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मुख्यमंत्री का श्रावस्ती मॉडल का हाल जिले में बेहाल,चार दिन की चांदनी फिर वही अंधेरी रात!

चार दिन की चांदनी फिर वही अंधेरी रात वाली कहावत को चरितार्थ कर रहे जिले के अफसर

 Special Coverage News |  2018-10-04 09:14:07.0  |  सुल्तानपुर

मुख्यमंत्री का श्रावस्ती मॉडल का हाल जिले में बेहाल,चार दिन की चांदनी फिर वही अंधेरी रात!

लाल जी

प्रदेश की भाजपा सरकार और उसके मुखिया योगी आदित्यनाथ प्रदेश में कानून व्यवस्था व न्याय स्थापित करने की चाहे जितनी कोशिशें कर ले पर जिले के अफसर सारी योजनाओं का बंटाधार करने पर तुले हुए हैं। योजनाएं शुरू होती है, चंद दिनों के बाद असर हीन हो जाती है। चाहे बात करे गड्ढा मुक्त सड़क अभियान की चाहे बात हो अवैध बूचड़खाने की,एंटी रोमियो की, लगभग सारी योजनाएं सुषुप्त अवस्था में चली गई। सुल्तानपुर में तो कमोबेश यही देखा जा रहा है केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री आवास योजना हो या स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत शौचालय निर्माण हर तरफ कागजी खानापूर्ति और भ्रष्टाचार का ही बोलबाला है।


प्रदेश में जमीनी विवाद और भू माफियाओं से निपटने के लिए मुख्यमंत्री की महत्वाकांक्षी योजना श्रावस्ती मॉडल जब लागू हुई तो तत्कालीन जिलाधिकारी हरेंद्र वीर सिंह व संगीता सिंह ने जिले में परवान चढाया। सप्ताह के सोमवार व बृहस्पतिवार को जिलाधिकारी स्वयं दल बल के साथ श्रावस्ती मॉडल के अंतर्गत आई शिकायतों के निस्तारण के लिए मौके पर मातहतों के साथ पहुंचकर शिकायतों का निस्तारण शुरू किया तो जिले में उनके न्याय के चर्चे होने लगे वर्षो के विवाद श्रावस्ती मॉडल में चुटकियों में हल होने लगे। दूरदराज ग्रामीण क्षेत्रों में चाहे सरकारी जमीनों पर कब्जे का मामला हो या आपस में जमीनी विवाद जिलाधिकारी के साथ पुलिस व राजस्व विभाग के अफ़सर मौके पर शत प्रतिशत न्याय करते हुए निस्तारण करते रहे। वर्तमान जिलाधिकारी विवेक वैसे तो न्याय प्रिय व सब की सुनने वाले माने जाते हैं पर डीपीआरओ समेत अफसरों ने उन्हें माया जाल में फंसा दिया है। यह न तो जिले को ओडीएफ करा पाए, न ही श्रावस्ती मॉडल पर कोई प्रगति दिखी। जानकार सूत्रों का कहना है कि डीपीआरओ व इनके जैसे अफसर जो जिलाधिकारी को गुमराह करते रहे हैं विकास कार्यों की प्रगति की सच्चाई छिपाते रहते हैं चाहे प्रदेश सरकार के बड़े अफसरों द्वारा डीएम को फटकार ही ना लगती रहे इन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता।

सूत्रो की मानें तो जब भी जिलाधिकारी विवेक श्रावस्ती मॉडल की बात करते हैं तो उन्हें गोलमोल जवाब देकर टाल दिया जाता है। जिले की जनता एक बार फिर डीएम विवेक को श्रावस्ती मॉडल के अंतर्गत आने वाली शिकायतों को प्राथमिकता से हल करने को आशा भरी निगाहों से देख रही है । कब उनके दरवाजे पर न्याय चलकर आएगा।

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