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फर्जी डॉक्टर ने 10 सालों में कर डाले 70 हजार ऑपरेशन, फर्जी थी MBBS की डिग्री, गिरफ्तार

देवबंद में ओमपाल नामक शख्स यहां के लोकल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में फर्जी डिग्री और फर्जी रजिस्ट्रेशन के आधार पर खुद को डॉक्टर राजेश आर के तौर पर दर्शा कर प्रैक्टिस कर रहा था।

 Special Coverage News |  1 Oct 2019 4:56 AM GMT  |  दिल्ली

फर्जी डॉक्टर ने 10 सालों में कर डाले 70 हजार ऑपरेशन, फर्जी थी MBBS की डिग्री, गिरफ्तार

मेरठ : सोचिए क्या हो जब 'मुन्नाभाई एमबीबीएस' और थ्री इडियट्स फिल्म के 'रणछोड़दास श्यामलदास चांचड़' का मिक्स स्वरूप एक ही व्यक्ति में साक्षात तौर पर देखने को मिल जाए। ऐसा ही एक वाकिया यूपी के सहारनपुर में देखने को मिला, जहां 10 सालों से प्रैक्टिस कर रहे फर्जी डॉक्टर को पुलिस ने अरेस्ट कर लिया है।

सहारनपुर (ग्रामीण) के एसपी विद्यासागर मिश्र के अनुसार, 'देवबंद में ओमपाल (50) नामक शख्स यहां के लोकल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में फर्जी डिग्री और फर्जी रजिस्ट्रेशन के आधार पर खुद को डॉक्टर राजेश आर के तौर पर दर्शा कर प्रैक्टिस कर रहा था। वह एक नर्सिंग होम भी चला रहा था। आरोपी अभी तक हजारों ऑपरेशन कर चुका था।'



मैसूरु से पढ़ने वाले दूसरे डॉक्टर के नाम पर बनाई डिग्री

पुलिस के अनुसार आरोपी ने मैसूरु यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस की पढ़ाई करने वाले एक डॉक्टर के नाम से फर्जी डिग्री बनवा ली। वह यहां सीएचसी में कॉन्ट्रैक्ट पर जुड़ा हुआ था। आरोपी के फर्जीवाड़े का खुलासा तब हुआ, जब फिरौती से जुड़ी एक कॉल के बाद वह पुलिस में शिकायत दर्ज कराने गया।

फर्जी डिग्री के आधार पर नौकरी, कर चुका है हजारों ऑपरेशन

एसपी ने बताया, 'आरोपी पहले मंगलुरु में एयर फोर्स बेस हॉस्पिटल में बतौर पैरामेडिक कार्यरत था, जिसकी पेंशन उसे अभी भी मिलती है। उसके साथ राजेश आर नामक एक डॉक्टर भी काम करते थे, जिसके बाद वह विदेश चले गए। राजेश के विदेश जाने के बाद ओमपाल ने उसकी एमबीबीएस की डिग्री पर अपनी तस्वीर लगाकर फर्जीवाड़ा कर लिया। डिग्री के आधार पर ही उसे सीएचसी में सर्जन की नौकरी मिली और उसने सर्जरी के कई सारे डिप्लोमा और सर्टिफिकेट बनवा लिए।'

पुलिस ने बताया कि देवबंद जैसी जगह पर किसी को शक ना हो इसलिए उसने होर्डिंग से लेकर हर जगह पर 'डॉक्टर राजेश शर्मा' के नाम का प्रयोग किया। आरोपी का खेल तब खत्म हुआ, जब उसे किसी अज्ञात शख्स ने फोन कर असली पहचान का खुलासा करने के एवज में 40 लाख रुपयों की डिमांड की। इसकी शिकायत करने वह पुलिस के पास गया, जहां पर उसकी पोल खुल गई।

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