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गुजरात के राज ठाकरे बनने की चाहत में अल्पेश

 Majid Ali Khan |  2018-10-09 13:19:33.0  |  दिल्ली

गुजरात के राज ठाकरे बनने की चाहत में अल्पेश

माजिद अली खां (राजनीतिक संपादक)

गुजरात से उत्तर भारतीयों को मार पीटने कर भागने का सिलसिला जारी है. एक बच्ची के साथ बलात्कार होने के बाद गुजरात में उत्तर प्रदेश और बिहार के रहने वालो के खिलाफ गुस्सा फूट गया और गुजरात से यूपी और बिहारियों को भागने का काम शुरू किया गया. महाराष्ट्र की तर्ज़ पर ये काम जारी है जबकि गुजरात की भाजपा सरकार कह रही है की यहाँ कोई दिक्कत नहीं है लेकिन फिर भी लोगो के पलायन का सिसिला नहीं रुक रहा है. हम अगर गुजरात की बात करें तो देश के प्रधानमंत्री भी गुजरात से आते हैं और फिलहाल वह उत्तर प्रदेश की बनारस सीट से सांसद हैं. ऐसे में गुजरात में हिंदी भाषियों के साथ ऐसा होना बहुत अफ़सोस नाक है.


इस सब मामले में कांग्रेस के युवा विधायक अल्पेश ठाकोर का नाम सबसे ऊपर आ रहा है. भाजपा की और से जो बयान जारी किये जा रहे हैं वह भी अल्पेश ठाकोर की तरफ इशारा कर रहे हैं लेकिन इन बयानों से भाजपा की कमज़ोरी भी सामने आ रही है की आखिर गुजरात में भाजपा की सरकार है तो फिर अल्पेश ठाकोर इतने प्रभावी कैसे हो सकते हैं की लोगों का पलायन लगातार जारी है. अल्पेश ठाकोर के नाम आने से कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ गयी हैं. हालाँकि कांग्रेस ने कहा है की जांच होने के बाद अल्पेश ठाकोर के खिलाफ एक्शन हो सकता है और बाहर भी किया जा सकता है.

ये बात भी समझ से परे है की आखिर अल्पेश ठाकोर को क्या सूझी जो ऐसी राजनीति करने पर उतारू हो गए. क्या अल्पेश ठाकोर के सामने फिर कोई राजनितिक मंशा है. क्या वह फिर कांग्रेस से अलग होकर कुछ नया करने के चक्कर में हैं. सूत्रों के मुताबिक़ अल्पेश ठाकोर गुजरात में राज ठाकरे बनना चाहते हैं. वह किसी कांग्रेस या भाजपा के साथ नहीं बल्कि अपनी अलग दुनिया बनाना चाहते हैं. इसी नई दुनिया बनाने के चक्कर में उन्हें गुजरातियों में उत्तर भारतीयों के खिलाफ नफरत का माहौल बनाने की कोशिश की. ब्लातकार के इस घटना को अपने लिए सही राह चुनने का मौक़ा मान रहे हैं. अल्पेश ठाकोर के इस घटना के बाद दिए गए बयान जिसमे उन्होंने कहा की 'बाहर के जो तमाम लोग यहां आते हैं, क्राइम करते हैं, उनकी वजह से अपराध बढ़ा है, गांव में टकराव बढ़ा है। वे गांवों के सामान्य लोगों को मारते हैं और अपराध करके वापस चले जाते हैं। उनके कारण, गुजरातियों को रोजगार नहीं मिल रहा है। क्या ऐसे लोगों के लिए हमारा गुजरात है?' को देखे और राज ठाकरे के बयानों से तुलना करें तो महसूस होगा की अल्पेश ठाकोर ने अब अपनी नई राजनीति की शुरुआत कर दी है.


अल्पेश ठाकोर इतने पर ही नहीं रुके बल्कि उन्होंने कहा की 'गांडा बाबल झाड़ियां उग आती हैं तो इन झाड़ियों को रोकने के लिए, इन्हें काटने से कोई नहीं रोक सकता। काटेंगे ना झाड़ियां... सूख जाने के बाद घर में सुलगाने के लिए लेकर जाएंगे। झाड़ियों को काटने में तो सरकार का भी कोई प्रतिबंध नहीं है।' इन बयानों के बाद ये बात समझी जा सकती है की हिंदुत्व के प्रयोगशाला कहे जाने वाले राज्य गुजरात में एक नई राजनीति जन्म ले रही है. अब देखना ये है की अल्पेश कहां जाकर रुकते हैं और कांग्रेस कैसे इनसे पल्ला झाड़ती है. सबसे बड़ी परेशानी केंद्र और राज्य की सत्ता पर क़ाबिज़ भाजपा के लिए है आखिर इस मुसीबत का क्या इलाज करेगी जबकि उत्तर प्रदेश और बिहार दोनों राज्यों में भाजपा और समर्थित सरकारें हैं.

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