Top
Home > हेल्थ > वर्ल्ड कैंसर डे पर विशेष : कैंसर से जंग किताब के लेखक ने दी जानकारी, कैंसर का इलाज है सौ प्रतिशत बशर्ते ...?

वर्ल्ड कैंसर डे पर विशेष : 'कैंसर से जंग' किताब के लेखक ने दी जानकारी, कैंसर का इलाज है सौ प्रतिशत बशर्ते ...?

अगर उसका इलाज नहीं किया जाता है तो यह पूरे शरीर में फैल सकता है।

 Shiv Kumar Mishra |  2 Feb 2020 4:01 AM GMT  |  दिल्ली

वर्ल्ड कैंसर डे पर विशेष : कैंसर से जंग किताब के लेखक ने दी जानकारी, कैंसर का इलाज है सौ प्रतिशत बशर्ते ...?
x

कैंसर क्या है?

हमारे शरीर में कोशिकाओं (सेल्स) का लगातार विभाजन होता रहता है और यह सामान्य-सी प्रक्रिया है, जिस पर शरीर का पूरा कंट्रोल रहता है। लेकिन जब शरीर के किसी खास अंग की कोशिकाओं पर शरीर का कंट्रोल नहीं रहता और वे असामान्य रूप से बढ़ने लगती हैं तो उसे कैंसर कहते हैं। जैसे-जैसे कैंसर ग्रस्त कोशिकाएं बढ़ती हैं, वे ट्यूमर (गांठ) के रूप में उभर आती हैं। हालांकि हर ट्यूमर में कैंसर वाले सेल्स नहीं होते लेकिन जो ट्यूमर कैंसर ग्रस्त है, अगर उसका इलाज नहीं किया जाता है तो यह पूरे शरीर में फैल सकता है।

कैसे होता है शुरू

कोशिका के जीन में बदलाव से कैंसर की शुरुआत होती है। जीन में बदलाव अपने आप भी हो सकता है या फिर कुछ बाहरी कारकों, मसलन तंबाकू, वायरस, अल्ट्रावाइलेट रे, रेडिएशन (एक्सरे, गामा रेज आदि) आदि की वजह से भी। अमूमन इम्यून सिस्टम ऐसी कोशिकाओं को खत्म कर देता है, लेकिन कभी-कभार कैंसर

की कोशिकाएं इम्यून सिस्टम पर हावी हो जाती हैं और फिर बीमारी अपनी चपेट में ले लेती है।

हर ट्यूमर कैंसर नहीं

बिनाइन ट्यूमर नॉन-कैंसरस होते हैं, जबकि मेलिग्नेंट ट्यूमर को कैंसरस माना जाता है। बिनाइन ट्यूमर से जीवन को कोई खतरा नहीं होता और यह फैलता भी नहीं है। यह जिस अंग में होता है, वहीं रहता है और वहीं से इसे सर्जरी के जरिए हटा दिया जाता है। दूसरी तरफ मेलिग्नेंट ट्यूमर बदमाश होते हैं। ये अपने आसपास के अंगों पर भी हमला कर कर देते हैं और उन्हें भी अपनी गिरफ्त में ले लेते हैं। इनकी ताकत इतनी ज्यादा होती है कि ये ट्यूमर से अलग हो जाते हैं और ब्लड में घुस जाते हैं, जिसका नतीजा यह होता है कि कैंसर शरीर के दूसरे अंगों में भी फैलना शुरू हो जाता है। फैलने की इस प्रक्रिया को मेटास्टैटिस कहा जाता है।

इलाज के 7 तरीके

1. सर्जरी: शरीर के जिस अंग में कैंसर का ट्यूमर बना है, उसे ऑपरेशन कर निकाल देने से परेशानी काफी हद तक दूर हो जाती है।

2. कीमोथेरपी: इसमें आईवी यानी इंट्रा वेनस थेरपी के जरिए दवा देकर कैंसर को रोकने की कोशिश होती है। आजकल कीमोथेरपी के लिए सूई की जगह टैब्लेट्स का उपयोग होने लगा है।

3. रेडियोथेरपी: इस प्रोसेस में रेडिएशन का ज्यादा डोज देकर ट्यूमर को खत्म किया जाता है। रेडियोथेरपी कैंसर दूर करने में मुख्य भूमिका नहीं निभाता बल्कि यह दूसरे तरीके से इलाज होने पर कैंसर को फैलने से रोकने में सहायता करता है।

3. इम्यूनोथेरपी: इसके जरिए शरीर के इम्यून सिस्टम को ही कैंसर से लड़ने के लिए तैयार किया जाता है। इसे बायलॉजिकल थेरपी भी कह सकते हैं।

4. टार्गेटेड थेरपी: इसमें स्मॉल मॉलिक्यूलर ड्रग्स होते हैं जो सीधे कैंसर सेल्स पर हमला करते हैं। इससे दूसरे अच्छे सेल्स को नुकसान नहीं होता।

5. हॉर्मोन थेरपी: इसमें खास तरह के हॉर्मोन को शरीर में दिया जाता है। यह उन हॉर्मोन्स के असर को कम करता है जो कैंसर को बढ़ने में मदद करते हैं।

6. स्टेम सेल ट्रांसप्लांट: इस प्रोसेस में ब्लड बनाने वाले सेल्स को शरीर में बनाया जाता है। दरअसल, कीमोथेरपी और रेडियोथेरपी की वजह से शरीर की कोशिकाएं नष्ट हो जाती हैं।

7. प्रिसिशन मेडिसिन: इसमें हर मरीज का उसकी बीमारी के अनुसार अलग-अलग इलाज किया जाता है। इसे पर्सनलाइज्ड मेडिसिन ट्रीटमेंट भी कह सकते हैं।

अगर कोई शारीरिक परेशानी हो रही है और वह बार-बार हो तो यह कतई जरूरी नहीं कि वह कैंसर है। वह कोई दूसरी छोटी-मोटी बीमारी भी हो सकती है। फिर भी सतर्कता जरूरी है। किसी डॉक्टर से मिलकर और टेस्ट कराने के बाद ही किसी नतीजे पर पहुंच सकते हैं।

कैंसर खतरनाक इसलिए है क्योंकि इसे पहचानने की चुनौती ही सबसे बड़ी है। शुरू में इसके लक्षण सामान्य बीमारियों वाले ही होते हैं। मसलन थकावट, बुखार, एसिडिटी, खांसी, ब्लीडिंग आदि। ये लक्षण किसी दूसरी आम-सी बीमारी के भी हो सकते हैं। मसलन, अगर किसी को बीपी या शुगर की समस्या है तो शरीर में दर्द और थकावट रह सकती है। महिलाओं को पीरियड्स में ब्लीडिंग स्वाभाविक है। एसिडिटी भी किसी को हो सकती है तो क्या ऐसे सभी मामलों में कैंसर की आशंका हो सकती है। क्या सभी को कैंसर की जांच करानी चाहिए/ ऐसे सभी सवालों का एक ही जवाब है, 'असामान्य होना'


आयुर्वेद के अनुसार कैंसर से बचना है तो...

आयुर्वेद की 3 जरूरी बातें

1. दिनचर्या ठीक करें: सुबह सूरज से पहले जगना, फ्रेश होना, ब्रेक फास्ट, लंच और डिनर समय पर लेना।

2. ऋतुचर्या पर ध्यान: शरीर के लिए सभी 6 ऋतु जरूरी हैं। चाहे वह सर्दी हो गर्मी हो या फिर कोई और। ठंड से बचने के लिए हीटर चलाते हैं। हीटर के करीब लंबे समय तक रहने से शरीर में खून की कमी होती है। इसकी जगह पूरे घर को गर्म करना बेहतर है। इसमें एसी की मदद ले सकते हैं। जब कमरे का तापमान 23 डिग्री से कम होता है, यह सेहत के लिए हािनकारक है। मौसमी फल और सब्जियां ही खाना सबसे बेहतरीन उपाय है।

3. सदव्रत का पालन: पॉजिटिव थिकिंग जरूरी है। चाहे वह अपने बारे में हों या फिर दूसरों के बारे में।

कहां इलाज और स्पेस्लिस्ट डॉ

डॉ. एस. एम. ज़ैदी

सीनियर कंसल्टंट, इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल

डॉ. अंशुमान कुमार

डायरेक्टर, सर्जिकल कैंसर डिपार्टमेंट, धर्मशिला नारायणा

डॉ. आलोक शर्मा

पूर्व निदेशक, आयुर्वेदिक विभाग, एमसीडी हॉस्पिटल

डॉ. रवींद्र कुमार

डेप्यूटी डायरेक्टर, मेडिकल, सीआरपीएफ

डॉ. पी. शरत चंद्रा

प्रफेसर, हेड यूनिट 1, डिपार्टमेंट ऑफ

न्यूरोसर्जरी, एम्स

डॉ. राहुल भार्गव

ब्लड कैंसर स्पेशलिस्ट, फोर्टिस हॉस्पिटल

डराने के लिए कैंसर का नाम ही काफी है। यह डर इतना है कि लोग इस बीमारी के लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं और कैंसर खतरनाक हो जाता है। अगर मरीज लक्षणों पर गंभीरता से ध्यान दें और पता चलते ही उसका इलाज कराए तो कैंसर पूरी तरह ठीक हो सकता है। पहली स्टेज के कैंसर के सौ फीसदी ठीक होने के आसार होते हैं। एक्सपर्ट्स से बात कर पूरी जानकारी दे रहे हैं लोकेश के. भारती

इसे हराना मुश्किल जरूर है, लेकिन नामुमकिन नहीं

स्टेप 1: tmc.gov.in पर जाएं।

स्टेप 2: फिर नीचे की ओर जाने पर राइड साइड में PATIENT SERVICES वाला सेक्शन मिलता है। इसमें Online Expert Opinion-Navya पर क्लिक करने के बाद Get expert opinion here का ऑप्शन आता है। इसके नीचे Read More पर क्लिक करना है।

स्टेप 3: Read More पर क्लिक करने के बाद एक नई वेबसाइट•avya.care पर पहुंचते हैं।

स्टेप 4:•avya.care पर सामने ही Register to receive your expert opinion आता है। उसमें फॉर्म भरना होता है। इसमें नाम, मोबाइल नंबर, ईमेल, पासवर्ड आदि भरना पड़ता है। फिर Submit करते हैं। इस तरह रजिस्ट्रेशन का पहला प्रॉसेस पूरा हो जाता है। दोबारा लॉगइन करने पर ईमेल आईडी और पासवर्ड पूछा जाता है इसलिए मेल आईडी और पासवर्ड जरूर याद रखें। दूसरी खास बात यह है कि जब रजिस्ट्रेशन पूरा हो जाएगा तो नीचे एक्सपर्ट्स की लिस्ट फोटो के साथ देख सकते हैं।

स्टेप 5: पहले पेज का रजिस्ट्रेशन पूरा होने के बाद एक नया पेज PROFILE खुलता है। इसमें बाकी इंफॉर्मेशन भरनी पड़ती है जैसे जन्मदिन, शहर, राज्य आदि। इसी पेज पर नीचे की तरफ Patient Information भी भरना होता है। इसमें जानकारी देनी होती है कि कैंसर कब पता चला, महिला है तो क्या प्रेग्नेंट है, वजन कितना है आदि। फिर सबमिट करते हैं।

स्टेप 6: प्रोफाइल पेज कंप्लीट करने के बाद ऑनलाइन पेमंट का ऑप्शन आता है। इसके लिए 8500 रुपये देने होते हैं। लेकिन अगर किसी के पास बीपीएल कार्ड है या उसकी सालाना आमदनी 2.5 लाख रुपये तक ही है तो मुफ्त में सलाह मिलेगी। इसके लिए बीपीएल कार्ड या आय प्रमाणपत्र अपलोड करना होगा।

स्टेप 7: इसके बाद पेमंट के बाद मरीज की टेस्ट रिपोर्ट अपलोड करनी होती है। सभी रिपोर्ट्स कंप्यूटर प्रिंटेड और पढ़ने लायक होने चाहिए।

स्टेप 8: रिपोर्ट अपलोड करने के बाद एक्सपर्ट अमूमन 72 घंटे में ओपिनियन दे देते हैं। कभी-कभी इसमें कुछ ज्यादा वक्त भी लग जाता है। वे मरीज को बताते हैं कि उसे क्या जरूरत है। मसलन, मरीज को कीमोथेरपी, रेडियोथेरपी या सर्जरी की जरूरत है। अगर ज्यादा कुछ जानना है तो CONTACT US का भी ऑप्शन होता है। यहां इस बात का ध्यान रखना भी जरूरी है कि कोई सीधे CONTACT US वाले ऑप्शन पर नहीं जा सकता। पहले मरीज को पूरी प्रोफाइल सबमिट करनी पड़ती है। इसके बाद ही कॉन्टेक्ट किया जा सकता है।

देश के सबसे बड़े कैंसर हॉस्पिटल टाटा मेमोरियल सेंटर, मुंबई ने देश और विदेश के मरीजों को ऑनलाइन सेकंड ओपनियन की सुविधा दी है। ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराकर टेस्ट रिपोर्ट भेजने के बाद वहां के एक्सपर्ट डॉक्टर सलाह देते हैं।

यहां से मदद

TATA मेमोरियल सेंटर से घर बैठे ले सकते हैं सेकंड ओपिनियन

कैंसर का इलाज जितनी जल्दी शुरू करते हैं, उतना ही नतीजा बेहतर होता है। हकीकत यह है कि कई डॉक्टर भी इस तथ्य को जल्दी स्वीकार करने से डरते हैं कि मरीज को कैंसर होने की आशंका के बारे में कैसे बताएं इसलिए वे तमाम दवा देकर देख लेते हैं, लेकिन कैंसर के टेस्ट के लिए नहीं कहते। जबकि ऐसे तमाम उदाहरण हैं जब मरीज ने कैंसर को बुरी तरह हराया। अगर कैंसर शुरुआत होने के 15 दिन से 1 महीने के अंदर पता चल जाए तो इसका इलाज 100 फीसदी मुमकिन है।

कैंसर की बेसिक बातें• कैंसर के मामले में मौत की ज्यादा वजह शुरुआत में जहां लक्षणों को नजरअंदाज करना है, वहीं दूसरी सबसे बड़ी वजह है इसे लाइलाज मान कर हिम्मत हार देना। यह जरूरी नहीं कि सिर्फ मरीज ही सब कुछ खत्म वाली सोच में पहुंच जाए, कई बार उसके नजदीकी रिश्तेदार की भी ऐसी ही सोच हो जाती है। हकीकत यह है कि जब किसी लड़ाई में हिम्मत पहले ही हार जाएं तो जंग शुरू होने से पहले ही दुश्मन के पक्ष में हो चला जाता है। अगर कैंसर को हराना है तो इसकी हकीकत को समझते हुए इसे भी आम बीमारी मानना होगा। इसे हराना मुश्किल तो जरूर है, लेकिन नामुमकिन बिलकुल नहीं।

•अमूमन कैंसर लाइलाज तब होता है, जब यह आखिरी स्टेज में पहुंचता है। अगर किसी शख्स को जल्द ही इसका पता चल जाए तो जीत सुनिश्चित है।

•अगर किसी के घर में कोई कैंसर मरीज है तो देख-रेख करने वालों को भी मानसिक तनाव से लड़ना पड़ता है। ऐसे में सुबह में वॉकिंग, सूर्य नमस्कार और योग उनके काफी काम आता है।

•यह ठीक है कि पौष्टिक तत्व (सप्लिमेंट्स, न्यूट्रिशनल डाइट आदि) की मदद से कैंसर मरीज को फायदा होता है, लेकिन ध्यान रखने वाली बात यह भी है कि ये किसी भी सूरत में कैंसर का संपूर्ण इलाज नहीं हो सकते।

कैंसर से जुड़ी बातों पर अगर आप दूसरे पाठकों के साथ काम की कुछ जानकारी साझा करना चाहते हैं या सुझाव देना चाहते हैं तो हमारे फेसबुक पेज www.facebook.com/SundayNBT पर इसी आर्टिकल के कमेंट्स सेक्शन में करें चर्चा।

तंबाकू पुरुषों में कैंसर के करीब 60 फीसदी मामले मुंह और गले के कैंसर के होते हैं और इसके बाद आता है फेफड़ों का कैंसर। इन तीनों ही कैंसर की सबसे बड़ी वजह तंबाकू है। कैंसर के कुल 40 फीसदी मामले तंबाकू की वजह से होते हैं, फिर चाहे पीनेवाला तंबाकू (सिगरेट, बीड़ी, हुक्का आदि) हो या फिर खाने वाला (गुटखा, पान मसाला आदि)।

शराब ज्यादा शराब पीना भी खतरनाक है। ज्यादा शराब पीने से मुंह, खाने की नली, गले, लिवर और ब्रेस्ट कैंसर की आशंका बढ़ जाती है। अल्कॉहल और साथ में तंबाकू का सेवन कैंसर का खतरा कई गुना बढ़ा देता है।

मोटापा अगर किसी के शरीर में फैट बढ़ जाता है तो उसका वजन बढ़ जाता है। इस फैट में मौजूद एंजाइम मेल हॉर्मोन को फीमेल हॉर्मोन एस्ट्रोजिन में बदल देते हैं। फीमेल हॉर्मोन ज्यादा बढ़ने पर ब्लड कैंसर, प्रोस्टेट, ब्रेस्ट कैंसर और स‌र्विक्स (यूटरस) कैंसर होने की आशंका बढ़ जाती है। हाई कैलरी, जंक फूड, नॉन-वेज ज्यादा लेने से समस्या बढ़ जाती है।

इन्फेक्शन हेपटाइटिस बी, हेपटाइटिस सी, एचपीवी (ह्यूमन पैपिलोमावायरस) जैसे इन्फेक्शन कैंसर की वजह बन सकते हैं। हेपटाइटिस सी के इन्फेक्शन से लिवर कैंसर और एचपीवी से महिलाओं में सर्वाइकल और पुरुषों में मुंह का कैंसर हो सकता है। ये वायरस असुरक्षित सेक्स संबंधों से फैलते हैं।

फैमिली हिस्ट्री पैरंट्स या दादा-दादी, नाना-नानी आदि को कैंसर हुआ है तो अगली पीढ़ी को कैंसर होने के चांस करीब 10 फीसदी तक बढ़ जाते हैं। हालांकि यह जरूरी नहीं है कि अगर मां या पिता को कैंसर हुआ है तो बच्चे को होगा ही।

फिजिकली ऐक्टिव न रहना फिजिकल एक्टिविटी या एक्सरसाइज न करने से कैंसर की आशंका बढ़ जाती है। रोजाना कम-से-कम 30 मिनट एक्सरसाइज जरूर करें। हालांकि 45-60 मिनट एक्सरसाइज करना बेहतर है। इसमें कार्डियो एक्सरसाइज (ब्रिस्क वॉक, जॉगिंग, साइक्लिंग, स्वीमिंग आदि ) को जरूर शामिल करें।

बार-बार एक्स-रे एक्स-रे, सीटी स्कैन, अल्ट्रासाउंड आदि की रेडियोऐक्टिव किरणें हमारे शरीर में पहुंचकर सेल्स की केमिकल गतिविधियां बढ़ा देती हैं जिससे स्किन कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। जब जरूरी हो, तभी एक्स-रे या सीटी स्कैन आदि कराएं। इसलिए साल में 2 से 3 एक्स-रे काफी है।

प्लास्टिक इस बात पर काफी रिसर्च हो चुकी है कि सभी तरह का प्लास्टिक एक वक्त के बाद गर्म करने पर केमिकल छोड़ने लगती हैं। बार-बार गर्म करने से प्लास्टिक कंटेनर्स के केमिकल्स टूटने शुरू हो जाते हैं और फिर ये खाने-पीने की चीजों में मिल जाते हैं। इससे कैंसर की आशंका हो सकती हैं। हालांकि पक्के तौर पर नहीं कहा जा सकता क्योंकि इस पर अभी रिसर्च चल रही हैं।

प्रदूषण शहरों में बढ़ता प्रदूषण भी शरीर को वही नुकसान पहुंचा रहा है, जैसा बीड़ी-सिगरेट का धुआं पहुंचाता है। हवा में तय से ज्यादा मात्रा में मौजूद नाइट्रोजन ऑक्साइड, सल्फर डाई ऑक्साइड, कार्बन मोनो ऑक्साइड, ओजोन, लेड आदि हमारे शरीर में कैंसर करनेवाले केमिकल पैदा कर रहे हैं।

1. खानपान सही : जब भी आप नेचरल और सामान्य चीजें खाते हैं तो आप भी तंदुरुस्त ही रहते हैं। पैक्ड फूड, प्रिजर्व्ड फूड, फास्ट फूड (जो सामान्य फूड नहीं हैं) आदि में ऐसी चीजें मिलाई जाती हैं जो दिखने में तो ताजा होती हैं, लेकिन हकीकत में ये बासी होती हैं। इन्हें केमिकल मिलाकर ताजा किया जाता है। ऐसी चीजें न खाएं। साथ ही बिन मौसम फल और सब्जियां भी न लें। नॉनवेज खाने में परहेज करें खासकर रेड एवं प्रोसेस्ड मीट के सेवन से बचें। सेहतमंद फैट चुनें जैसे बटर एवं सैचुरेटेड फैट्स के बजाय ओलिव ऑयल चुनें। ढेर सारा पानी पीएं, इससे कैंसर कारक तत्व यूरीन के साथ बाहर निकलते हैं और कैंसर की आशंका कम हो जाती है।

2. लाइफस्टाइल दुरुस्त: हम बचपन से जिस तरह जीते आए हैं, उसी तरह आगे भी जीना चाहिए। ऐसा न हो कि गांव से या छोटे शहरों आने पर या दूसरों की देखा-देखी अपनी अच्छी आदतों को भी बदल लें। अगर हमें सुबह जल्दी उठने और पार्क या फील्ड में जाने की आदत है तो उसे देर रात तक जागने में न बदलें।

3. मन में चैन: मानसिक शांति की कमी आज सबसे ज्यादा है। लोग तनाव में ही जीना पसंद करने लगे हैं। फेसबुक, वट्सऐप आदि के चक्कर में हम अपना चैन खो देते हैं। ग्रुप में साथ बैठने पर भी लोग आपस में बातें नहीं करते, बस अपने मोबाइल में लगे रहते हैं और इंटरनेट की गुलामी करते हैं। अगर हम अपनी भावनाएं दूसरों से साझा नहीं करते तो हमारे अंदर ऐसे फ्री ऑक्सिडेटिव रेडिकल्स बनने लगते हैं जो धीरे-धीरे शरीर में जमा होने के बाद जीन्स को ही नुकसान पहुंचाते हैं।

ब्रेस्ट कैंसर के लिए BRCA टेस्ट

अगर किसी की मां या बहन को ब्रेस्ट कैंसर हुआ है तो बेटी या बहन को ब्रेस्ट कैंसर (BRCA) जीन टेस्ट करा लेना चाहिए। यह टेस्ट जींस में किसी तरह की गड़बड़ी है तो उसकी जानकारी देता है। यह टेस्ट करीब 20 हजार रुपये में हो जाता है और जिंदगी में एक ही बार कराना होता है। पुरुषों में भी ब्रेस्ट कैंसर के मामले सामने आ रहे हैं इसलिए यह कभी नहीं समझना चाहिए कि पुरुषों को यह कैंसर नहीं हो सकता है। अगर किसी पुरुष को उसकी छाती में गांठ या कुछ लिक्विड निकलता हुआ महसूस हो तो डॉक्टर से जरूर मिलना चाहिए।

हॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री एंजेलिना जॉली ने स्वस्थ होने के बावजूद अपनी दोनों ब्रेस्ट को ऑपरेशन के जरिए हटवा दिया। दरअसल, जॉली की ब्रेस्ट में BRCA1 कैंसर जीन पाया गया था, जिससे उन्हें 87 फीसदी ब्रेस्ट कैंसर और 50 फीसदी गर्भाशय के कैंसर का खतरा था, ऐसा उसे डॉक्टरों ने बताया था। दरअसल, वर्ष 2007 में गर्भाशय के कैंसर की वजह से उनकी मां का निधन हो गया था। हालांकि बाद में उनके इस निर्णय पर विवाद भी हुआ था कि होने से पहले ही ऑपरेशन करना सही नहीं है।

फेफड़ों के कैंसर के लिए CT स्कैन

अगर कोई हेवी स्मोकर है यानी 15-20 साल से स्मोक कर रहा है और खांसी भी है तो उसे फेफड़ों का सीटी स्कैन करा लेना चाहिए। ऐसे लोगों के लिए लो डोज़ चेस्ट सीटी स्कैन भी किया जाता है, जिसकी कीमत भी कम (करीब 3000 रुपये) होती है और रेडिएशन भी कम होता है। अगर रिस्क नहीं है तो भी 40 साल की उम्र में एक बार फेफड़ों का सीटी स्कैन करा लेना चाहिए।

नॉर्मल सीटी स्कैन की कीमत है करीब 6500-9500 रुपये।

प्रोस्टेट कैंसर के लिए PSA टेस्ट

50 साल की उम्र में प्रोस्टेट कैंसर के लिए पुरुषों को पीएसए टेस्ट करा लेना चाहिए। अगर फैमिली हिस्ट्री है तो 40 साल की उम्र में ही यह टेस्ट करा लें।

टेस्ट की कीमत है करीब 1200 रुपये।

कोलोन (आंत) के लिए स्टूल ऑकल्ट ब्लड टेस्ट

अगर पॉटी में खून आ रहा है तो स्टूल ऑकल्ट ब्लड टेस्ट कराएं। इसकी कीमत 100-200 रुपये है। अगर कोई गड़बड़ी निकलती है तो कोलोनोस्कोपी करा सकते हैं, जिससे कैंसर की जानकारी मिल जाती है। कीमत करीब 2000-4000 रुपये है।

सर्वाइकल के लिए पैप स्मियर टेस्ट

महिलाओं में होने वाले सर्वाइकल कैंसर की पहचान के लिए सबसे कॉमन पैप स्मियर टेस्ट है। इसकी कीमत करीब 1000 रुपये है।

CBC

WBC: लगातार नॉर्मल से ज्यादा या कम काउंट रहना। दरअसल, श्वेत रक्त कोशिकाएं हमारे शरीर के सैनिक हैं जो बीमारियों से लड़ने में सहायक हैं। सामान्य लोगों के शरीर के 1 क्यूबिक एमएल ब्लड में इनकी संख्या 4 से 11 हजार होती है। अगर किसी के शरीर में ये लगातार 20 हजार से ऊपर रहती हैं तो सचेत होने की जरूरत है।

हीमोग्लोबिन: शरीर में प्राण वायु ऑक्सिजन को ढोने वाला यह लाल पिग्मेंट बहुत काम का है। अगर किसी की उम्र 60 से ज्यादा है तो यह 10 ग्राम प्रति डेसी. से नीचे नहीं रहना चाहिए। 60 से कम उम्र के पुरुषों में 13.8 से 17.2 ग्राम प्रति डेसी. और महिलाओं में 12 से 15 ग्राम प्रति डेसी के बीच रहना चाहिए। अगर इस रेंज से लगातार कम या ज्यादा आ रहा है तो सचेत होना चाहिए।

प्लेटलेट्स: अगर इसकी संख्या 1 लाख से कम हो और यह लगातार 1 महीने से ज्यादा समय से कम रहे। इसकी सामान्य रेंज 1.5 से 4.5 लाख के बीच होनी चाहिए। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि डेंगू आदि में भी प्लेटलेट्स कम होते हैं, लेकिन इतने लंबे समय तक अमूमन कम नहीं रहते।

CBC टेस्ट से कैंसर या दूसरी बीमारी की पुख्ता जानकारी नहीं मिलती, लेकिन आगे बढ़ने का रास्ता जरूर मिल जाता है। इसका खर्च 200-400 रुपये है।

CT/MRI: सीबीसी जांच के बाद इलाज कराने पर भी अगर रिपोर्ट बार-बार अच्छी नहीं आ रही है तो डॉक्टर सीटी स्कैन या एमआरआई कराने के लिए कहते हैं। CT स्कैन या MRI में करीब 5000-7500 रुपये का खर्च आता है।

PET/CT और PET/MRI: पहले खाली PET (पोजिट्रोन इमिशन ट्रोमोग्राफी) यूज होती थी, जबकि अब PET/CT या PET/MRI भी होती हैं। ये कंबाइंड अप्रोच से काम करती हैं और बेहतर रिजल्ट देती हैं। इनसे पूरी बॉडी की स्कैनिंग हो जाती है। इससे शरीर में कहीं भी कैंसर सेल बढ़ रहे हों तो जानकारी मिल जाती है। PET/CT की कीमत करीब 20,000 रुपये और PET/MRI की कीमत करीब 55,000 रुपये होती है।

बायोप्सी: यह कैंसर के शक को पुख्ता करने का एक तरीका है। इसमें मरीज के शरीर से एक सैंपल निकाला जाता है। अमूमन वह ट्यूमर हो सकता है। नमूने से पता चलता है कि ट्यूमर में कैंसर सेल्स हैं या नहीं। इसके कई तरीके हैं: मसलन: खुरचना, छेद करना, सुई बायोप्सी आदि। टेस्ट: 1500 से 5000 रुपये।•लक्षण सामान्य हो, लेकिन असामान्य तरीके से उभर रहा हो।

•बुखार, एसिडिटी आदि सामान्य समस्याएं है, लेकिन दवा करने के बाद भी अगर बार-बार हो तो शक जरूर करना चाहिए। हालांकि किसी सामान्य परेशानी का बार-बार होना भी यह साबित नहीं करता कि कैंसर ही होगा। लेकिन यह शक करने की वजह तो जरूर देता है। एसिडिटी के मामले में अगर कोई शख्स दवा नहीं ले रहा है और फिर बार-बार एसिडिटी हो जाता है। वह ठीक भी हो जाता है तो घबराने की बहुत जरूरत नहीं है। लेकिन उसे डॉक्टर से संपर्क जरूर रहना चाहिए। वहीं अगर दवा लेते रहने और डोज बदलने के बावजूद एसिडिटी बार-बार होती रहे तो जरूर सचेत होना चाहिए।

•महिलाओं में माहवारी के दौरान ब्लीडिंग कॉमन है, लेकिन जब यह 4-5 दिन के बजाय 8 से 10 दिन हो, एक बार होने के कुछ दिनों के बाद फिर से हो जाए तो शक करना चाहिए।

•जब किसी मरीज की जुबान बात करने में बार-बार लड़खड़ाए और उसे तंबाकू, सिगरेट की आदत हो तो ओरल कैंसर की आशंका है।

•लगातार खांसी, मुंह के छाले, दांतों से लगातार खून आना, ये भी ओरल कैंसर के लक्षण हो सकते हैं और नहीं भी।

•पेशाब में खून आना प्रोस्टेट कैंसर का लक्षण हो सकता है। कई बार किडनी में स्टोन की वजह से भी पेशाब में खून आता है।

•शरीर में गांठ जो तेजी से बढ़ रही हो। यहां इस बात का ध्यान रखें कि अमूमन जिन गांठों में दर्द हो, शुरुआत में उनमें कैंसर सेल्स के होने की आशंका कम रहती है। अगर दर्द न हो तो आशंका बढ़ जाती है। जैसे अगर किसी महिला के ब्रेस्ट में गांठ है और दर्द भी है तो ऐसा अमूमन हॉर्मोन की परेशानी से ऐसा होता है।

•तेजी से वजन कम होना कैंसर का सबसे विशेष लक्षण है। अगर किसी का वजन 3 महीने में 10 किलो कम हो जाए तो उसे जरूर जांच करानी चाहिए। वैसे ध्यान देने वाली बात यह है कि शुगर और टीवी के मामले में भी कई बार अचानक वजन कम होता है।

•स्प्लीन (पेट में मौजूद इस अंग के कई सारे काम हैं, लेकिन सबसे अहम काम है शरीर की सुरक्षा में भूमिका निभाना।) और लिंफनोड (यह भी शरीर के इम्यून सिस्टम का अहम भाग है। शरीर में मौजूद बैक्टीरिया और वाइरस से लड़ने में मदद करता है।)

•जाड़े में भी रात में पसीना आता है तो सचेत हो जाएं। हालांकि ऐसा दिल के मरीजों के साथ भी होता है।

•अगर किसी महिला को अपने पार्टनर के साथ संबंध बनाते समय बार-बार ब्लीडिंग हो तो डॉक्टर से जरूर मिल लें। वैसे, जिस महिला ने किसी के साथ फिजिकल रिलेशन नहीं बनाए हैं, उसमें सर्वाइकल कैंसर का खतरा न के बराबर होता है।


Tags:    
स्पेशल कवरेज न्यूज़ से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें न्यूज़ ऐप और फेसबुक पर ज्वॉइन करें, ट्विटर, Telegram पर फॉलो करे...
Next Story
Share it