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अमेरिका ने कहा-'एशिया-प्रशांत' की जगह 'भारत-प्रशांत' कहना सही

हम 'भारत-प्रशांत के बारे में बात करते हैं, क्योंकि यह शब्दावली भारत के आगे बढ़ने की अहमियत को बयां करता है

 Ekta singh |  2017-11-06 05:11:18.0  |  नई दिल्ली

अमेरिका ने कहा-एशिया-प्रशांत की जगह भारत-प्रशांत कहना सही

नई दिल्ली: ट्रंप सरकार ने अब एशिया-प्रशांत क्षेत्र के लिए भारत-प्रशांत शब्द का इस्तेमाल करना शुरू किया हैं. इस शब्दावली को सही ठहराते हुए इसके बचाव में अमेरिका ने कहा है कि यह भारत के आगे बढ़ने की अहमियत को बयां करता है, जिसके साथ अमेरिका के मजबूत संबंध हैं और यह आगे बढ़ रहा है.

व्हाइट हाउस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने टोक्यो में संवाददाताओं से कहा, 'भारत के साथ हमारा मजबूत संबंध है और बढ़ता जा रहा है. हम 'भारत-प्रशांत के बारे में बात करते हैं, क्योंकि यह शब्दावली भारत के आगे बढ़ने की अहमियत को बयां करता है.' उन्होंने कहा कि भारत-प्रशांत मुक्त समुद्री साझा हित की अहमियत बयां करता है, जो हमारी सुरक्षा और समृद्धि को जारी रखेगा.

अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने जापान पहुंचते ही एशिया की अपनी 12 दिनों की लंबी यात्रा शुरू की. वह दक्षिण कोरिया, चीन, वियतनाम और फिलीपींस की भी यात्रा करेंगे.

हालांकि, जब उनसे यह पूछा गया कि कहीं चीन के प्रभाव को कम करने की रणनीति के तहत तो भारत-प्रशांत शब्द का इस्तेमाल ज्यादा हो रहा है तो उन्होंने कहा कि इस रणनीति का उद्देश्य चीन को रोकना नहीं है. भारत, जापान, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका के बीच एक रणनीतिक वार्ता के बारे में पूछे जाने पर अधिकारी ने कहा कि इसका उद्देश्य चीन को रोकना नहीं हैं.

दरअसल इससे पहले खबर आई थी कि वन बेल्ट वन रोड (OBOR) के जरिये पूरी दुनिया पर दबदबा कायम करने की मंशा पाले चीन को जवाब देने के लिए अब जापान भारत, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया को साथ लाने की योजना बना रहा हैं.

खबर के अनुसार, एशियाई दौरे पर आए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ होने 6 नवंबर को होने वाली मुलाकात के दौरान जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे इस सिलसिले में प्रस्ताव रखेंगे. इसके तहत चारों देशों के नेता जमीन और समुद्र के रास्ते से होने वाले अपने व्यापार और सुरक्षा मामलों में सहयोग बढ़ाएंगे. दक्षिणपूर्व, दक्षिण और मध्य एशिया के अलावा मध्य पूर्व और अफ्रीका तक इसे फैलाया जाएगा.

प्रशांत और हिंद महासागर में भारत को मिलती इस तरजीह ने चीन को खिन्न जरूर कर दिया है. वह इस प्रस्ताव को क्षेत्र में उसके प्रभाव से मुकाबला करने की कोशिश के तौर पर देख रहा है.

अधिकारी के मुताबिक दुनिया की आधी आबादी इस क्षेत्र में रहती है और यहां की अर्थव्यवस्था दुनिया में एक तिहाई से ज्यादा हिस्सा को कवर करती है. इस क्षेत्र में भारत का महत्व बढ़ा है और वो महत्वपूर्ण सुरक्षा साझेदार है.'

अमेरिकी अधिकारी ने कहा हिंद प्रशांत क्षेत्र के पूरब में अमेरिका तो पश्चिम में भारत बसा हुआ हैं.

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