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क्या गाँधीनगर लोकसभा सीट से हुंकार भरेंगे लालकृष्ण आडवानी?

आपातकाल के बाद 1977 में यह सीट सामान्य हो गई और इंदिरा गांधी के विरोध में छोटे-छोटे दलों से मिलकर भारतीय लोक दल के उम्मीदवार ने यहां से जीत हासिल की. हालांकि, 1980 में कांग्रेस ने फिर वापसी की और 1984 में भी यहां परचम लहराया.

 Special Coverage News |  18 Feb 2019 9:04 AM GMT  |  गांधीनगर

क्या गाँधीनगर लोकसभा सीट से हुंकार भरेंगे लालकृष्ण आडवानी?

गांधीनगर लोकसभा सीट गुजरात की सबसे अहम और वीआईपी सीटों में से एक है. यह शहर न सिर्फ राज्य की राजधानी है, बल्कि भारतीय जनता पार्टी का गढ़ भी है. बीजेपी के संस्थापक सदस्यों में रहे वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी इस सीट से सांसद बनते रहे हैं और 2014 में भी उन्होंने यहां से जीत दर्ज की थी. सामान्य वर्ग वाली इस सीट पर बीजेपी तीन दशकों से लगातार जीत रही है. 91 साल के हो चुके आडवाणी क्या 2019 में फिर से चुनावी समर में उतरेंगे, इसे लेकर भी सवाल है.

राजनीतिक पृष्ठभूमि

इस सीट पर सबसे पहला चुनाव 1967 में हुआ, उस वक्त यह अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित थी. इस चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर एसएम सोलंकी ने बाजी मारी थी. इसके बाद 1971 में सोलंकी ने दूसरी बार चुनाव जीता. आपातकाल के बाद 1977 में यह सीट सामान्य हो गई और इंदिरा गांधी के विरोध में छोटे-छोटे दलों से मिलकर भारतीय लोक दल के उम्मीदवार ने यहां से जीत हासिल की. हालांकि, 1980 में कांग्रेस ने फिर वापसी की और 1984 में भी यहां परचम लहराया.

इसके बाद 1989 से इस सीट पर बीजेपी की जो पारी शुरू हुई, वो अभी तक नॉट आउट चल रही है. बीजेपी के टिकट पर पहला चुनाव शंकर वाघेला ने जीता था. लालकृष्ण आडवाणी ने 1991 में इस सीट से किस्मत आजमाई और बाजी मार ली. इसके बाद 1996 के उपचुनाव में हरीशचंद्र पटेल जीते. 1996 के आम चुनाव में पूर्व प्रधानमंत्री और स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी ने यहां से चुनाव लड़ा और वह जीत गए. वाजपेयी के बाद 1998, 1999, 2004, 2009 और 2014 में लगातार एलके आडवाणी ने इस सीट को अपने नाम किया.

सामाजिक ताना-बाना

गांधीनगर लोकसभा क्षेत्र की अधिकतर आबादी शहरी है. करीब 79 फीसदी लोग शहरों में बसते हैं, बाकी 21% ग्रामीण आबादी है. अनुसूचित जाति (SC) की आबादी 11.41% और अनुसूचित जनजाति (ST) की आबादी 1.96% है. कुल आबादी की बात की जाए तो 2011 की जनगणना के मुताबिक, इस लोकसभा क्षेत्र की आबादी 19,33,986 है. गांधीनगर जिले में मुसलमानों की जनसंख्या 4 फीसदी से ज्यादा है.

इस लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत गांधीनगर उत्तर, घाटलोडिया, साबरमती, कलोल, वेजलपुर, साणंद, नारणपुरा विधानसभा सीट आती हैं. 2017 के विधानसभा चुनाव में गांधीनगर उत्तर सीट से कांग्रेस, कलोल से कांग्रेस, साणंद से बीजेपी, घाटलोडिया से बीजेपी, वेजलपुर से बीजेपी, नारणपुरा से बीजेपी, साबरमती से बीजेपी ने जीत दर्ज की थी. यानी लालकृष्ण आडवाणी के लोकसभा क्षेत्र में बीजेपी को विधानसभा की पांच सीटों पर जीत मिली, जबकि दो पर कांग्रेस ने बाजी मारी.

2014 लोकसभा चुनाव जनादेश

लालकृष्ण आडवाणी, बीजेपी- 773,539 वोट (68.1%)

ईश्वरभाई पटेल, कांग्रेस- 290,418 (25.6%)

2014 चुनाव का वोटिंग पैटर्न

कुल मतदाता- 17,33,972

पुरुष मतदाता- 9,00,744

महिला मतदाता- 8,33,228

मतदान- 11,35,495 (65.5%)

सांसद का रिपोर्ट कार्ड

1927 में कराची में पैदा हुए लालकृष्ण आडवाणी बीजेपी के सबसे वरिष्ठ नेताओं में हैं. कानून की पढ़ाई करने वाले आडवाणी 1947 में आरएसएस से जुड़े और उस वक्त भारत का हिस्सा रहे कराची के सचिव बने. आजादी के बाद वह भारतीय जनसंघ का हिस्सा बने. 1970 में पहली बार वह राज्यसभा सांसद बने और 1973 से 1977 तक भारतीय जनसंघ के अध्यक्ष रहे. 1976 में आडवाणी दूसरी बार राज्यसभा सांसद बने और 1977-79 तक केंद्र में मंत्री रहे. 1982 में तीसरी बार राज्यसभा भेजे गए. इसके बाद 1986 से 1991 तक वह भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष रहे. 1988 में चौथी बार राज्यसभा सांसद बनने के बाद उन्होंने 1989 के आम लोकसभा चुनाव में हिस्सा लिया और पहली बार लोकसभा सांसद बने. अब तक कुल सात बार वह लोकसभा सांसद निर्वाचित हो चुके हैं और चार बार राज्यसभा सांसद रहे हैं.

लोकसभा में उपस्थिती की बात की जाए तो उनकी मौजूदगी 92% रही है. जबकि उन्होंने महज एक बार डिबेट में हिस्सा लिया है. सवालों के मामले में उनका प्रदर्शन बिल्कुल नगण्य रहा और उन्होंने अपने कार्यकाल में एक भी सवाल नहीं पूछा.

सांसद निधि से खर्च के मामले में उनका प्रदर्शन काफी अच्छा रहा है. उनकी निधि से 24.31 करोड़ रुपये खर्च हुए, इसमें से 20.82 करोड़ रुपये उन्होंने खर्च कर दिया. जबकि संपत्ति की बात की जाए तो एडीआर की रिपोर्ट के मुताबिक, उनकी कुल संपत्ति 7 करोड़ से ज्यादा है. इसमें 2 करोड़ की चल संपत्ति है, जबकि 5 करोड़ से ज्यादा की अचल संपत्ति है.

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