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आज रात 12 बजे से एक लघुकथा, जादूगर पाशा के पास हर मर्ज की एक दवा थी..ये बंद कर दो..वो बंद कर दो.

दूसरे मनसबदार ने कहा कि हुज़ूर कम से कम वक्त रहते हमें ही सूचित कर देते..घरबंदी की तैयारी आप नहीं कर सकते थे तो हम ही कर लेते

 Shiv Kumar Mishra |  29 March 2020 9:17 AM GMT  |  दिल्ली

आज रात 12 बजे से एक लघुकथा, जादूगर पाशा के पास हर मर्ज की एक दवा थी..ये बंद कर दो..वो बंद कर दो.
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वन्स अपॉन अ टाइम..थेयर वज अ किंग...उसका नाम पाशा था..लेकिन प्यार से लोग उसे जादूगर पाशा कहते थे..जनता को लगता था कि वो जादू से सब ठीक कर देगा..महाराज पाशा को भी ये खुशफहमी थी कि उसके पास सब समस्याओं का इलाज है..राजा को सुंदर पोशाक पहनने और बोलने का भी बहुत शौक था..चूंकि राज्य बहुत बड़ा था इसलिए जादूगर पाशा ने अपने राज्य को छोटी-छोटी रियासतों में बांट रखा था और रियासतों की जिम्मेदारी मनसबदारों को दे रखी थी...एक बार राज्य में छूत वाली महामारी फैली..छूत वाली बीमारी ना फैले इसके लिए सभी मनसबदारों ने अपनी रियासत में तालाबंदी और घरबंदी का एलान कर दिया और महामारी से जूझने के उपाय करने लगे.

जादूगर पाशा को लगा कि उसे भी कुछ करना चाहिए..वरना मनसबदार वाहवाही लूट लेंगे..जादूगर पाशा के पास हर मर्ज की एक दवा थी..ये बंद कर दो..वो बंद कर दो..तो जादूगर पाशा ने 'दूर से दर्शन' देकर ये एलान कर दिया कि आज से सब बंद..हालांकि इस बार फैसला सही था लेकिन बस दिक्कत ये थी कि फैसले लेने से पहले जादूगर पाशा होम वर्क नहीं करता था..फैसला पहले और तैयारी बाद में करता..उसे लगता था कि जादू की छड़ी घूमाउंगा और सब ठीक हो जाएगा.

लेकिन जैसा कि बिना तैयारी के लिए गए फैसलों के साथ होता है वैसा ही इस फैसले के साथ भी हुआ.. जनता में त्राहिमाम मच गया..ना कुछ खाने को..ना कुछ पीने को..भूखी-प्यासी जनता सड़कों पर उतर आई..अब तक जो मनसबदार रियासत संभाले हुवे थे उनके भी हाथ-पांव फूल गए..मनसबदार दौड़े-दौड़े राजा के पास आए..

एक मनसबदार ने कहा कि हुज़ूर हमने तो घरबंदी कर ही दी थी..लेकिन आपने जिस तरह इसका एलान किया उससे जनता में आश्वस्ति की बजाय भय का माहौल बन गया..

दूसरे मनसबदार ने कहा कि हुज़ूर कम से कम वक्त रहते हमें ही सूचित कर देते..घरबंदी की तैयारी आप नहीं कर सकते थे तो हम ही कर लेते

तीसरे मनसबदार ने कहा जहांपनाह कुछ साल पहले आपने पुराने सिक्के बंद कर नए सिक्के चलाए थे..आपने तब भी तैयारी नहीं की थी..हमें लगा कि आप उस ऐतिहासिक गलती से कुछ सीखे होंगे..लेकिन आपने फिर वैसी ही गलती दोहरा दी..सभी मनसबदारों के मन में कई सवाल थे लेकिन जादूगर पाशा के बारे में ये मशहूर था कि उसे सवाल नापसंद थे..सिर्फ आकाशवाणी करना पसंद था..इसलिए बांकी किसी मनसबदार ने सवाल नहीं पूछे

राज-काज की इन सब बातों से दूर सामान्य प्रजा छूत की बीमारी के खतरे के बावजूद खाने और छत की तलाश में एक-दूसरे के ऊपर गिरते-पड़ते पैदल और बैलगाड़ियों में भर-भरकर अपने घरों की तरफ पलायन कर रही थी

कुछ दिनों के बाद जादूगर पाशा को अपनी गलती का एहसास हुआ..उसने बिना तैयारी के लिए अपने फैसले के लिए माफी तो मांगी लेकिन साथ ही ये भी कह दिया कि ये सब प्रजा की भलाई के लिए किया..राज्य की प्रजा बड़ी भावुक थी..वो कभी राजा की माफी..कभी राजा के आंसुओं को देखकर पिघल जाती और राजा हर बार इसी फॉर्मूले का इस्तेमाल करता👇

कुछ इस तरह अपने गुनाहों को धो देता है

जब बहुत मुसीबत में फंसा हो तो रो देता है

नोट- इस कहानी के सभी पात्र और घटनाएं काल्पनिक हैं..किसी भी जीवित या मृत व्यक्ति से इसकी समानता संयोग मात्र है

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