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अरूण जेटली की जयंती पर पटना में प्रतिमा का हुआ अनावरण, नीतीश के साथ डिप्टी सीएम मौजूद, जेटली तिहाड़ जेल में क्यों गये थे ?

 Sujeet Kumar Gupta |  28 Dec 2019 6:33 AM GMT  |  नई दिल्ली

अरूण जेटली की जयंती पर पटना में प्रतिमा का हुआ अनावरण, नीतीश के साथ डिप्टी सीएम मौजूद, जेटली तिहाड़ जेल में क्यों गये थे ?

नई दिल्ली। पूर्व वित्तमंत्री और भाजपा के दिग्गज नेता अरुण जेटली की आज (शनिवार) 67वीं जयंती है। इस वर्ष 24 अगस्त को जेटली इस दुनिया को अलविदा कह गए। अरुण जेटली को भाजपा का संकटमोचक कहा जाता था। अरुण जेटली ने कभी चुनाव नहीं जीता, फिर भी उनकी शख्सियत ऐसी थी कि एनडीए की सभी सरकारों में उनका कद काफी बड़ा था। बिहार सरकार ने राजकीय समारोह के तौर पर इसे मनाने का फैसला किया है. इस अवसर पर अरूण की प्रतिमा का अनावरण भी किया है।

शनिवार को राजकीय समारोह के रूप में पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली की जयंती मनाई गई. इस अवसर पर सीएम नीतीश कुमार कंकड़बाग पार्क में लगी अरुण जेटली की प्रतिमा का अनावरण किया. जयंती समारोह में डिप्टी सीएम सुशील मोदी बीजेपी के कई नेताओं के साथ अरुण जेटली के परिजन भी रहे मौजूद रहे।



शुरुआती जीवन

अरुण जेटली का जन्म 28 दिसंबर 1952 को हुआ था। उनके पिता महाराज किशन जेटली पेशे से वकील थे। उनकी मां रतन प्रभा एक समाज सेविका थी। अरुण ने अपनी स्कूली शिक्षा सेंट जेवियर्स स्कूल दिल्ली से की। अरुण जेटली पढ़ने में काफू होशियार थे। उन्होंने श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स से इकोनॉमिक्स में ग्रेजुएशन किया। वहीं दिल्ली यूनिवर्सिटी से लॉ की डिग्री ली।

राजनीतिक यात्रा की शुरुआत

अरुण जेटली की राजनीतिक यात्रा 1974 में शुरू हुई। वे पहली बार कॉलेज में छात्र संघ का चुनाव जीते। जेटली ने एबीवीपी के बैनर तले चुनाव लड़ा था। उन्होंने अपने कॉलेज में एनएसयूआई का वर्चस्व खत्म किया था। जेटली छात्र जीवन में नेता जयप्रकाश नारायण से खासे प्रभावित रहे।

आपातकाल में बीजेपी नेताओं से मिले

आपातकाल के दौरान अरुण जेटली 19 महीने तक तिहाड़ जेल में रहे। इस दौरान उनकी मुलाकात कई भाजपा नेताओं से हुई। जेल से बाहर आने के बाद जेटली जनसंघ में शामिल हो गए। वे एबीवीपी के दिल्ली अध्यक्ष और एबीवीपी के अखिल भारतीय सचिव बने। साल 1991 में बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य बने। 1999 में पार्टी के प्रवक्ता व सूचना और प्रासरण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) के पद पर आसीन हुए।

केंद्रीय कैबिनेट मंत्री बने

साल 2000 में राम जेठमलानी के इस्तीफे के बाद जेटली ने कानून, न्याय और कंपनी मामलों के मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार संभाला। मार्च 2001 से सितंबर 2001 तक उन्होंने जहाजरानी मंत्रालय का अतिरिक्त कार्यभार संभाला। वर्ष 2003 में केंद्रीय मंत्रिमंडल में वाणिज्य और उद्योग और कानून व न्याय मंत्री के रूप में नियुक्त हुए। साल 2004 से 2018 तक कई पद पर रहें।

मोदी लहर में हारे

हमेशा सरकार में मजबूत पद पर रहे अरुण जेटली ने सिर्फ एक बार 2014 में लोकसभा चुनाव लड़ा था। मोदी लहर में कई प्रत्याशी जीते। वहीं जेटली अमृतसर लोकसभा सीट से कांग्रेस उम्मीदवार अमरिंदर सिंह से हार गए। हार के बावजूद उनका कद घटने की बजाय बढ़ा। मोदी सरकार के कार्यकाल में उन्होंने वित्तमंत्री और रक्षामंत्री का पद संभाला।

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