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आईएएस की नौकरी छोड़ बनने चले नेता, लेकिन हो गया धोखा और हार गये चुनाव

 Special Coverage News |  2018-12-12T21:35:08+05:30  |  रायपुर

आईएएस की नौकरी छोड़ बनने चले नेता, लेकिन हो गया धोखा और हार गये चुनाव

भारतीय प्रशासनिक सेवा आईएएस की नौकरी छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए रायपुर के पूर्व कलेक्टर ओम प्रकाश चौधरी (OP Chodhary) छत्तीसगढ़ की खरसिया सीट (Kharsia Vidhan Sabha Seat) से चुनाव हार गए हैं. बीजेपी उम्मीदवार ओपी चौधरी कांग्रेस उम्मीदवार उमेश पटेल से 16 हजार 967 मतों से हार गए हैं. उमेश पटेल को 94201 वोट तो वहीं, ओपी चौधरी को 77234 मत मिले.




बता दें कि रायपुर के पूर्व कलेक्टर ओमप्रकाश चौधरी ने बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह की मौजूदगी में 'कमल' का दामन थामा था. बीजेपी की सदस्यता ग्रहण करने वाले 2005 बैच के इस आईएएस अधिकारी ने 25 अगस्त को अपने पद से इस्तीफा दे दिया था. छत्तीसगढ़ बीजेपी ने विधानसभा चुनाव के पहले कांग्रेस के गढ़ में सेंधमारी के लिए बड़ा दांव खेला था. चौधरी दरअसल अघरिया समुदाय से आते हैं, जिसका छत्तीसगढ़ में अच्छा वर्चस्व है. खरसिया सीट से नंदकुमार पटेल के बेटे उमेश पटेल वर्तमान विधायक हैं. खरसिया सीट कांग्रेस का गढ़ मानी जाती है. चौधरी स्थानीय होने के साथ युवा आइकॉन के रूप में भी यहां लोकप्रिय हैं.




बता दें कि नौकरी छोड़ने से पहले ओपी चौधरी वर्तमान में रायपुर के कलेक्टर थे. इसके पहले वे दंतेवाड़ा में कलेक्टर रह चुके थे. पिछले चुनाव के समय वे जनसंपर्क विभाग में थे. इसके बाद से वे सीएम डॉ. रमन सिंह के करीबी और पसंदीदा अफसरों के रूप में गिने जाते रहे हैं. ओपी चौधरी अपने कामों की वजह से छत्तीसगढ़ में लोकप्रिय हैं. दंतेवाड़ा की एजुकेशन सिटी हो या रायपुर में गरीब बच्चों को स्कूलों में शिक्षा के अधिकार के तहत दाखिला दिलवाने की बात हो, उन्होंने इनका प्रतिनिधित्व किया. चौधरी को नक्सल प्रभावित इलाके में अपने बेहतरीन काम के लिए प्रधानमंत्री पुरस्कार से भी नवाज़ा जा चुका है.



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