसे ज्यादा परेशानी बसपा सुप्रीमों मायवती के सामने दिख रही है. जहाँ उबके पुराने सिपहसलार लगातार पार्टी को छोड़कर समाजवादी पार्टी में शामिल होते नजर आ रहे है. या किसी अन्य पार्टी में शामिल होते नजर आ रहे है. यह विखराव बसपा के सामने एक चुनौती बनी हुई है.

अब इस विखराव के समय मायावती ने एक नया एलान और कर दिया कि बसपा अब रूठे ब्राह्मणों को मनाएगी. क्योंकि बसपा को सबसे बड़ी जीत ब्राह्मणों के बल पर ही मिल चुकी है जो अब केवल ख्वाब बन गई है. लेकी जिस तरह से ब्राह्मण ने वोट देकर बसपा को जिताया था उसी गति से बसपा सरकार ने ब्राह्मणों पर हरिजन एक्ट का प्रयोग कर सबको नाराज कर दिया था. जिसका तोड़ सतीशचंद्र मिश्र और रामवीर उपाध्याय भी नहीं ढूढ पाए थे.

तो क्या नाराज ब्राह्मण बसपा के पाँव छूने से पुरानी गलतियों को मांफ कर फिर से हाथी को गणेश मानकर बसपा के साथ चल देगा. ब्राह्मण हमेशा आशीर्वाद देने वाला माना जाता है. इसलिए बसपा फिर से आशीर्वाद के लिए घर से निकल सकती है.

अब इसमें एक बड़ी गलती भी होगी. क्योंकि जिस बहुजन समाज को जगाने के लिए ब्राह्मणवाद का नारा देकर विरोध करने वाली बसपा क्या फिर अपने सजातीय लोंगों को समझा पाएगी ये भी एक बड़ा सवाल उत्पन्न होगा. जबकि इस सवाल से पहले बसपा में जमीनी कार्यकर्ता एक एक कर बसपा से बाय बाय कर रहे है. क्या मायावती को इस पर भी विचार करना चाहिए या नहीं. लेकिन इस बार इतना तो तय माना जा रहा हैकि यूपी की राजनीत में बड़े बदलाब के प्रबल संवाभना दिख रही है. कई दलों की नींद उडी हुई है तो कई अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ते नजर आ रहे है.

उसके बाद मायावती को अपने सजातीय भीम आर्मी चीफ चन्द्रशेखर से भी हिसाब किताब चुकता करना पड़ेगा जबकि पूर्वी यूपी से दलितों के नेता माने जाने वाले उदित राज अब कांग्रेस की राजनीत कर रहे है. मायावती के द्वारा प्रमोट किये पूर्व प्रमुख सचिव पीएल पुनिया भी कांग्रेस की राजनीत करते है जबकि एक दर्जन से ज्यादा दलित नेता समाजवादी पार्टी की साइकिल पर सवार हो चुके है. यूपी में संगठन के मामले में सबसे प्रथम स्थान पर रहने वाली बसपा का अब संगठन भी उतना ताकतवर नजर नहीं आ रहा है. तो इन सबके बीच मायावती का स्वाभिमान कैसे बचेगा?

Tags:    
स्पेशल कवरेज न्यूज़ से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें न्यूज़ ऐप और फेसबुक पर ज्वॉइन करें, ट्विटर, Telegram पर फॉलो करे...
Next Story
Share it