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बंगाल के दार्जलिंग में दिखा अजब नजारा, जब बीजेपी और कम्युनिस्ट का झन्डा एक ही मंच पर लगा

 Special Coverage News |  15 April 2019 7:10 AM GMT  |  दार्जलिंग

बंगाल के दार्जलिंग में दिखा अजब नजारा, जब बीजेपी और कम्युनिस्ट का झन्डा एक ही मंच पर लगा
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प्रथ्वीसदास गुप्ता

18 तारीख को देश में दूसरे चरण का चुनाव है. जिसमें पश्चिम बंगाल की सबसे चहेता क्षेत्र और सबसे चर्चित क्षेत्र दार्जिलिंग है. जहां पर पिछले दो बार भाजपा ने जीत हासिल की है. इस बार ममता बनर्जी ने ऐलान किया है कि तृणमूल कांग्रेस इस बार दार्जिलिंग से अपनी जीत हासिल करके रहेंगे. क्योंकि पिछले दो बार गोरखा जनमुक्ति मोर्चा पहाड़ की पार्टी बीजेपी के साथ खडी हुई थी, जिसके चलते बीजेपी को यह जीत हासिल हुई. इस बार गोरखा जनमुक्ति मोर्चा टूट चुके हैं.


आधा हिस्सा तृणमूल के साथ चले गए और आधा हिस्सा भाजपा के साथ उसमें भी भाजपा वाले जो गोरखा जनमुक्ति मोर्चा है उनका लीडर विमल गुरु और रोशन गिरी पहाड़ छोड़कर भागे हुए हैं उनके ऊपर कई केस दर्ज हो चुके हैं पर मजे की बात यह है. लेकिन गोरखा जनमुक्ति मोर्चा की सबसे बड़ा दुश्मन पहाड़ की दूसरी पार्टी सुभाष घीसिंग की अपनी पार्टी जीएनएलएफ जो एक समय में पहाड़ में राज करता था वह उन दोनों में इतनी दुश्मनी थी कि गोरखा जनमुक्ति मोर्चा के चलते सुभाष सिंह को बाहर छोड़कर भागना पड़ा था. पर आज समय की देर है वही गोरखा जनमुक्ति मोर्चा एक हिस्सा और जीएनएलएफ के साथ-साथ छोटे बड़े 8 पार्टी पहाड़ में एक साथ हाथ मिलाकर भाजपा की उम्मीदवार राजू सिंह विस्ता को जिताने के लिए मैदान में कूद चुके हैं.


आज की रैली खरसिया विधानसभा में थी जिस में सबसे बड़ी एक अनोखी चीज देखने को मिली. जो बंगाल में नहीं पूरे देश में शायद यह पहली बार दार्जिलिंग की कम्युनिस्ट पार्टी इस आठ पार्टी के गठबंधन के साथ जुड़ गए और कम्युनिस्ट पार्टी की दार्जिलिंग की है. उन्होंने खुलेआम बीजेपी को समर्थन किया जो पूरे देश में कभी ना हुआ है ना शायद कभी होगा. आज की रैली की पूरे मैदान में रैली में हर जगह में कम्युनिस्ट पार्टी की झंडा भी बाकी पार्टियों की झंडे के साथ लगा हुआ था. जिसमें हवा हवा थोड़ा लगा हुआ था लाल माटी की लाल झंडा आज बीजेपी की झंडे के साथ एक साथ यह शायद पहली बार ही पूरे बंगाल के साथ-साथ पूरे देश में आज देख गया.






आज रैली में बहुत सारे लोगों के बाहर के लोगों की उत्साह देख इस रैली को संबोधित किया. भाजपा की चुनावी कमेटी के चेयरमैन भाजपा नेता मुकुल रॉय और बंगाल की भाजपा की प्रभारी अरविंद बैनर्जी और सहयोगी पार्टी की तरफ से बाहर की नेताओं ने उस मंच से भीड़ को संबोधित किया. सबसे बड़ी बात यह है कि जो पहाड़ पिछले 2 चुनाव में 2009 और 2014 की इलेक्शन में गोरखालैंड को लेकर के और गोरखालैंड की दावे में रास्ते पर उतर चुके थे. उस पहाड़ में ना बीजेपी के उम्मीदवार की तरफ से गोरखालैंड के ऊपर कोई आश्वासन है ना भाजपा की तरफ से कोई आश्वासन है ना किसी और की तरफ से जबकि तृणमूल शुरू से ही इसके खिलाफ है.


आज इस रैली में हर एक नेता के मुंह से बार-बार विमल गुरुओं के नाम आते रहे जो कि आज पहाड़ में नहीं है. पहाड़ छोड़कर भागे हुए हैं. पहाड़ के लोगों की कहना यह है कि एक डर का माहौल बना हुआ है. हम सामने कुछ नहीं बोलेंगे अपने मतदान में हम अपना जवाब देंगे. 2017 में पहाड़ में हुए आंदोलन के चलते 11 लोगों की मौत हुई है. पुलिस के साथ मतभेद में जिसके कारण बाहर के लोग राज्य सरकार के खिलाफ गुस्से में हैं. पर पहाड़ के ही जनमुक्ति मोर्चा की एक बड़े हिस्से बीमा के नेतृत्व में उनके साथ खड़े हुए हैं. देखने की बात यह भी है कि गोरखा जनमुक्ति मोर्चा से 2016 में दार्जिलिंग विधानसभा क्षेत्र से विधायक बने अमर सिंह राय इस बार तृणमूल के उम्मीदवार है. दार्जिलिंग का सबसे बड़ी बात यह है अमर सिंह सन ऑफ सेल भूमि पुत्र है और भाजपा की उम्मीदवार मणिपुर से है. यह उनकी उनकी सोच में फिनोल का दावा है कि दार्जिलिंग की विधायक इस बार हमारा उम्मीदवार है. हम इस बार चुनाव जरूर जीतेंगे अब देखते हैं कि तृणमूल का यह दावा और बीजेपी की बीजेपी की जीत की धारा थी वह बरकरार रहता है या नहीं यह 23 जून चुनाव के नतीजे तक इंतजार करना पड़ेगा.


आज की रैली में अरविंद मीणा ने जमकर तृणमूल के ऊपर हमला किया. उन्होंने कहा तृणमूल की लीडर ममता बनर्जी ने जहां से ट्रेनिंग लिया उस स्कूल का नाम है कांग्रेस. जहां जिस कांग्रेस के खिलाफ ए से जेड तक करप्शन के आरोप है. उन्होंने ए से लेकर जेड तक 11 करप्शन के नाम लिए. तो वहीं दूसरी तरफ मुकुल राय का कहना है कि ममता बनर्जी ने पहाड़ के साथ नाइंसाफी की है. ममता बनर्जी ने दार्जिलिंग के साथ नाइंसाफी की है. कोई डेवलपमेंट नहीं हुआ और यह सरकार बुआ भतीजे का सरकार चल रहा है. यह सरकार एक सिंडिकेट की सरकार चल रहा है इस बार लोकतंत्र की जीत होगी बंगाल में यह दावा था उनका आगे देखते हैं एक दूसरे के ऊपर आरोप लगाते हुए चुनाव के माहौल जितने आगे आ रहे हैं इतनी गर्म हो रहा है. पहाड़ में दार्जिलिंग क्षेत्र में 3 विधानसभा है. पहाड़ में और 4 विधानसभा क्षेत्र प्लेन में हैं. हालांकि हर बार पारी 3 विधानसभा क्षेत्र से ही भाजपा की उम्मीदवार कितने वोटों से अपनी जीत हासिल करते हैं. कि प्लेंस में आकर वह बरकरार रह जाता है. इस बार की नतीजा क्या होता है वह देखने वाला है. क्योंकि जनमुक्ति मोर्चा की एक बड़े हिस्से के साथ हैं?

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