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- सावन के शुरुआत में ही...
हिंदू परंपरा में भोले शंकर का पवित्र महिना सावन माना गया है। जिसकी शुरुआत 17 जुलाई से प्रारंभ होकर 15 अगस्त को समाप्त होगा। सावन के महीने में भगवान शिव की विशेष पूजा की जाती है। इस महीने में शिवालयों में भक्तों का हुजूम उमड़ पड़ता है। सावन के महीने में कांवड़ लेकर जाने और शिवलिंग पर जल चढ़ाने की परंपरा होती है। कहा जाता है कि इस महीने में जो भक्त सच्चे मन से शिव जी और माता पार्वती की पूजा करने से इसी मनोकामना पूर्ण हो जाती है। शादीशुदा महिलाएं अपने वैवाहिक जीवन मे कोई अमंगल ना हो इसकेो लिए वो व्रत भी रखती हैं तो वहीं कुंवारी कन्या अच्छे वर के लिए शिव की पूजा अर्चना करती हैं।
शिवलिंग की पूजा करते समय कुछ विशेष ध्यान रखे। शिवलिंग को स्नान कराने के लिए तांबे का बर्तन, तांबे का लोटा, दूध, वस्त्र, चावल, अष्टगंध, दीपक, तेल, रुई, धूपबत्ती, चंदन, धतूरा, आंकड़े के फूल, बिल्वपत्र, जनेऊ, फल, मिठाई, नारियल, पंचामृत, सूखे मेवे, पान, दक्षिणा पूजा में अनिवार्य रूप से रखें। शिवलिंग की पूजा में पंचामृत जरूर रखना चाहिए। पंचामृत दूध, दही, घी, शहद और मिश्री मिलाकर बनाना चाहिए।
सावन शुरुआत में ही चंद्रग्रहण का योग बन रहा है। साथ ही इस दिन गुरु पूर्णिमा भी रहेगी। ज्योतिष गणना के अनुसार 16 जुलाई की रात को चंद्रग्रहण लगेगा फिर इसके अगले ही दिन से सावन शुरू हो जाएगा। इसके अलावा 17 जुलाई को सूर्य राशि बदलकर मिथुन से कर्क में प्रवेश करेंगे।