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कांग्रेस की इस परम्परागत सीट पर क्यों नहीं बची जमानत?

 Special Coverage News |  25 May 2019 10:45 AM GMT  |  सुल्तानपुर

कांग्रेस की इस परम्परागत सीट पर क्यों नहीं बची जमानत?

कभी कांग्रेस का गढ़ रहे सुल्तानपुर लोकसभा सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी की लगातार दूसरी बार जमानत जब्त हुई है। लेकिन हार का मंथन करने के बजाय यहाँ का संगठन एक दूसरे पर दोषारोपण करने पर जुटा हुआ है। लिहाजा अपनी ही पार्टी के सीनियर नेताओं की रस्साकसी से नाराज आज एनएसयूआई जिलाध्यक्ष समेत सभी पदाधिकारियों ने अपना इस्तीफ़ा सौंप दिया और आलाकमान से नये सिरे से संगठन में बदलाव की बात कही।


बताते चलें कि इस बार सुल्तानपुर लोकसभा सीट से कांग्रेस ने अमेठी के राज घराने से ताल्लुक रखने वाले असम से राज्यसभा सांसद डॉ संजय सिंह को प्रत्याशी घोषित किया था, लेकिन इस चुनाव में उन्हें महज 41 हज़ार वोट ही मिल सके। वही 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी ने इनकी पत्नी अमिता सिंह को चुनाव मैदान में उतारा था, लेकिन वे भी करीब 44 हज़ार वोट पा सकी थी। इन चुनाव में संजय और अमिता सिंह दोनों की जमानत जब्त हो गई।


इस पर मंथन करने के बजाय सुल्तानपुर का सीनियर संगठन दोषारोपण पर जुटा हुआ है। ये कहना है सुल्तानपुर के एनएसयूआई जिलाध्यक्ष मानस तिवारी का, जिन्होंने आज अपने सभी पदाधिकारियों के साथ एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष को अपना इस्तीफ़ा भेज दिया। मानस की माने तो पिछले कई महीनों से इन लोगों ने पार्टी के लिये बेजोड़ मेहनत की बावजूद इसके पार्टी को इतने कम मत मिले। कहने को सुल्तानपुर जिले के ज्यादातर नेता गांधी परिवार से अपने आपको बेहद करीबी बताता है बावजूद इसके इस हार पर मंथन करने के बजाय वे आरोप प्रत्यारोप पर जुटे हुये हैं।


आज वही हुआ जो कभी किसी ने सोचा नही था कि भाजपा प्रत्याशी व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी ने अपनी कड़ी मेहनत से जीत हासिल कर 38-सुल्तानपुर लोकसभा सीट पर वर्षो का रिकार्ड तोड़ कर इतिहास रच दिया। जीत के साथ ही वह सुल्तानपुर लोकसभा सीट से जीतने वाली पहला महिला सांसद बनी है।

अभी तक सुल्तानपुर में विपक्षियों ने एक हवा उड़ाई थी कि अभी तक कोई महिला यहां जीत नही हासिल की है लेकिन आज उन्ही विपक्षियों के मुंह पर एक सीधा तमाचा है कौन कहता है कि कर्म का फल मीठा नही होता,और पुराने जमाने की एक कहावत है कर्म करो एक दिन फल जरूर मिलेगा, भले ही सुल्तानपुर लोकसभा सीट से दीपा कौल समेत कई महिलाओं ने अपनी किस्मत आजमाई हो और वह परास्त हो गईं, लेकिन आज वही सुल्तानपुर लोकसभा सीट पर देखने को मिला। मेनका के कर्मो का फल उन्हें मिल चुका है। और वह एक इतिहास रच महिलाओं का सम्मान रखा है।

भाजपा मुखिया ने इस बार जिले की लोकसभा सीट पर मां और बेटे की सीट पर भले ही अदला-बदला कर दी थी, लेकिन सुल्तानपुर की जनता में वही सांसद वरुण गांधी का ही तस्वीर दिखाई देती थी उनकी माँ में लोग वरुण गांधी को ही अपना सांसद मान कर उनकी माँ को अपना मत दिया था, जिसका जीता-जागता सबूत यहां की जनता ने अपनी भारी मतों से वोट कर यहां का सांसद चुना।

विजय के साथ ही सुल्तानपुर लोकसभा से जीतने वाली पहला महिला सांसद बनी। हालांकि इसके पहले भी वर्ष सपा प्रत्याशी के तौर पर मौजूदा सूबे की मंत्री रीता बहुगुणा जोशी समेत कई महिला मैदान में उतरी थीं लेकिन वे कांटे के संघर्ष में भाजपा के डीबी राय से चुनाव हार गई थीं। दूसरे स्थान पर रहते हुए उन्हें 2,05,583 मत मिला था। इसके बाद 1999 के चुनाव में कांग्रेस ने गांधी परिवार की करीबी दीपा कौल को उम्मीदवार बनाया था। वे 82,385 वोट में ही सिमट गईं थी। वे चौथे स्थान पर रहीं। वर्ष 2004 के आम लोकसभा चुनाव में भाजपा ने डॉ. वीणा पांडेय को प्रत्याशी बनाया था। वीणा पांडेय भी 91,296 वोटों के साथ चौथे स्थान पर रहीं।

वर्ष 2014 के चुनाव में कांग्रेस ने मौजूदा प्रत्याशी डॉ. संजय सिंह की पत्नी अमीता सिंह को उम्मीदवार बनाया था। चुनाव में उन्हें करारी शिकस्त मिली। आजादी के बाद मेनका गांधी इस लोकसभा सीट पर जीत दर्ज करने वाली पहली महिला सांसद बनी हैं।

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