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ब्राह्मणवाद को गाली देनेवाले ब्राह्मण ही असल में शुद्ध ब्राह्मणवादी हैं

सत्ता सुख लेने का उनका अपना फार्मूला था ये। निश्चित ही कम्युनिस्ट ब्राह्मण और कांग्रेसी ब्राह्मण इसकी अगुवाई कर रहे थे।

ब्राह्मणवाद को गाली देनेवाले ब्राह्मण ही असल में शुद्ध ब्राह्मणवादी हैं
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संजय तिवारी

सत्ता में बने रहने के लिए ब्राह्मणवादियों ने एक फार्मूला निकाला था। ब्राह्मणवाद को गाली दो, दलित पिछड़े का समर्थन लो और सत्ता में बैठे रहो। हिन्दुओं को गाली दो, मुसलमानों का समर्थन लो और सत्ता में बैठे रहो।

ब्राह्मणवाद को गाली देनेवाले ब्राह्मण ही असल में शुद्ध ब्राह्मणवादी हैं। सत्ता सुख लेने का उनका अपना फार्मूला था ये। निश्चित ही कम्युनिस्ट ब्राह्मण और कांग्रेसी ब्राह्मण इसकी अगुवाई कर रहे थे।

लेकिन जब आप ने ब्राह्मण को ही वाद बना दिया तो फिर कितने दिन अपनी धूर्तता छिपाकर रख पायेंगे? आप जिसके लीडर होने का प्रयास कर रहे हैं आज नहीं तो कल उसे होश आयेगा कि साला ये पण्डितवा इतना मुस्लिम हितैषी क्यों बन रहा है? इसका क्या स्वार्थ है?

और जिस दिन उस होश आया, उसने अपना लीडर बनाया और आपको झटके में उठाकर फेंक दिया। क्या दलित राजनीति और क्या मुस्लिम राजनीति। ये लोग दूसरी जातियों या धर्मों के लोगों पर तभी तक विश्वास करते हैं जब तक उनके बीच से कोई निकलकर बाहर नहीं आ जाता। मुसलमान सिर्फ ये देखता है कि वो मुसलमान है या नहीं। इन ब्राह्मणवादी पाखंडियों को लगता है कि हम दिन रात जो हिन्दुओं को गाली दे रहे हैं इससे मुसलमान खुश हो रहा है। नहीं। वो खुश नहीं होता। तुम्हारी मूर्खता के मजे लेता है। तुम्हें अपने एजंडे पर नचाता है। और जैसे ही उसका अपना लीडर तैयार होता है, एक झटके में छोड़कर भाग जाता है।

इस ब्राह्मणवादी राजनीति के कुछ आखिरी किले बच गये हैं उसमें एक किला ममता बनर्जी का भी है। कम्युनिस्ट खत्म हो चुके हैं। कांग्रेस खत्म होने जैसी ही है। ममता बनर्जी अपनी ही राजनीति के चक्रव्यूह में फंसी हुई है। देखना ये है कि ये अंतिम द्वार भेद पाती हैं या नहीं।

Shiv Kumar Mishra
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