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डीजल पर सरकार ने क्यों बढाया 794% प्रतिशत टैक्स, और पेट्रोल पर इतना टैक्स ले रही है सरकार

ड्यूटी बढ़ाने से सरकार को इस फाइनेंशियल ईयर में 1.6 लाख करोड़ रुपए का एक्स्ट्रा रेवेन्यू मिलेगा।

 Shiv Kumar Mishra |  24 Jun 2020 3:12 PM GMT  |  दिल्ली

डीजल पर सरकार ने क्यों बढाया 794% प्रतिशत टैक्स, और पेट्रोल पर इतना टैक्स ले रही है सरकार
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नई दिल्ली. एक बैरल में 159 लिटर डीजल आता है। यदि डीजल 43 डॉलर प्रति बैरल है तो 3225 रूपये का होता है। तो एक लिटर कच्चे तेल की कीमत लगभग 20 . 28 पैसे के लगभग बनती है। अगर इसमें प्रोसेसिंग फ़ीस की बात करें तो ५ ३० पैसे के लगभग आती है तो ये कीमत 25 .58 होती है और इसमें अगर एक्साइज ड्यूटी भी जोड़ दें तो ३ 56पैसे है और पेट्रोल पर 9.48 रुपए है। इसलिए डीजल पेट्रोल के रेट में अंतर होता है। लेकिन अब इसके बाद इस पर बाकी का बदलाब होने पर डीजल में एक्साइज ड्यूटी 31.83 रुपए 794% और पेट्रोल पर 32.98 रुपए 248% है। तो डीजल पेट्रोल की कीमतों में लगी आग से अब किसान की मक्का बाजार ग्वार की फसल सूखना तय माना जाएगी. इधर आम नागरिक भी इस महंगाई से परेशान है।

देश की राजधानी में डीजल पहली बार पेट्रोल से महंगा हो गया है। तेल कंपनियों ने बुधवार को लगातार 18वें दिन डीजल महंगा किया। 48 पैसे महंगा होने के साथ ही दिल्ली में अब डीजल 79.88 रुपए प्रति लीटर के रेट पर मिल रहा है। पेट्रोल के रेट नहीं बदले हैं। वह 79.76 रुपए पर है। अप्रैल 2014 में एक लीटर डीजल पर करीब 10 रुपए एक्साइज ड्यूटी और वैट के चुकाने होते थे। अब आम आदमी को डीजल पर 50 रुपए सिर्फ टैक्स के चुकाने पड़ रहे हैं।

6 साल में क्रूड घटा, एक्साइज ड्यूटी बढ़ी और आम आदमी ज्यादा टैक्स चुकाता रहा

पेट्रोल और डीजल पर केंद्र सरकार सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी लगाती है और राज्य सरकारें वैल्यू एडेड टैक्स यानी वैट वसूलती हैं। अप्रैल 2014 में जब क्रूड ऑयल 105 डॉलर प्रति बैरल के आसपास था, तब दिल्ली में डीजल करीब 55 रुपए प्रति लीटर बिकता था। इसमें बेस प्राइस, किराया भाड़ा और डीलर कमीशन 45.5 रुपया था। इसके ऊपर 10 रुपए सरकार टैक्स के तौर पर वसूलती थी। यानी एक लीटर डीजल के लिए आप जितना पैसा देते थे, उसका 18% हिस्सा सरकार टैक्स वसूल लेती थी।

अब आज की बात करते हैं। अभी क्रूड ऑयल 42 डॉलर प्रति बैरल पर है। 16 जून के प्राइस ब्रेकअप के मुताबिक, डीजल 75 रुपए पर है। इसमें बेस प्राइस, किराया भाड़ा और डीलर कमीशन 25.76 रुपया है। इसके ऊपर 50 रुपए सरकार टैक्स के तौर पर वसूल रही है। यानी एक लीटर डीजल के लिए आप जितना पैसा दे रहे हैं, उसका 66% हिस्सा सरकार टैक्स वसूल ले रही है।

मार्च और मई में सरकार ने दो बार एक्साइज ड्यूटी बढ़ाई

14 मार्च को केंद्र सरकार ने पेट्रोल-डीजल पर सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी 3 रुपए प्रति लीटर बढ़ा दी थी। फिर 5 मई को इसमें अचानक पेट्रोल पर 10 रुपए और डीजल पर 13 रुपए प्रति लीटर का इजाफा कर दिया। पेट्रोल पर अब 32.98 और डीजल पर 31.83 रुपए प्रति लीटर एक्साइज ड्यूटी लगती है। ड्यूटी बढ़ाने से सरकार को इस फाइनेंशियल ईयर में 1.6 लाख करोड़ रुपए का एक्स्ट्रा रेवेन्यू मिलेगा।

दिल्ली ने वैट तकरीबन दोगुना किया

केंद्र ने एक्साइज ड्यूटी बढ़ाई। इसी के साथ केजरीवाल सरकार ने मई में यह फैसला कर लिया कि वह पेट्रोल-डीजल पर वैट बढ़ाएगी। पेट्रोल पर तो वैट 27% से बढ़कर 30% ही किया गया, लेकिन डीजल पर यह 16.75% से करीब-करीब दोगुना बढ़ाकर 30% कर दिया गया। इससे पेट्रोल तो 1.6 रुपए महंगा हुआ, लेकिन डीजल एकदम से 7 रुपए महंगा हो गया।

कंपनियां भी पीछे नहीं; 82 दिन रुकी रहीं, फिर 18 दिन से लगातार रेट बढ़ा रहीं

जब दिल्ली सरकार ने वैट बढ़ाने का फैसला किया, तब लॉकडाउन चल रहा था। उधर, तेल कंपनियां जून 2017 से पेट्रोल-डीजल के रेट का डेली रिविजन करती हैं, लेकिन लॉकडाउन के दौरान कंपनियों ने 82 दिन तक रेट नहीं बढ़ाए। जून में अनलॉक शुरू हुआ तो कंपनियों ने 7 जून से पेट्रोल-डीजल के रेट रोजाना रिवाइज करना शुरू कर दिए। पिछले 18 दिनों में दिल्ली में पेट्रोल 8.50 रुपए और डीजल 10.88 रुपए महंगा हो चुका है।

8 साल पहले डीजल 30 रुपए सस्ता था

दिल्ली में 8 साल पहले यानी जून 2012 में पेट्रोल 71 और डीजल 41 रुपए/लीटर था। यानी पेट्रोल के मुकाबले डीजल 30 रुपए सस्ता हुआ करता था। वहीं, मुंबई में जून 2012 में यह फर्क 32 रुपए का था। तब वहां पेट्रोल 76 रुपए और डीजल 45 रुपए प्रति लीटर था।

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