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भारत-पाकिस्तान बार्डर पर किया स्वास्थय कैंप का आयोजन अपनी सेवा से ज़िले का नाम रोशन कर रही डॉ-अलका

 Special Coverage News |  7 Oct 2018 3:16 AM GMT  |  बिजनौर

भारत-पाकिस्तान बार्डर पर किया स्वास्थय कैंप का आयोजन अपनी सेवा से ज़िले का नाम रोशन कर रही डॉ-अलका
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स्योहारा। यूँ तो समय समय पर क्षेत्र की कई प्रतिभाओं ने अपनी कला व साहस से अपना व ज़िले का नाम रोशन किया है। पर डॉक्टर अलका चौहान पुत्री नेतराम सिंह निवासी ग्राम काजमपुर ने ऐसे क्षेत्र में लोगो को चिकित्सा सेवा देकर नया कीर्तिमान स्थापित किया है। जिस क्षेत्र में आमजन तो क्या पुलिस भी नही जा पाती। जी हां वह क्षेत्र जम्मू कश्मीर का पाकिस्तान से, वो ग्रामीण क्षेत्र जहां हर समय मौत का आतंक मंडराता रहता है।

जम्मु – कश्मीर बार्डर पर किया स्वास्थय शिविर का आयोजन

ॠषि कश्यप स्वास्थय सेवा यात्रा के तत्वाधान में गत वर्ष कि भांति इस वर्ष भी सितंबर माह में देश के विभिन्न राज्यो के मेडिकल कांलेजो से जम्मू कश्मीर के लेह-लद्दाख, सोपोर, बारामुला, पुंछ सहित कई जिलो के लिये चिकित्सको को जत्था रवाना हुआ। जिसमें किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय लखनऊ के सीनियर रेसिडेंट के पद पर कार्यरत डांक्टर अल्का चौहान के नेतृत्व में चिकित्सको की टीम रवाना हुई। टीम का नेतृत्व कर रही अल्का चौहान अपनी टीम के साथ पाकिस्तान के निकटवर्ती क्षेत्र जहां आय दिन चलती गोलीबारी के बीच में जाकर शिविर लगाकर लोगो को निशुल्क स्वास्थय सेवा प्रदान करने का साहसपूर्ण कार्य किया। इस दौरान उनकी टीम ने कुल 120 कैंप लगाये जिसमें 15000 मरीजो को निशुल्क स्वास्थय सेवा प्रदान की।

कौन हैं डॉक्टर अलका

क्षेत्र के ग्राम काज़मपुर के मध्यवर्गी परिवार में जन्मी अलका ने कक्षा एक से कक्षा आठवीं तक की पढ़ाई ग्रामीण पाठशाला में पूरी की। स्नातक की पढ़ाई दंत चिकित्सा में पूरी करने के बाद राम मनोहर लोहिया अस्पताल दिल्ली में जूनियर रेसिडेंट के पद पर कार्यरत रही, उसके उपरांत पीजीआई चंडीगढ़ में हाऊस सर्जन के पद पर कार्य किया, उसके उपरांत परास्नातक करने क़े लिए हिमाचल प्रदेश गवर्मेन्ट डेंटल कॉलेज गयी। वर्तमान मे लखनऊ के किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय में सीनियर रेसिडेंट के पद पर कार्यरत हैं।

विशेषता= सभी कैंप सीमा क्षेत्र में हुए और डॉक्टर विद्यार्थी एवं सेवा भारती के स्वयंसेवकों ने देश के अंतिम गांव के अंतिम घर को सेवा देने का प्रयास किया।

डॉ अलका चौहान की इस निस्वार्थ सेवा भाव को सलाम।

विद्यार्थी एवं डॉक्टरों की संख्या= 180

जम्मू कश्मीर के स्थानीय डॉक्टर और विद्यार्थियों की संख्या= 25

कुल कैंप= 120

लाभान्वित मरीज= >15000

कश्मीर में टीम की संख्या= 8

जम्मू में टीम की संख्या= 28

कुल प्रतिभागी मेडिकल कॉलेज= 18

प्रतिभागी प्रांतों की संख्या= 10

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