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जानिए धार्मिक मान्यताओं के आधार पर रक्षाबंधन का महत्व

बहन अपने भाई की लंबी उम्र के लिए प्रार्थना करती है।

 Sujeet Kumar Gupta |  10 Aug 2019 7:42 AM GMT  |  नई दिल्ली

जानिए धार्मिक मान्यताओं के आधार पर रक्षाबंधन का महत्व

नई दिल्ली। रक्षाबंधन पर हर बहन भाई के कलाई पर राखी बांधकर लंबी उम्र की कामना करती हैं। यह भारत के सबसे लोकप्रिय त्योहारों में से एक है,और त्योहार का बहुत ऐतिहासिक महत्व है और हिंदू पौराणिक कथाओं के मुताबिक यह पर्व बहुत पहले से चला आ रहा है। जो इस साल रक्षाबंधन का त्योहार 15 अगस्त को मनाया जाएगा। जहां राखी बांधने का शुभ मुहूर्त सुबह पांच बजकर 49 मिनट से शुरू होगा और शाम छह बजकर एक मिनट तक बहनें भाई की कलाई में राखी बांध सकती है। इस दिन सुबह छह से 7.30 बजे और सुबह 10.30 बजे से अपराह्न तीन बजे तक राखी बांधने का सबसे अच्छा मुहूर्त रहेगा।

धार्मिक मान्यताओं के आधार पर देखा जाय तो देवताओं और दानवों के बीच एक युद्ध छिड़ गया था, ये युद्ध 12 वर्षों तक लगातार चला और इस युद्ध में दानवों की जीत हुई। दानवों ने देवताओं के राजा-इंद्र के सिंहासन पर कब्जा कर लिया। जब इंद्र युद्ध हार गए, तो उन्होंने अपने आध्यात्मिक गुरु बृहस्पति से सलाह ली, बृहस्पति ने इंद्र को सलाह दी कि वे कुछ मंत्रों का जाप करें जिससे उन्हें सुरक्षा मिले, पूर्णिमा के दिन श्रावण के महीने में मंत्रों के जाप का यह सिलसिला शुरू हुआ।

इस दौरान एक धागे को आशीर्वाद के साथ एक छोटे सी धातु के चारों ओर कसकर बांधा गया। जाप के बाद, सुरक्षा आशीर्वाद वाले इस छोटी धातु को भगवान इंद्र की पत्नी, शची, जिसे इंद्राणी के नाम से भी जाना जाता है, ने इंद्र की कलाई पर बांध दिया था. इन आशीषों के कारण, यह कहा गया कि इंद्र को अपनी शक्ति वापस मिली और उन्होंने दानवों को हराया। रक्षाबंधन के दिन भाई अपनी बहन की देखभाल करने और उसके सारे जीवन की रक्षा करने का वादा करता है, जबकि बहन अपने भाई की लंबी उम्र के लिए प्रार्थना करती है।


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