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ऑनलाइन शॉपिंग करने वालों को बड़ा झटका, अब नहीं मिलेगा कैशबैक और बंपर डिस्काउंट!

सरकार ने ई-कॉमर्स सेक्टर के लिए प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की नीति बदल दी है, जिससे ऐमजॉन और फ्लिपकार्ट जैसी कंपनियों को जहां बड़ा झटका लगा है?

 Special Coverage News |  27 Dec 2018 7:23 AM GMT  |  दिल्ली

ऑनलाइन शॉपिंग करने वालों को बड़ा झटका, अब नहीं मिलेगा कैशबैक और बंपर डिस्काउंट!
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नई दिल्ली : देश में ऑनलाइन शॉपिंग का कारोबार बदलने जा रहा है। सरकार ने ई-कॉमर्स कंपनियों पर जो नए नियम लागू किए हैं उसके बाद एक्सक्लूसिव डील, कैशबैक और बंपर डिस्काउंट जैसी चीजें खत्म हो जाएंगी। सरकार ने ई-कॉमर्स सेक्टर के लिए प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की नीति बदल दी है, जिससे ऐमजॉन और फ्लिपकार्ट जैसी कंपनियों को जहां बड़ा झटका लगा है तो घरेलू कारोबारियों का गुस्सा शांत करने की कोशिश की गई है, जो इन कंपनियों के काम करने के तरीके से नाराज हैं।

पॉलिसी में एक नया नियम जोड़ा गया है, जिसके मुताबिक ई-कॉमर्स प्लैटफॉर्म से जुड़ी कोई भी इकाई सामान की बिक्री नहीं कर सकती। इसके साथ किसी ई-कॉमर्स साइट पर कोई एक वेंडर कितना सामान बेच सकता है, इसकी भी सीमा तय की गई है।

कैशबैक-एक्सक्लूसिव सेल पर रोक

इससे ई-कॉमर्स सेक्टर की कंपनियों को अपने बिजनस मॉडल में बदलाव करना पड़ेगा। सरकार के नए रूल्स के मुताबिक, कोई ई-कॉमर्स प्लैटफॉर्म किसी सप्लायर को खास रियायत नहीं दे सकता है। इस संशोधन के बाद कैशबैक, एक्सक्लूसिव सेल या किसी पोर्टल पर एक ब्रैंड के लॉन्च, ऐमजॉन प्राइम और फ्लिपकार्ट एश्योर्ड जैसी डील्स या किसी तरह की खास सेवा देने में दिक्कत हो सकती है। नए रूल्स का मकसद इन प्लैटफॉर्म्स को किसी भी तरह के पक्षपात से मुक्त करना है।

क्लाउडटेल को ऐमजॉन और डब्ल्यूएस रिटेल को फ्लिपकार्ट से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन नए नियमों की वजह से वे संबंधित प्लैटफॉर्म्स पर सामान नहीं बेच पाएंगी। फ्लिपकार्ट की नई मालिक वॉलमार्ट खुद इस ई-कॉमर्स प्लैटफॉर्म पर सामान नहीं बेच पाएगी।

इसका मतलब यह भी है कि अब ग्राहकों को पहले की तरह ई-कॉमर्स साइट्स पर बड़ा डिस्काउंट नहीं मिलेगा। इससे फिजिकल स्टोर्स को फायदा हो सकता है, जिनके बिजनस में ई-कॉमर्स कंपनियों ने बड़ी सेंध लगाई है। व्यापारी समुदाय लगातार यह शिकायत कर रहा था कि ई-कॉमर्स कंपनियां अपने प्लैटफॉर्म पर सामान की बिक्री करके मार्केट को प्रभावित कर रही हैं। उनके मुताबिक, यह प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के नियमों के खिलाफ भी था, जिसमें बिजनस-टु-कंज्यूमर ई-कॉमर्स में ऐसे निवेश पर रोक है।

1 फरवरी 2019 से नए नियम

हालांकि, बिजनस-टु-बिजनस ई-कॉमर्स में सरकार ने 100 पर्सेंट एफडीआई की इजाजत दी है। ई-कॉमर्स नीति में बदलाव की जानकारी डिपार्टमेंट ऑफ इंडस्ट्रियल पॉलिसी ऐंड प्रमोशन (डीआईपीपी) ने एक प्रेसनोट में दी है। उसने बताया कि नए नियम 1 फरवरी 2019 से लागू होंगे। सरकार एक अलग ई-कॉमर्स पॉलिसी पर भी काम कर रही है, जिसके लिए मंत्रालयों के बीच विमर्श शुरू हो चुका है।

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