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कानपुर केस : फरीदाबाद पुलिस ने बताया- दो दिन तक कानपुर में ही था विकास दुबे, पकडे गए साथियों ने उगले कई राज!

विकास दुबे के सहयोगी प्रभात ने कहा- झींझक, औरैया होते हुए फरीदाबाद पहुंचे थे।

 Arun Mishra |  8 July 2020 1:49 PM GMT  |  दिल्ली

कानपुर केस : फरीदाबाद पुलिस ने बताया- दो दिन तक कानपुर में ही था विकास दुबे, पकडे गए साथियों ने उगले कई राज!
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उत्तर प्रदेश पुलिस ने कानपुर में आठ पुलिसवालों की हत्या के आरोपी विकास दुबे की धरपकड़ तेज कर दी है। यूपी पुलिस के ADG, कानून व्यवस्था प्रशांत कुमार ने कहा कि अपराधियों के खिलाफ ऐसी कार्रवाई की जाएगी जो नजीर बनेगी। बुधवार सुबह विकास के दाएं हाथ अमर दुबे को मुठभेड़ में मार गिराया गया।

वहीँ फरीदाबाद से विकास दुबे के साथियों को गिरफ्तार किया है हालाँकि विकास दुबे भागने में सफल रहा. फरीदाबाद में अरेस्‍ट कार्तिकेय उर्फ प्रभात को यूपी पुलिस ट्रांजिट रिमांड पर लेकर गई. श्रवण और उसका बेटा अंकुर न्यायिक हिरासत में भेजे गए. कार्तिकेय कानपुर एनकाउंटर के बाद से विकास दुबे के साथ था। हमीरपुर में एनकाउंटर में मारा गया अमर दुबे भी फरीदाबाद आया था, लेकिन सोमवार की रात वह यहां से चला गया था।

इसके बाद फरीदाबाद पुलिस ने कहा- विकास दुबे 8 पुलिसकर्मियों की हत्या के बाद दो दिन तक शिवली में ही था। विकास दुबे ने फरीदाबाद में भाभी की मौसी के घर इंदिरा कॉम्पलेक्स एरिया में ली थी पनाह। आरोपी प्रभात उर्फ कार्तिकेय ने पुलिस पूछताछ में कबूल किया कि उसने और विकास दुबे ने पुलिसकर्मियों पर हमला किया था। फिर पिस्टल छीनकर भागे थे। फरार होने के दो दिन तक यूपी के शिवली में ही रहे थे।

विकास दुबे के सहयोगी प्रभात ने एक न्यूज चैनल से कहा- झींझक, औरैया होते हुए फरीदाबाद पहुंचे थे। प्रभात ने कहा कि वह उस रात विकास दुबे के घर था और उसने भी फायरिंग की थी। प्रभात ने पुलिस वालों को मारने पर अफसोस जताया है।

चौबेपुर का थानेदार विनय तिवारी गिरफ्तार

आईजी ने बताया है कि विकास दुबे एनकाउंटर केस में आरोपी बनाए गए चौबेपुर थाने के पूर्व SO विनय तिवारी और एक सब इन्स्पेक्टर को गिरफ्तार कर लिया गया है। कानपुर के एसएसएपी दिनेश प्रभु ने बताया, 'सबूतों के आधार पर यह पाया गया है कि विनय तिवारी और के के शर्मा ने विकास दुबे को सूचना दे दी थी कि उसके घर छापेमारी होने वाली है। इसीलिए वह अलर्ट हो गया था और उसने पुलिस पर हमला कर दिया। यही कारण था कि आठ पुलिसवालों की जान चली गई।'

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