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जो भी आया है, उसकी मृत्यु सुनिश्चित है- योगी आदित्यनाथ

Whatever has come, his death is sure - Yogi Adityanath

 शिव कुमार मिश्र |  2017-08-13 09:30:10.0

जो भी आया है, उसकी मृत्यु सुनिश्चित है- योगी आदित्यनाथ

भक्तो । मृत्यु का समय तथा स्थान हर जीव के लिए निश्चित होता है। जीव कहीं पर भी क्यों न रहता हो, अपनी मृत्यु के निश्चित स्थान पर और निर्धारित समय पर पहुँच ही जाता है। हम देखते हैं कि रेल, बस, वायुयान आदि दुर्घटनाएँ भी यदा कदा होती रहती हैं, जहाँ अलग-अलग स्थानों पर रहने वाले अनेक लोगों की एकसाथ, एक समय पर मृत्यु हो जाती है।


इसी प्रकार युद्ध की स्थिति होने पर भी बहुत से लोग अपने जीवन से हाथ धो बैठते हैं। भूकम्प, बाढ़, सुनामी, महामारी आदि प्राकृतिक आपदाओं के कारण भी अचानक एकसाथ बहुत से लोग काल के गाल मे समा जाते हैं। कभी-कभी धार्मिक आयोजनों, मेलों या सभाओं में भगदड़ मच जाने पर भी दूर-दराज के इलाकों से आए बहुत से लोग काल कवलित हो जाते हैं। कभी-कभार आतंकी हमले भी इस दायित्व को बखूबी निभाते हैं।


इन सभी उदाहरणों से यही सिद्ध होता है कि जिस स्थान की मिट्टी जीव ने लेनी है अर्थात जो स्थान जीव की मृत्यु के लिए ईश्वर द्वारा निर्धारित किया गया है, वहाँ पर जीव किसी भी बहाने से पहुँच जाता है। वह स्थान चाहे वहाँ से सैंकड़ों-हजारों किलोमीटर दूर ही क्यों न हो।

भक्तो। जो भी व्यक्ति इस धरती पर आता है, उसकी मौत होना सुनिश्चित है। हम मौत के बहाने ढूंढते है कि अमुक व्यक्ति को समय पर इलाज मिल जाता तो वह बच जाता। अथवा फलाँ व्यक्ति बस में सवार ही नही होता तो दुर्घटना में उसकी मृत्यु होती ही नही। ये सब बहाने मात्र है । जैसा कि मैंने पहले कहाकि ईश्वर ने हर जीव की मृत्यु और स्थान पहले से ही निश्चित कर रखा है। मृत्यु अपने आप निर्धारित समय पर उसे खेंच ले जाती है। जिस तरह ट्रेन या अन्य कोई वाहन में व्यक्ति सवार होते है। उसे उतरना ही होता है। कोई गन्तव्य तक पहुँचता है तो कोई गन्तव्य से पहले उतर जाता है । यही हाल मौत का है। कोई व्यक्ति सौ साल जीता है तो कोई जन्म लेने के साथ ही भगवान को प्यारा हो जाता है।

भक्तजनो। मैं सब आपको इसलिए कह रहा हूँ कि 65-70 बच्चों की मृत्यु के लिए आक्सीजन की कमी का बहाना लगाया जा रहा है। हकीकत यह है कि ईश्वर ने इन बालको की मौत की तारीख और समय पहले ही निश्चित कर रखा था । इसलिए इन बालको की मौत सुनिश्चित थी। अगर आक्सीजन के हजारों सिलेंडर होते तो भी बच्चों की मौत होकर ही रहती। क्योकि विधाता ने पहले ही यह सबकुछ लिख दिया था।

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पत्रकार महेश झालानी के अपने विचार

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