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कोविड 19 का नाम बदलकर कोविड 20 कर देना चाहिए : क्रोनोलॉजी समझ लीजिए

साफ है कि WHO फिर से एक बार पलटी मार रहा है जबकि यही WHO कुछ दिनों पहले तक चीन को पूरी तरह से क्लीन चिट दे रहा था .

 Shiv Kumar Mishra |  5 July 2020 5:47 AM GMT

कोविड 19 का नाम बदलकर कोविड 20 कर देना चाहिए : क्रोनोलॉजी समझ लीजिए
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गिरीश मालवीय

कोविड 19 में 19 का मतलब यह था कि 2019 के दिसंबर के आखिर में जब चीन में इसका पहला मामला सामने आया तो चीन ने 31 दिसम्बर को इसकी सूचना WHO को दी थी...... वैज्ञानिकों ने इसे 2019-nCoV दिया। 2019 इसलिए क्योंकि वह उस साल पैदा हुआ। नया वायरस होने से नोवेल और कोरोना फैमिली से होने पर CoV नाम दिया गया। इस तरह कोविड-19 कोरोना वायरस डिजिज 2019 के नाम से जाना जाने लगा।

लेकिन अब WHO ही पलट गया है अब उसका कहना है कि चीन ने उसे 31 दिसंबर को ऐसी कोई सूचना नही दी WHO ने मामले से जुड़ी अपनी टाइमलाइन कल फिर से जारी की उसमे यह साफ किया गया है चीन ने आधिकारिक तौर पर 31 दिसम्बर 2019 को डब्ल्यूएचओ को इसकी कोई जानकारी नहीं दी

वर्तमान टाइमलाइन के मुताबिक, अब डब्ल्यूएचओ का कहना है कि चीन में हमारे कंट्री ऑफिस को चीन से आधिकारिक रूप से नही बल्कि मीडिया के जरिए वुहान के पहले मामले की जानकारी मिली। मीडिया में वुहान नगरपालिका स्वास्थ्य आयोग के हवाले से आई खबरों से 'वायरल नियोनिया' के बारे में पता चला था।

डब्ल्यूएचओ के निदेशक टेड्रॉस ऐडनॉम ग्रेबयेसस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि चीन से पहली रिपोर्ट 31 दिसंबर को नही बल्कि 20 अप्रैल को आई थी। उन्होंने कहा कि इसमें इस बात का जिक्र भी नहीं था कि यह रिपोर्ट चीन के अधिकारियों ने भेजी है या किसी अन्य स्रोतों की ओर से, लेकिन डब्ल्यूएचओ ने इस हफ्ते एक नई क्रोनोलॉजी जारी की है, जिसमें इन घटनाओं के बारे में विस्तार से बताया गया है।

साफ है कि WHO फिर से एक बार पलटी मार रहा है जबकि यही WHO कुछ दिनों पहले तक चीन को पूरी तरह से क्लीन चिट दे रहा था .

साफ है कि WHO की भूमिका संदेहास्पद है कभी वह कुछ बोलता है कभी कुछ, ताइवान के सेंट्रल एपिडेमिक कमांड सेंटर ने बताया था कि 31 दिसंबर को ही डब्ल्यूएचओ को चेतावनी दे दी गई थी कि ये वायरस इंसान से इंसान में फैलता है। इस रिपोर्ट को सिर्फ संबंधित विभाग में भेज दिया गया। जानकार मानते हैं कि डब्ल्यूएचओ ने ताइवान की चेतावनी को संजीदगी से नहीं लिया। ओर वायरस फैल गया हालांकि यह पहला मौका नहीं है जब डब्ल्यूएचओ को आलोचनाएं झेलनी पड़ी हों। ऐसे कई मौके आए जब इस वैश्विक संस्था की कार्यप्रणाली पर उंगलियां उठीं। कभी बच्चों के गलत तरीके से सैंपल लेने पर, तो कभी अफ्रीका में एड्स फैलाने जैसे आरोप भी इस पर लगते रहे है

कोविड 19 के विस्तार ने चीन की भी भूमिका से अब इनकार नही किया जा सकता क्योंकि अब WHO भी पलट रहा है अमेरिका समेत दुनियाभर से मांग हो रही है कि चीन इस महामारी के स्रोत की स्‍वतंत्र अंतरराष्‍ट्रीय जांच कराए। कोरोना वायरस की उत्पत्ति चीन के वुहान से हुई है। इसलिए वायरस कहां से आया यह समझाने की जिम्मेदारी चीन की है। चीन ने दुनिया को पहले आईसीयू में डाल दिया और अब वह उनको वेंटिलेटर और मास्क की आपूर्ति कर रहा है।


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