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कोरोना के चलते दवाइयों की मांग, दवा कंपनियों का निकला दिवाला
कोरोना काल में कुछ दवाइयों की मांग भले ही पूरी दुनिया में बढ़ गई हो लेकिन घरेलू फार्मा रिटेल मार्केट को बड़ा नुकसान उठाना पड़ा है। मार्केट की ग्रोथ अप्रैल में 12 फीसदी तक कम हो गई। जुलाई 2017 में जीएसटी लागू होने के बाद यह पहली (YoY) कमी है। लॉकडाउन की वजह से फॉर्मेास्युटिकल कंपनियों को मैन्युफैक्चरिंग से लेकर सप्लाइ तक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
पिछले साल के मुकाबले इस अप्रैल में अक्यूट थेरपी में इस्तेमाल होने वाली दवाइयों की मांग 21 फीसदी कम हो गई। ऐंटी इन्फेक्टिव्स, दर्द, गैस्ट्रो और विटामिन की दवाओं की बिक्री ज्यादा मात्रा में होती थी। एक जानकार ने बताया कि इन दवाओं की मांग में 40 फीसदी तक कमी आ गई है। ऐंटी इन्फेक्टिव की मांग में 31 प्रतिशत, दर्द की दवाओं में 22 प्रतिशत और गैस्ट्रो मेडिसिन में 16 फीसदी की गिरावट आई।
क्रोनिक डिजीज में इस्तेमाल होने वाली दवाओं की मांग में ज्यादा गिरावट नहीं आई है। दिल और शुगर के मरीजों के काम आने वाली दवाओं की मांग में 5 फीसदी तक की ही गिरावट आई है। फार्मा सेक्टर को उम्मीद है कि वित्त वर्ष 21 में 1 से 5 प्रतिशत की ग्रोथ होगी। फार्मा मार्केट की वैल्यू लगभग 1.49 लाख करोड़ है।
मार्च से ही फार्मा सेक्टर में ग्रोथ रुक गई थी। मार्च में ग्रोथ 7 फीसदी थी जो कि पिछले साल के मुकाबले 1.6 फीसदी कम थी। कैडिला हेल्थ,सिपला और डॉ. रेड्डीज जो कि अक्यूट थेरपी की दवाइयों के बड़े निर्माता हैं, मार्च महीने में निगेटिव ग्रोथ में जाते दिखे। हालांकि Ipca और टॉरेंट फार्मा में ग्रोथ देखी गई। कोविड के मरीजों पर इस्तेमाल की जाने वाली हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन की मांग में 19 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज हुई।