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यूपी के रायबरेली में अखिलेश सिंह के निधन से बाहुबली राजनीति का अंत

अखिलेश सिंह का खौफ इतना था कि चुनाव के दौरान कांग्रेसी अपना पोस्टर भी नहीं लगा पाते थे।

 Special Coverage News |  20 Aug 2019 6:11 AM GMT  |  रायबरेली

यूपी के रायबरेली में अखिलेश सिंह के निधन से बाहुबली राजनीति का अंत

रायबरेली से प्रदीप त्रिवेदी की रिपोर्ट

रायबरेली में सदर सीट से पाँच बार के पूर्व विधायक अखिलेश सिंह का लंबी बीमारी के चलते पीजीआई में प्रातः चार बजे निधन हो गया। जनता के दिलों में बसने वाले पूर्व सदर विधायक अखिलेश सिंह को प्रदेश के बाहुबली विधायकों में शुमार किया जाता है।

उत्तर प्रदेश के रायबरेली से कांग्रेस विधायक अदिति सिंह के पिता अखिलेश सिंह का मंगलवार तड़के लखनऊ में निधन हो गया। उन्होंने लखनऊ के पीजीआई में अंतिम सांस ली। बताया जा रहा है कि वह लंबे समय से कैंसर से पीड़ित थे। उनका पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव रायबरेली के लालूपुर लाया जाएगा, जहां उनका अंतिम संस्कार होगा।

जानकारी के अनुसार अखिलेश सिंह लंबे समय से कैंसर से लड़ाई लड़ रहे थे और उनका इलाज सिंगापुर में भी चला। बताया जा रहा है कि नियमित जांच के लिए वह लखनऊ के पीजीआई आए, जहां तबियत बिगने पर उन्हें एडमिट होना पड़ा और मंगलवार तड़के उन्होंने अंतिम सांस ली। उनकी मौत से पूरे परिवार में शोक की लहर दौड़ गई। अखिलेश सिंह का जन्म 15 सितंबर 1959 में हुआ था। अखिलेश सिंह के बारे में कहा जाता है कि वह रायबरेली की राजनीति के बेताज बादशाह थे। उनकी विरासत उनकी बेटी अदिति सिंह संभाल रही हैं। 2017 में जब मोदी लहर में भाजपा ने उत्तर प्रदेश में ऐतिहासिक जीत दर्ज की तो, उसके बीच भी अदिति ने रिकॉर्ड मतों से चुनाव जीता और विधायक बनीं। विगत विधानसभा चुनाव में अखिलेश सिंह ने अपने स्थान पर बेटी अदिति सिंह को चुनाव लड़कर विधायक बनवाया था। अखिलेश के रसूख का ही परिणाम था कि सोनिया गांधी ने अदिति को बिना मांगे कांग्रेस का टिकट दिया था।

अखिलेश सिंह रायबरेली सीट से पांच बार विधायक चुने गए। उन्होंने अपने सियासी सफर की शुरुआत कांग्रेस से की थी। हालांकि राकेश पांडेय हत्याकांड के बाद उन्हें कांग्रेस से बाहर निकाल दिया गया था। इसके बावजूद वह कई बार निर्दलीय विधायक चुने गए।

विडंबना इस बात की है कि राकेश की मौत के बाद उनके दलबदलू भाई मनोज पांडेय के सहानुभूति का लाभ उठाकर विधायकी हासिल की, जबकि राकेश की विधवा भारती पांडेय को भी कांग्रेस में सम्मान नहीं मिल सका और कालांतर में अखिलेश फिर कांग्रेस से जुड़ गए।

2012 के यूपी विधानसभा चुनाव से पहले अखिलेश सिंह पीस पार्टी में शामिल हो गए थे और गांधी परिवार को खूब कोसा करते थे। कहा तो यहां तक जाता है कि अखिलेश सिंह का खौफ इतना था कि चुनाव के दौरान कांग्रेसी अपना पोस्टर भी नहीं लगा पाते थे।

अखिलेश के निधन की खबर मिलते ही पूरे जिले में शोक की लहर दौड़ गई। शहर की सभी दूकाने आज बंद रहेंगी। जिले के अन्य हिस्सों में भी लोग शोकाकुल हैं।

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