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जिससे था जीवन का भय, वह नही रहा संसार मे, फिर भी सरकारी सुरक्षा क्यों?

जिससे था जीवन का भय, वह नही रहा संसार मे, फिर भी सरकारी सुरक्षा क्यों?
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धीरज श्रीवास्तव

रायबरेली। सदर से विधायक रहे अखिलेश सिंह के रसूख से कौन परिचित नही है, जनता के मध्य विधायक जी के सम्बोधन से उनकी एक अलग पहचान थी, उनसे जनता ही नही बड़े बड़े अधिकारी और धुरन्धर राजनेता भयभीत रहते थे।। अपने मजबूत जनाधार के बल पर वह राजनीतिक समीकरणों को अपनी इच्छा से जब चाहते पलट देते थे। उनके कद से विभिन्न दलों की राजनीति करने वाले पर्दे के पीछे ही नही बाहर भी एक साथ शक्ति प्रदर्शन करते थे किंतु वह उनके लिये कभी चुनौती नही बन सके। जनता उनसे अगाध प्रेम करती रही जबकि उनकी छवि एक माफि या के रूप में रेखांकित की गई।

सच मे वह एक रॉबिनहुड की तरह एक अपराजेय योद्धा की भांति अंतिम सांस तक जिये। स्वर्गीय पूर्व विधायक अखिलेश सिंह से अपने व परिवार को जीवन का खतरा बताकर भारतीय जनता पार्टी के एक बड़े नेता व समाजवादी पार्टी के बड़े नेता ने सुरक्षा हासिल की। दोनों नेताओं व उनके परिवार की सुरक्षा पर सरकारी धन खर्च हो रहा है।

अब जब अखिलेश सिंह का स्वर्गवाश हो चुका है तो उन्हें प्राप्त सुरक्षा के औचित्य पर प्रश्न खड़ा होना स्वाभाविक है कि जिस व्यक्ति से जीवनभय था उसके न रहने पर अब सरकार द्वारा दी गयी सुरक्षा का औचित्य क्या है। चमचमाती गाडिय़ों में फ र्राटा भरते यह लोग स्टेटस सिंबल के रूप में जिस तरह सरकारी सुरक्षा का लाभ ले रहे है, उसे उचित नही कहा जा सकता है। पूर्व विधायक अखिलेश सिंह का कोई गिरोह भी नही था कि कहा जा सके कि वो नही रहे लेकिन उनके गिरोह से खतरा है। जिलाधिकारी व पुलिस अधीक्षक के साथ खुफि या तंत्र की गोपनीय रिपोर्ट के बाद प्राप्त होने वाली सुरक्षा सरकार उसी समय तक प्रदान करती है जब तक जीवन भय होता है। यहां वर्षो से सरकारी सुरक्षा प्राप्त दोनो नेताओ को व उनके परिवार को व्यक्तिगत रूप से सुरक्षा कवच उपलब्ध कराया गया है। सुरक्षा प्राप्त नेताओ को अब स्वर्गीय हो चुके पूर्व विधायक से जीवन को कितना भय है इसकी प्रशसनिक स्तर पर समीक्षा होना आवश्यक है। अपने तगड़े रसूख के बल हासिल की गई सुरक्षा किसी सामान्य व्यक्ति के बस की बात नही न ही यह उद्देश्य है कि उन्हें जीवन भय नही था किंतु जिससे था वह अब इस संसार मे नही है तो समीक्षा की जानी चाहिये। सरकारी खर्च पर प्राप्त सुरक्षा कर्मियों के वेतन भत्तों आदि पर कर के रूप में जनता से प्राप्त धन दिया जाता है।

सांसद विधायको को मिलती निशुल्क सुरक्षा

संसद व विधानमंडल के सदस्यों को सरकारी स्तर पर सुरक्षा निशुल्क प्रदान की जाती है। पूर्व होने पर यही सुरक्षा वेतन का 25 प्रतिशत भुगतान होने पर प्रदान की जाती है। स्वर्गीय विधायक अखिलेश सिंह से जीवन का भय बताकर प्राप्त सुरक्षा इनको विधानमंडल के सदस्य निर्वाचित होने के पूर्व से मिल रही है । न्यायलय के भी इस सम्बंध में आदेश थे, निश्चित रूप से मानव जीवन अमूल्य है, उसकी सुरक्षा सरकार का कर्तव्य है। विधानमंडल के सदस्य के रूप प्राप्त सुरक्षा के अतिरिक्त सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की समीक्षा आवश्यक है, क्योंकि जिस शत्रु से जीवन भय होने के कारण सुरक्षा प्राप्त हुई वह अब संसार मे नही है इसलिये सुरक्षा की समीक्षा नियमत: आवश्यक है।

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