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बंगाल में हिंसा: रायगंज लोकसभा क्षेत्र में क्यों हुई हिंसा? जानिए पूरी रिपोर्ट

 Special Coverage News |  18 April 2019 6:09 AM GMT  |  दिल्ली

बंगाल में हिंसा: रायगंज लोकसभा क्षेत्र में क्यों हुई हिंसा? जानिए पूरी रिपोर्ट
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प्रथ्वीसदास गुप्ता

पश्चिम बंगाल की रायगंज लोकसभा क्षेत्र में जो कि कल रात से ही कई मतदान केंद्र में राज्य की पुलिस तैनात की गई. इस मुद्दे को लेकर के गांव के लोगों में बड़ा नाराजगी थी. उन लोगों ने अपनी नाराजगी जताई है. कल रात 10:00 बजे 185 नंबर मतदान केंद्र से ईवीएम लेकर के प्रसाइडिंग ऑफिसर कोशिशों के साथ सारे मतदान कर्मियों अपने बूथ छोड़ कर चले गए. आज सुबह से रायगंज में कई जगह पर लोग नाराज है. क्योंकि वहां सेंट्रल फोर्स नहीं है.


वहीं ग्रामीण कह देना चाहते हैं. क्योंकि पिछले पंचायत चुनाव से लोगों के मन में डर सा बैठा हुआ है. क्योंकि यही रायगंज लोकसभा क्षेत्र हैं जहां पर कई जगह मतदाताओं ने अपने मतदान नहीं कर पाए जाने का आरोप लगाया है. तृणमूल कांग्रेस के ऊपर कई पार्टियों ने अपना उम्मीदवार भी नहीं खड़ा कर पाए. पंचायत चुनाव में सबसे बड़ी बात यह पंचायत चुनाव में यहां पर एक प्रसाइडिंग ऑफिसर की मौत हो गई थी.




लोगों का कहना था कि तृणमूल कांग्रेस के लोगों से उनकी झड़प हुई उसके बाद वह अपने मतदान केंद्र से निकल गए. दूसरे दिन मतदान केंद्र से 18 किलोमीटर दूर रेलवे ट्रैक पर उनकी लाश मिली. पुलिस का कहना था कि उन्होंने सिगरेट पीने के लिए मतदान केंद्र से बाहर गया था शायद यह सूइसाइड .है गांव के लोग जगह-जगह पर सुबह से नाराजगी जता रहे हैं. पुलिस के ऊपर कोई भरोसा नहीं है.सबसे बड़ी दीदी की बात है. बंगाल की लोगों में बंगाल के जनता के पास गांव के जनता के पास बंगाल की पुलिस के ऊपर कोई भरोसा नहीं है. जिसके कारण गांव के लोग सड़क पर उतर आए.




सुबह से वोट मतदान का केंद्र में जाने के लिए मना कर रहा है और पुलिस को नहीं वह लोग हर एक मतदान केंद्र में केंद्रीय पुलिस सेना को तैनात चाहता है. अब यह देखते हैं शाम तक क्या क्या होता है ऐसा जीतने टाइम हुआ सुबह आज कई केंद्रों पर मतदान केंद्र पर बम गोली गोली भी चली है. आरोप है तृणमूल के लोंगो ने उनके ऊपर गोली चलाई बम गिराए. क्योंकि आम जनता मतदान नहीं कर पाए. इसके लिए अब देखते हैं. सेना आ चुकी हैं. उन्होंने पूरे एरिया की कंट्रोल ले लिए है. अब देखते हैं आगे वोट डालने यह गांव वाले आते हैं या नहीं कुल मिलाकर यह बात साफ हो गई कि बंगाल की जनता का कोई बंगाल पुलिस के ऊपर भरोसा नहीं है.




बंगाल पुलिस के ऊपर हर कोई भरोसा नहीं करना चाहता है. उनके मतदान केंद्र में सेना तैनात किया जाए. यह लालगंज क्षेत्र ऐसा है जिसमें सीपीआईएम की पिछले सांसद रहे मोहम्मद सलीम पर इस्लामपुर विधानसभा क्षेत्र में आज सुबह उनके गाड़ी के ऊपर भी हमला हुआ है. दूसरी तरफ कांग्रेस की यहां पर उम्मीदवार पूर्व मंत्री रहे प्रियरंजन दशमुंसी की धर्मपत्नी दीपा दास मुंशी और बीजेपी के तरफ से भाजपा की राज्य की वरिष्ठ नेत्री देवश्री चौधरी और तृणमूल कांग्रेस से यहां पर उम्मीदवार कन्हैया लाल अग्रवाल है. जो कि इस लोकसभा क्षेत्र के अंदर एक विधानसभा से विधायक विधायक भी है.




हालांकि 2014 में नतीजे आने के बाद तृणमूल कांग्रेस यहां पर तीसरी पोजीशन में रही. यहां पर कांटे की टक्कर है. बहुत कम वोटों से पिछले बार सीपीआईएम के उम्मीदवार मोहम्मद सलीम अपनी जीत हासिल की थी. भाजपा का दावा है कि यहां पर इस बार भाजपा जीतेगी. अब देखते हैं 23 मई तक इंतजार करना पड़ेगा. इसके लिए और कहां क्या होते हैं. जगह जगह जगह पर लोगों की नाराजगी है. सेना को लेकर के पूरे हर जगह पर सेना क्यों नहीं दिया गया कुल मिलाकर पूरे देश की नजर टिकी हुई है. बंगाल की लोकसभा चुनाव के ऊपर सबकी निगाह टिकी हुई है अकहिर किस करवट बैठेगा इस बार का ऊंट.



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