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अर्थव्यवस्था ने भले ही हमें धोखा दिया पर कोरोना ने बचाई हमारी लाज, विश्व में हम दूसरे स्थान पर

विश्व में जिस तरह हमारे आर्थिक हालत बिगड़ रहे है उस हिसाब से कोरोना हमारी लाज बचाता नजर आ रहा है.

 Shiv Kumar Mishra |  7 Sep 2020 3:00 PM GMT  |  दिल्ली

अर्थव्यवस्था ने भले ही हमें धोखा दिया पर कोरोना ने बचाई हमारी लाज, विश्व में हम दूसरे स्थान पर
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चलो कोरोना ने रखी हमारे देश की‌ लाज अब हम हैं, विश्व में दूसरे नंबर पर । बस कुछ दिन का इंतजार हम होंगे शीर्ष पर। भले हमें अर्थव्यवस्था ने धोखा दिया हो पर कोरोना ने बचाई हमारी लाज । अर्थव्यवस्था की तरह हमारे देश में कोरोना‌ भी विश्व में सबसे निचले स्थान पर होता तो हमें कितना बुरा लगता ।

अस्पतालों में बढ़ रही है, चहल-पहल, हमारी सड़कें और चौराहों पर रौनक देखने को मिल रही है,दोस्त गले लग लग कर एक दूसरे से हाल-चाल पूछ रहे हैं, दोस्ती का तो यह आलम है एक सिगरेट से पांच - पांच दोस्त कश लगा रहे हैं , जो दोस्त मुंह पर मास्क लगाता है, दूसरे दोस्त मास्क को यह कहकर हटा देते हैं की बहुत हुआ अब हटाओ चेहरे से नक़ाब बहुत दिन हो गए,चांद का दीदार किए हुए।‌ वही होटलों में भी अब महफिले जमने लगी है हुक्कों की गड़गड़ाहट और जामो के गिलास की खनक सुनाई देने लगी है। अब काहे का डर ,जब सरकार ने दे दी छूट अब तो मौज मस्ती करेंगे कोरोना को ठेंगा दिखाएंगे पार्टी मनाएंगे अगर कोरोना की चपेट में आ गए घरवालों को और पड़ोसियों को परेशान करेंगे पर हम नहीं सुधरेंगे ।

23 मार्च 2020 को जब पहला लॉकडाउन लगा था तब केवल 571 मामले थे और हमने 55 दिन का लॉक डाउन का सामना किया था। आज 40 लाख से ऊपर मामले हैं । इस से यह बात साबित होती है, पहले कोरोना से ज्यादा खतरा नहीं था, उस समय कोरोना नया नया भारत में आया था लोगों ने सावधानी बरती और इसके परिणाम हमारे सामने थे आज भारत में रोज़ 75 हजार से ज्यादा मरीज़ निकल रहे हैं, इसके बावजूद अब हमारे दिल में कोरोना का डर छूमंतर हो गया यह तो वही मिसाल हुई जब शुतुरमुर्ग के पीछे कोई शिकारी लगता है तो वह अपने आप को छुपाने के लिए केवल अपनी मुंडी को रेत में छुपा लेता है, उसको लगता है उसका सारा शरीर छुप गया पर यह उसका भ्रम होता है। ऐसे ही हम शुतुरमुर्गो की तरह कोरोना से कम और पुलिस से बचने के लिए मास्क लगाते हैं । जैसे कोई पुलिस वाला दिखता है हम फौरन मास्क लगा लेते हैं, जैसे ही पुलिस वाला गुज़र जाता है ,तो मास्क उतार कर जेब में रख लेते हैं ।

मेरा यह सोचना है,23 मार्च को जो लॉकडाउन लगा था, शायद वह समय ठीक नहीं था, लॉक डाउन अब लगना था जब 80 हज़ार मामले पूरे देश से रोज़ निकल रहे हैं और हमारे शहर भोपाल में रोज़ दो सौ मामलो की आमद हो रही है । ऐसा लगता है अब हमारे देश में कोरोना की कम्युनिटी स्प्रेड की शुरुआत हो गई है ।

क्या होता है कम्युनिटी स्प्रेड आइए हम समझाते हैं, किसी भी बीमारी या महामारी का कम्युनिटी स्प्रेड या कम्युनिटी ट्रांसमिशन कब होता है जब किसी संक्रमित व्यक्ति के सोर्स का कोई आधार ना हो ।

जब किसी इलाके मैं अधिक संख्या में मामले आ जाए और लगातार यह संख्या फैलती जाए उसे कम्युनिटी ट्रांसमिशन कह सकते हैं । कोरोना वायरस से संक्रमित हर शख़्स का एक अलग अनुभव होता है,कुछ में इसके बेहद सामान्य या फिर यूं कहें कि बेहद कम लक्षण नज़र आते हैं तो कुछ में यह काफी गंभीर होते हैं, और कुछ तो ऐसे मामले भी सामने आए हैं जिनमें कोई लक्षण नही होते हैं, जिनके बारे में स्वास्थ्य विभाग सचेत करता रहता है। लेकिन एक बार ये पता चल जाए कि आप संक्रमित हैं तो अस्पताल जाने के अलावा दूसरा कोई विकल्प नहीं

बचता ।

भले सरकार ने रविवार का लॉकडाउन समाप्त कर दिया हो या रात का कर्फ्यू खत्म कर दिया हो पर हमारी जिम्मेदारी यह बनती है हम इस वायरस से बचाव का पूरा पूरा ध्यान रखें खुद भी सुरक्षित रहें अपने परिवार एवं सहकर्मीयों को भी सुरक्षित रखें, जान है तो जहान हैं ।

मास्क लगाना और दूरी का पालन करना कर्त्तव्य हमारा ।

इससे सुरक्षित रहेगा परिवार हमारा ।।

ज़िन्दगी की ना टूटे लड़ी,

कोरोना से खुद की सुरक्षा

कर ले घड़ी दो घड़ी ।

उन आँखों का हँसना भी

क्या,जिन आँखों में

पानी न हो ।

वो जवानी, जवानी नहीं ,

जिसकी कोरोना से सुरक्षा

की कोई कहानी न हो ।

आँसू हैं ख़ुशी की लड़ी ,

सुरक्षा कर ले घड़ी दो घड़ी ।

मोहम्मद जावेद खान

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