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महमूद गजनवी सोमनाथ फतह के साथ ही इस्‍लामी जगत का प्रतिष्ठित सुल्‍तान कैसे बना?

 शिव कुमार मिश्र |  2018-01-04 12:40:05.0  |  दिल्ली

महमूद गजनवी सोमनाथ फतह के साथ ही इस्‍लामी जगत का प्रतिष्ठित सुल्‍तान कैसे बना?

शम्भु दयाल बाजपेयी

महमूद गजनवी सोमनाथ फतह के साथ ही इस्‍लामी जगत का सर्व प्रतिष्ठित सुल्‍तान बन गया। वह दो शताब्दियों , मुहम्‍मद गोरी के दिल्‍ली का सुल्‍तान बनने, तक इस्‍लाम का महा नायक माना जाता रहा और सोमनाथ ध्‍वंस के उसके नाम पर तरह तरह की किंवदंतियां चलती रहीं। उसके पहले 16 हमलों में भारत को लूट कर दुनिया का सबसे सम्‍पन्‍न सुलतान वह पहले ही बन चुका था। अपने करीब 33 साल के शासन में वह हमले और युद्ध ही करता रहा , मुसलमान शासित राज्‍यों के खिलाफ भी।


इसके पहले के हमलों में वह काबुल, अजमेर,कन्‍नौज, मथुरा, कांगरा, थानेश्‍वर, कश्‍मीर, ग्‍वालियर, मालवा,बुंदेलखंड, बंगाल और पंजाब वगैरह को रौंद चुका था। दूसरी चढाई में पेशावर की विजय और लूट में उसे लगभग ढाई लाख दीनार कीमत की सम्‍पत्ति और पचास हाथी मिले थे। पराजय से क्षुब्‍ध राजपूत राजा जय पाल अग्नि कुंड में कूद कर जल मरा था। अगली लडाई में भेडा के राजा विजय पाल ने भी हारने का अपमान न सह पाने से आत्‍म हत्‍या कर ली थी।
1006 में महमूद ने अरब शासित मुल्तान राज्‍य को अपने कब्‍जे में किया। मथुरा हमले के दौरान उसने करीब एक हजार मंदिर तोडे और जम कर लूटपाट की। भटिंडा का राजा सुख पाल भी नहीं बचा। राजा अानंद पाल ने उज्‍जैन, ग्‍वालियर, कालिंजर, अजमेर आदि रजवाडों का एक संगठन बना कर महमूद का मुकाबला किया , लेकिन नियति को कुछ और मंजूर था। युद्ध के दौरान आनंदपाल का हाथी बिगड कर भागने लगा , अफवाह फैली कि राजा मैदान से भाग रहा है और राजपूताी सेना में भगदड मच गयी। दो दिन महमूद ने जम कर लूटपाट और हत्‍याओं का तांडव किया। इस युद्ध में महिलाओं ने अपने गहने बेच कर राजाओं की मदद की थी। महमूद को पहले की लडाईयों के मुकाबले आठ गुना ज्‍यादा सम्‍पत्ति मिली। नागरकोट - कांगडा के हमले में भी उसे बहुत धन मिला। भारतीय राजाओं और बनियों के लूट के धन से वह सबसे धनी शासक तो बना ही, उस धन से उसने अपनी सेना मजबूत की और अपनी राजधानी गजनी का भी काया पलट किया।
महमूद ने भारत में अपने राज्‍य विस्‍तार का प्रयास नहीं किया। वह धावा बोलता, जीतता, जम कर लूटता, मंदिर - मूर्तियां तोडता, नर संहार करता,ब्राह्मणों, राजपूतों और ब्‍यापारियों को कैद करता , रिहा करने के बदले उनसे मोटी फिरौतियां लेता और न दे पाने वाले को बांध कर ले जाता। तमाम आदमी - औरतें गुलाम भी बना लिये जाते। जिन्‍हें विजित क्षेत्रों का स्‍थानीय शासक घोषित करता उनसे भी मोटी रकम लेता।
ऐसा लगता है महमूद धन का ही प्रेमी था और मंदिरों को तोड कर दुनिया का सब से बडा विजेता बनने की अपनी अहं पूर्ति करता था। वह बहुत बहादुर और कुशल सेना पति था। हर चढाई से पहले पूरी रणनीति बनाता, जहां हमला करता वहां के कुछ प्रभावशाली को चुपचाप अपने खेमे में मिला अपने जासूस पहले से भेज देता जिसमें बडे पीर - फकीर भी होते। वह विजित क्षेत्रों में प्रजा से अच्‍छा ब्‍यवहार करता और हिंदुओं को अपनी सेना की सेवा में भी रखता। उसके हमलों से राजपूतों के युद्ध कौशल की कमी और अापसी फूट उजागर हुई। बडी संख्‍या में लोगों और सेनिकों के मारे जाने रानीतिक स्थिरता और आर्थिक प्रगति कमजोर हुई। उसने हजारों मंदिर तोडे , ज्‍वाला मुखी , द्वारका, माहेश्‍वर आदि के मंदिरों को मिट्टी में मिला दिया, मथुरा को उजाड कर दिया। इससे आस्‍ितक भारतीय जनमानस में भारी निराशा फैलने लगी। लोग राज्‍य, धन आदि की क्षति सह सकते थे, पर मंदिरों का ध्‍वंस नहीं।

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