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अभी अभी: कैराना से बीजेपी सांसद हुकुम सिंह का निधन, बीजेपी में शोक की लहर

 शिव कुमार मिश्र |  2018-02-03 16:09:00.0  |  दिल्ली

अभी अभी: कैराना से बीजेपी सांसद हुकुम सिंह का निधन, बीजेपी में शोक की लहर

उत्तर प्रदेश के कैराना लोकसभा क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी के सांसद हुकुम सिंह का निधन हो गया. वो काफी दिनों से अस्वस्थ चल रहे थे. हुकुम सिंह चौदहवीं लोकसभा के लिए पहली बार चुने गये थे. इससे पहले वो उत्तर प्रदेश विधानसभा के कई बार सदस्य रहे. बीजेपी की सरकार में मंत्री भी बने थे.

सांसद हुकुम सिंह का लंबी बीमारी के बाद अभी अभी निधन हो गया . वे नोएडा के जेपी अस्पताल में भर्ती थे. 79 साल के हुकुम सिंह यूपी के कैबिनेट मंत्री रह चुके थे.

हुकुम सिंह का अतीत रहा ही कुछ ऐसा है. क़ानून की पढ़ाई करने के बाद उत्तर प्रदेश की न्यायिक सेवा की परीक्षा भी पास की. लेकिन उन्होंने जज बनने की जगह सेना में जाना बेहतर समझा. उन्होंने 1962 में चीन के साथ हुए युद्ध में हिस्सा लिया.

फ़ौज से रिटायर होकर वकील बन गए. और 1974 में वो राजनीति में सक्रिय हो गए. 2013 से पहले मीडिया में उनकी इतनी चर्चा कभी नहीं होती थी जबकि वो सात बार विधायक और उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं.

हुकुम सिंह चर्चा में तब आए जब मुज़फ्फरनगर दंगे के बीच उन्होंने कथित तौर पर 'नफ़रत भरे बयान' दिए. जबकि शामली में और उत्तर प्रदेश की विधानसभा में उन्हें एक 'सुलझा हुआ' और 'गंभीर' वक्ता माना जाता है.

कुछ दिन पहले उन्होंने बीबीसी से कहा था, " मैं अब भी कह रहा हूँ कि कैराना से हो रहे पलायन का मामला सांप्रदायिक नहीं है. यह क़ानून व्यवस्था का मुद्दा है. लोग इसे सांप्रदायिक मुद्दा इसलिए बनाना चाहते हैं ताकि उन गुंडों को संरक्षण मिल सके."

हुकुम सिंह ने राजनीतिक सफ़र 1974 में कांग्रेस के साथ शुरू किया. कांग्रेस के टिकट पर वो दो बार विधायक चुने गए.फिर उन्होंने जनता पार्टी की तरफ से चुनाव लड़ा और विधायक चुने गए. वो 1995 में भाजपा में शामिल हो गए और चार बार विधायक रहे. मगर 2009 में वो लोकसभा चुनाव हार गए थे. फिर मुज़फ्फरनगर के दंगों के बाद हुए लोकसभा चुनाव में वो भारी मतों से जीते.


पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति को क़रीब से देखने वालों को लगता है कि सुलझे हुए नेता माने जाने वाले हुकुम सिंह भी वही सबकुछ करना चाह रहे थे जो राजनीति और पार्टी में उनके बहुत बाद में आए नेताओं ने किया, यानि की बयानों और विवादों के ज़रिए राजनीति के शीर्ष पर पहुंचना.

सात बार विधायक रहने और संगठन में इतने दिन तक काम करने के बाद भी हुकुम सिंह इस बार के केंद्रीय मंत्रिमंडल में अपनी जगह नहीं बना पाए.

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