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महंगा हुआ रसोई गैस सिलिंडर, इस बार दहाई में नही सौकड़ा में बढ़ा है दाम

LPG cylinder becomes expensive

महंगा हुआ रसोई गैस सिलिंडर, इस बार दहाई में नही सौकड़ा में बढ़ा है दाम
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महंगाई की मार झेल रही जनता को आज यानि बुधवार को जनता को एक और बड़ा झटका लगा है। आज गैर सब्सिडी वाले घरेलू गैस सिलिंडर के दाम में भारी वृद्धि हुई है। इंडियन ऑयल की वेबसाइट के अनुसार, दिल्ली में 14.2 किलो वाला सिलिंडर 144.50 रुपये महंगा हो गया है। इसका दाम अब बढ़कर 858.50 रुपये हो गया। वहीं कोलकाता में यह 149 रुपये बढ़कर 896.00 रुपये हो गया। मुंबई में इसका दाम 145 रुपये बढ़कर 829.50 रुपये हो गया। वहीं चेन्नई में यह 147 रुपये बढ़कर 881 रुपये का हो गया है। बता दें कि इस साल एक जनवरी के बाद गैस सिलिंडर के दाम नहीं बढ़े थे।

नए साल में एक जनवरी 2020 को लगातार चौथे महीने रसोई गैस सिलिंडर की कीमत में बढ़ोतरी हुई थी। तब देश के प्रमुख महानगरों में बिना-सब्सिडी वाला गैस सिलिंडर करीब 19.00 रुपये महंगा हुआ था। इससे पहले ग्राहक दिल्ली में 14.2 किलो के बिना सब्सिडी वाले सिलिंडर के लिए 714.00 रुपये चुका रहे थे। कोलकाता में इसका दाम 747 रुपये था। वहीं मुंबई और चेन्नई में 14.2 किलो के बिना सब्सिडी वाले सिलिंडर का दाम क्रमश: 684.50 और 734.00 रुपये था।

वहीं एक फरवरी को 19 किलो वाले सिलिंडर के दाम में बदलाव हुआ था। दिल्ली में इसका दाम 1,466 रुपये है, कोलकाता में 1,540 रुपये, मुंबई में 1,416 रुपये और चेन्नई में 1,589.50 रुपये।

वर्तमान में सरकार एक वर्ष में प्रत्येक घर के लिए 14.2 किलोग्राम के 12 सिलेंडरों पर सब्सिडी देती है। अगर इससे अधिक सिलेंडर चाहिए तो बाजार मूल्य पर खरीदारी करनी होती है। हालांकि सरकार हर साल 12 सिलेंडरों पर जो सब्सिडी देती है, उसकी कीमत भी महीने-दर-महीने बदलती रहती है। औसत अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क और विदेशी विनिमय दरों में बदलाव जैसे कारक सब्सिडी की राशि निर्धारित करते हैं।

औसत अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क दर और विदेशी मुद्रा के एक्सचेंज रेट के हिसाब से एलपीजी सिलेंडर के दाम तय होते हैं. इसी वजह से LPG सिलेंडर की सब्सिडी की रकम में भी हर महीने बदलाव होता है. जब अंतर्राष्ट्रीय बाजार में भाव बढ़ते हैं तो सरकार अधिक सब्सिडी देती है और जब दरें नीचे आती हैं तो सब्सिडी में कटौती की जाती है. टैक्स नियमों के अनुसार रसोई गैस पर माल एवं सेवाकर (जीएसटी) की गणना ईंधन के बाजार मूल्य पर ही तय की जाती है.

Sujeet Kumar Gupta
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