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अम्मी की ईद का तोहफ़ा

 Shiv Kumar Mishra |  9 Jun 2020 7:52 AM GMT  |  दिल्ली

अम्मी की ईद का तोहफ़ा
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एक जोडा ईद की ख़रीदारी करने को हड़बड़ी में था। शोहर ने बीवी से कहा, "ज़ल्दी करो, मेरे पास टाईम नहीं है।" कह कर कमरे से बाहर निकल गया। तभी बाहर लॉन में बैठी *अम्मी* पर उसकी नज़र पड़ी।

कुछ सोचते हुए वापस कमरे में आया और अपनी बीवी से बोला, "रजिया , तुमने अम्मी से भी पूछा कि उनको ईद पर क्या चाहिए?

रजिया बोली, "नहीं पूछा। अब उनको इस उम्र में क्या चाहिए होगा यार, दो वक्त की रोटी और दो जोड़ी कपड़े……. इसमें पूछने वाली क्या बात है?

यह बात नहीं है रजिया …… अम्मी पहली बार ईद पर हमारे घर में रुकी हुई है। वरना तो हर बार गाँव में अकेली ही रहती हैं। तो… दिखावे के लिए ही पूछ लेती।

अरे इतना ही अम्मीजान पर प्यार उमड़ रहा है तो ख़ुद क्यों नहीं पूछ लेते? झल्लाकर चीखी थी रजिया …और कंधे पर हैंड बैग लटकाते हुए तेज़ी से बाहर निकल गयी।

आसिफ अम्मी के पास जाकर बोला, "अम्मीजान , हम लोग ईद की ख़रीदारी के लिए बाज़ार जा रहे हैं। आपको कुछ चाहिए तो..

अम्मी बीच में ही बोल पड़ी, "मुझे कुछ नहीं चाहिए बेटा।"

सोच लो अम्मीजान , अगर कुछ चाहिये तो बता दीजिए…..

आसिफ के बहुत ज़ोर देने पर अम्मी बोली, "ठीक है, तुम रुको, मैं लिख कर देती हूँ। तुम्हें और बहू को बहुत ख़रीदारी करनी है, कहीं भूल न जाओ।" कहकर आसिफ की अम्मी अपने कमरे में चली गईं। कुछ देर बाद बाहर आईं और लिस्ट आसिफ को थमा दी।……

आसिफ ड्राइविंग सीट पर बैठते हुए बोला, "देखा रजिया, अम्मी को भी कुछ चाहिए था, पर बोल नहीं रही थीं। मेरे ज़िद करने पर लिस्ट बना कर दी है। इंसान जब तक ज़िंदा रहता है, रोटी और कपड़े के अलावा भी बहुत कुछ चाहिये होता है।"

अच्छा बाबा ठीक है, पर पहले मैं अपनी ज़रूरत का सारा सामान लूँगी। बाद में आप अपनी अम्मी की लिस्ट देखते रहना। कहकर रजिया कार से बाहर निकल गयी।

पूरी ख़रीदारी करने के बाद रजिया बोली, "अब मैं बहुत थक गयी हूँ, मैं कार में A/C चालू करके बैठती हूँ, आप अपनी अम्मी का सामान देख लो।"

अरे रजिया,तुम भी रुको, फिर साथ चलते हैं, मुझे भी ज़ल्दी है।

देखता हूँ अम्मी ने इस ईद पर क्या मँगाया है? कहकर अम्मी की लिखी पर्ची ज़ेब से निकालता है।

बाप रे! इतनी लंबी लिस्ट, ….. पता नहीं क्या – क्या मँगाया होगा? ज़रूर अपने गाँव वाले छोटे बेटे के परिवार के लिए बहुत सारे सामान मँगाये होंगे। और बनो *अलादीन*, अब करो सारी तम्मन्नाए पूरी कहते हुए रजिया गुस्से से आसिफ की ओर देखने लगी।

पर ये क्या? आसिफ की आँखों में आँसू…….. और लिस्ट पकड़े हुए हाथ सूखे पत्ते की तरह हिल रहा था….. पूरा शरीर काँप रहा था।

रजिया बहुत घबरा गयी। क्या हुआ, ऐसा क्या माँग लिया है तुम्हारी अम्मी ने? कहकर आसिफ के हाथ से पर्ची झपट ली….

हैरान थी रजिया भी। इतनी बड़ी पर्ची में बस चंद शब्द ही लिखे थे…..

*पर्ची में लिखा था….*

"बेटा आसिफ मुझे ईद पर तो क्या किसी भी अवसर पर कुछ नहीं चाहिए। फिर भी तुम ज़िद कर रहे हो तो…… तुम्हारे शहर की किसी दुकान में अगर मिल जाए तो *फ़ुरसत के कुछ पल* मेरे लिए लेते आना…. ढलती हुई शाम हूँ अब मैं। आसिफ, मुझे गहराते अँधेरे से डर लगने लगा है, बहुत डर लगता है। पल – पल मेरी तरफ़ बढ़ रही मौत को देखकर…. जानती हूँ टाला नहीं जा सकता, हक है….. पर अकेलेपन से बहुत घबराहट होती है आसिफ ।…… तो जब तक तुम्हारे घर पर हूँ, कुछ पल बैठा कर मेरे पास, कुछ देर के लिए ही सही बाँट लिया कर मेरे बुढ़ापे का अकेलापन।…. बिना दिया जलाए ही रौशन हो जाएगी मेरी जिंदगी की शाम …. कितने साल हो गए बेटा तुझे छुआ नहीं। एक बार फिर से, आ मेरी गोद में सर रख और मैं ममता भरी हथेली से सहलाऊँ तेरे सर को। एक बार फिर से इतराए मेरा दिल मेरे अपनों को क़रीब, बहुत क़रीब पा कर….और मुस्कुरा कर मिलूँ मौत के गले। क्या पता अगली ईद तक रहूँ ना रहूँ…..

पर्ची की आख़िरी लाइन पढ़ते – पढ़ते रजिया फफक-फफक कर रो पड़ी…..

*ऐसी ही होती हैं माँ…..*

दोस्तो, अपने घर के उन बडे दिलवाले लोगों, जिनको आप बूढ़े और बुढ़िया की श्रेणी में रखते हैं, वे आपकी जिंदगी की रोशनाई हैं। उनकी देखभाल करें। यक़ीन मानिए, आपके भी बूढ़े होने के दिन नज़दीक ही हैं।…उसकी तैयारी आज से ही कर लें। इसमें कोई शक़ नहीं, आपके अच्छे-बुरे काम देर-सवेर आप ही के पास लौट कर आने हैं।।

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