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भ्रष्टाचार की गंगोत्री में डूबा सदर का रजिस्ट्री ऑफिस, निबंधन कार्यालय में दस्तावेज नवीसों, भूमाफियाओं, सब रजिस्ट्रार के सयुंक्त सिंडिकेट मिलकर करते है बड़ा खेल

भ्रस्टाचार की जड़े इतनी गहरी है कि उसको खोज पाना सम्भवतः देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी सीबीआई के भी बस की बात नही

 Special Coverage News |  27 Nov 2019 11:18 AM GMT  |  रायबरेली

भ्रष्टाचार की गंगोत्री में डूबा सदर का रजिस्ट्री ऑफिस, निबंधन कार्यालय में दस्तावेज नवीसों, भूमाफियाओं, सब रजिस्ट्रार के सयुंक्त सिंडिकेट मिलकर करते है बड़ा खेल

धीरज श्रीवास्तव

रायबरेली। राजस्व विभाग से सम्बंधित सदर का निबंधन कार्यालय हो या जनपद के अन्य उप निबंधन कार्यालय सभी मे भ्रस्टाचार की जड़े इतनी गहरी है कि उसको खोज पाना सम्भवतः देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी सीबीआई के भी बस की बात नही है। जानते सब है कि राजस्व विभाग में निबंधन व तहसीलों में भ्रष्टाचार इतना अधिक गहरा है कि यदि उसकी निष्पक्ष जांच हो जाये तो ऊपर से लेकर नीचे तक एक भी कर्मचारी सेवा में नही रहने पायेगा, सबकी बरखस्तगी निश्चित होगी, लेकिन इस ओर देखने के लिये कोई सरकार लगता तैयार नही है। सदर निबंधन कार्यालय में व्याप्त भ्रस्टाचार घुस न देने पर भूमि भवन की जांच उपरांत बैनामा करने या बैनामा के बाद दबाव बनाकर वसूली की रणनीति से आम जनमानस का जैसा उत्पीड़न होता है उसको देखकर लगता है कि शायद गुलामी काल मे अंग्रेजो ने भी भारतीयों का इतना उत्पीड़न न किया होगा, निबंधन कार्यालय में दस्तावेज नवीसों, भूमाफियाओं, सब रजिस्ट्रार के सयुंक्त सिंडिकेट द्वारा यहां पूरा खेल खेला जाता है। 5 से 20 लाख रुपये तक कि सम्पत्तियों में तय मूल्य का 2 प्रतिशत सुविधा शुल्क के नाम पर स्टाम्प व रसीद खर्चे के अतिरिक्त वसूला जाता है वही 20 लाख रुपये मूल्य से अधिक की सम्पत्तियों के मामले में आयकर, जिलाधिकारी व महानिरीक्षक स्टाम्प का भय दिखाकर उनके लिये अतिरिक्त हिस्से की मांग की जाती है जिसके लिये निबंधन परिसर के बाहर एक निजि फ्लैट का उपयोग करते हुए क्रेता को दस्तावेज नवीस के मार्फ़त तलब किया जाता है, सुविधा शुल्क न देने पर निबंधन प्रक्रिया को लटकाया जाता है अंततः क्रेता से मोलभाव कर वसूली करने के उपरांत ही उसका काम होता है।

ईमानदारी से होता बंटवारा

निबंधन कार्यालय का कोई कर्मचारी क्रेता से सीधे घुस की रकम नही लेते इसकी पूरी जिम्मेदारी दस्तावेज लेखक की होती वह क्रेता से वसूली करता है घुस की रकम सब रजिस्ट्रार के पेशकार को दी जाती है कुल रकम से दस्तावेज लेखक अपना और दलाल का हिस्सा पहले ही काट लेता है इस तरह आपसी विश्वास के बल पर घूसखोरी का खेल यहां चलता है जिसको सभी जानते है लेकिन कभी उच्चधिकारियों द्वारा हस्तक्षेप नही किया गया।

पिछले साहब का जलवा भी था

पिछले सब रजिस्ट्रार लखनऊ से प्रतिदिन दोपहर बाद अपने निजी चाक के साथ निजी कार द्वारा कार्यालय आते थे उनके सहायक यहां पूरा काम देखते थे साहब एक दिन पूर्व के निबंधित दस्तावेजो पर हस्ताक्षर के बाद वसूली रकम का हिस्सा प्राप्त करते थे, क्या सम्भव है कि बिना घूसखोरी के कोई उप निबन्धक अपने वेतन से प्रतिदिन निजी कार द्वारा आकर ड्यूटी करेगा। निबंधन कार्यालय में तैनात कर्मचारी करोड़ो की नामी बेनामी सम्पत्तियों के साथ नकदी के मालिक है, लाखो की बीमा पॉलिसी लिए है, कई कर्मचारियों के मैरिज लान तक बेनामी है।

वसूली के लिये शहर के मध्य बने एक अपार्टमेंट के निजी फ्लैट का उपयोग

वर्तमान सब रजिस्ट्रार भारी कीमत की सम्पत्तियों के निबंधन में क्रेताओं को भयभीत कर आयकर, जिलाधिकारी व महानिरीक्षक स्टाम्प के नाम पर वसूली करते है इसमें दसतावेज लेखक का सहयोग भी लिया जाता है तयरकम कि वसूली की जिम्मेदारी लेखक की होती है वसूली की रकम मिलने पर सम्पत्ति की रजिस्ट्री की जाती है।

जिलाधिकारी ने लिखा जांच के लिये

निबंधन कार्यालय में व्याप्त भ्रष्टाचार की जांच के लिये महानिरीक्षक स्टाम्प को पत्र लिखकर मामले का गम्भीरता पूर्वक संज्ञान लेने का अनुरोध किया है। सम्भवतः जनपद में किसी जिलाधिकारी ने पहली बार इस ओर गम्भीरता प्रदर्शित करते हुए जांच कराने की पहल की है, अब देखना है कि शासन की शून्य भ्रष्टाचार नीति के अंतर्गत राजस्व विभाग भविष्य में क्या जांच करता है, कब करता है और जांच में कितनी पारदर्शिता प्रदर्शित करता है।

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