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सूरत के मजिस्ट्रेट कोर्ट में पेश हुए राहुल गांधी, बयान दर्ज कराते हुए माफी मांगने से किया इनकार
नई दिल्ली : कांग्रेस नेता राहुल गांधी आज गुजरात के सूरत में मजिस्ट्रेट की अदालत में अपना बयान दर्ज कराते हुए माफी मांगने से इनकार कर दिया है। 2019 लोकसभा चुनाव के दौरान मोदी सरनेम पर विवादित टिप्पणी करने वाले कांग्रेस सांसद ने कोर्ट से कहा कि वह व्यंग्य कर रहे थे। साथ ही यह भी कहा कि उन्हें अब इसके बारे में बहुत कुछ याद भी नहीं है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, राहुल गांधी ने कोर्ट में कहा, ''मेरा इरादा किसी समुदाय को निशाना बनाने का नहीं था। मैं सिर्फ चुनावों के दौरान व्यंग्य कस रहा था। मुझे इसके बारे में अधिक याद भी नहीं है।'' बताया जा रहा है कि राहुल गांधी के वकील ने यह भी कहा कि उनके मुवक्किल माफी नहीं मांगेंगे। मामले की अगली सुनवाई 11 जुलाई को होगी।
गुजरात के एक विधायक ने राहुल गांधी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। सूरत से भाजपा के विधायक पूर्णेश मोदी ने आईपीसी की धारा 499 और 500 के तहत अप्रैल 2019 में गांधी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। एक हफ्ते पहले सूरत के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ए एन दवे ने मामले में अंतिम बयान दर्ज कराने के लिए गांधी को 24 जून को अदालत में मौजूद रहने का निर्देश दिया।
इससे पहले शिकायतकर्ता और BJP विधायक पूर्णेश मोदी ने कहा, ''2019 के लोकसभा के चुनाव में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा था कि सभी चोरों का उपनाम मोदी क्यों है। हमने सूरत की अदालत में मानहानि का मुकदमा किया था।
बतादें कि अप्रैल 2019 में पूर्णेश मोदी की शिकायत में कांग्रेस सांसद पर राष्ट्रीय चुनाव से पहले एक रैली में अपनी टिप्पणियों के लिए "पूरे मोदी समुदाय को बदनाम करने" का आरोप लगाया गया। गांधी ने 13 अप्रैल, 2019 को कर्नाटक में एक जनसभा में यह टिप्पणी की थी। राहुल गांधी ने कथित तौर पर जब यह टिप्पणी की थी तब वह कांग्रेस अध्यक्ष थे। इससे पहले गांधी अक्टूबर 2019 में अदालत में पेश हुए थे और उन्होंने इस टिप्पणी के लिए खुद को दोषी नहीं माना था।
उन्होंने कथित तौर पर कोलार में कहा था, "नीरव मोदी, ललित मोदी, नरेंद्र मोदी... कैसे उन सभी का सामान्य उपनाम मोदी है। सभी चोरों का मोदी एक सामान्य उपनाम कैसे है।" वह उस समय कांग्रेस अध्यक्ष थे, उन्होंने लोकसभा चुनाव में अपनी पार्टी की हार के बाद मई में इस्तीफा दे दिया था। राहुल गांधी अक्टूबर 2019 में अदालत के सामने पेश हुए थे और उन्होंने "दोषी नहीं" होने का अनुरोध किया था।