- होम
- राज्य+
- उत्तर प्रदेश
- अम्बेडकर नगर
- अमेठी
- अमरोहा
- औरैया
- बागपत
- बलरामपुर
- बस्ती
- चन्दौली
- गोंडा
- जालौन
- कन्नौज
- ललितपुर
- महराजगंज
- मऊ
- मिर्जापुर
- सन्त कबीर नगर
- शामली
- सिद्धार्थनगर
- सोनभद्र
- उन्नाव
- आगरा
- अलीगढ़
- आजमगढ़
- बांदा
- बहराइच
- बलिया
- बाराबंकी
- बरेली
- भदोही
- बिजनौर
- बदायूं
- बुलंदशहर
- चित्रकूट
- देवरिया
- एटा
- इटावा
- अयोध्या
- फर्रुखाबाद
- फतेहपुर
- फिरोजाबाद
- गाजियाबाद
- गाजीपुर
- गोरखपुर
- हमीरपुर
- हापुड़
- हरदोई
- हाथरस
- जौनपुर
- झांसी
- कानपुर
- कासगंज
- कौशाम्बी
- कुशीनगर
- लखीमपुर खीरी
- लखनऊ
- महोबा
- मैनपुरी
- मथुरा
- मेरठ
- मिर्जापुर
- मुरादाबाद
- मुज्जफरनगर
- नोएडा
- पीलीभीत
- प्रतापगढ़
- प्रयागराज
- रायबरेली
- रामपुर
- सहारनपुर
- संभल
- शाहजहांपुर
- श्रावस्ती
- सीतापुर
- सुल्तानपुर
- वाराणसी
- दिल्ली
- बिहार
- उत्तराखण्ड
- पंजाब
- राजस्थान
- हरियाणा
- मध्यप्रदेश
- झारखंड
- गुजरात
- जम्मू कश्मीर
- मणिपुर
- हिमाचल प्रदेश
- तमिलनाडु
- आंध्र प्रदेश
- तेलंगाना
- उडीसा
- अरुणाचल प्रदेश
- छत्तीसगढ़
- चेन्नई
- गोवा
- कर्नाटक
- महाराष्ट्र
- पश्चिम बंगाल
- उत्तर प्रदेश
- राष्ट्रीय+
- आर्थिक+
- मनोरंजन+
- खेलकूद
- स्वास्थ्य
- राजनीति
- नौकरी
- शिक्षा
- Home
- /
- राष्ट्रीय
- /
- अंतर्राष्ट्रीय
- /
- बत्रा हास्पिटल ने साल...
बत्रा हास्पिटल ने साल भर में हृदयाघात से भर्ती सभी 110 मरीजों की बचाई जान, बनाया शून्य मृत्यु दर का कीर्तिमान
बत्रा हार्ट एंड मल्टीस्पिशयलिटी ग्रुप, फरीदाबाद ने समय पर और तत्परता से इलाज के जरिए पिछले एक साल में हृदयाघात से भर्ती सभी 110 मरीजों की जान बचा कर शून्य मृत्युदर का कीर्तिमान बनाया है। इन मरीजों में ज्यादातर वे थे जिन्हें गंभीर रूप से दिल का दौरा पड़ा था या हृदय संबंधी गंभीर समस्याएं थीं।
विश्व दृदय दिवस की पूर्व संध्या पर हास्पिटल में आयोजित एक सम्मान और सालगिरह समारोह को संबोधित करते हुए कार्डियक साइंसेज के निदेशक और अध्यक्ष डॉ. पंकज बत्रा ने यह जानकारी दी। उन्होंने कहा, "पिछले साल भर में हमारे पास हृदय रोगों और हृदयाघात के 110 मरीज आए और विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा उनके सफलतापूर्वक इलाज से उन्हें जीवनदान मिला। इस कार्यक्रम में उपस्थित अधिकांश मरीजों को गंभीर रूप से दिल के दौरे पड़े थे और उनकी धमनियों में 100 प्रतिशत ब्लॉकेज था।"
इस कार्यक्रम में कश्मीर से लेकर केरल तक के 55 से 85 वर्ष की आयु के मरीजों ने बत्रा हार्ट एंड मल्टीस्पेशलिटी हास्पिटल, फरीदाबाद में नया जीवन पाने के अपने अनुभवों को साझा किया।
दिल्ली के अधेड़ आयु के एक मरीज डेविड ने बताया कि किन हालात में वे इस अस्पताल पहुंचे और किस तरह डॉ. पंकज की तत्परता से उनका जीवन बच पाया। उन्होंने बताया, “मुझे हृदय की समस्या थी जबकि मैं इसे पेट में गैस और जलन की समस्या समझता रहा। जब सीने में दर्द बढ़ने लगा तो मुझे बत्रा हास्पिटल लाया गया जहां डॉ. पंकज ने तुंरत मेरे मर्ज को पहचान कर समय से मेरा इलाज कर मेरा जीवन बचाया।” डेविड की पत्नी ने भी इसी बात को दोहराया और वहां मौजूद उन मरीजों की भावनाओं को अभियक्ति जिन्हें इस हास्पिटल में जीवनदान मिला।
ज्यादातर मरीजों ने छुट्टियों में भी गंभीर रूप से पीड़ित मरीजों को आपात चिकित्सा सेवाएं प्रदान करने की बत्रा हास्पिटल की प्रतिबद्धता की चर्चा करते हुए उम्मीद जताई कि यह रविवार और छुट्टियों के दिन भी खुला रहेगा।
डॉ. पंकज ने कहा, “शून्य मृत्युदर हमारी टीम के समर्पण और उनकी विशेषज्ञता का प्रमाण है। हमने आपातकालीन चिकित्सा जिसे ‘डोर बैलून टाइम’ कहते हैं और जहां मरीज की जान बचाने के लिए 30 मिनट से भी कम का समय मिलता है, में अपनी विशेषज्ञता से नए मानदंड स्थापित करते हुए इसे एक जीवनरक्षक प्रारूप बनाया है।”
मरीजों को सम्मानित करने के साथ ही अस्पताल प्रबंधन ने गहन चिकित्सा इकाई (आईसीयू) के स्टाफ, नर्सों, डॉक्टरों और मरीज के अस्पताल में भर्ती होने से पहले व उसके बाद इलाज व देखभाल में शामिल सभी कर्मचारियों को भी मेरिट प्रमाणपत्र से सम्मानित किया।
इस मौके पर बत्रा हर्ट एंड मल्टी स्पेशियलिटी हास्पिटल, फरीदाबाद के अध्यक्ष रमेश कुमार बत्रा ने डॉ. पंकज की किताब ‘प्रीवेंशन ऑफ हर्ट डिजीज’ का लोकार्पण किया।
हृदय की बीमारियों से बचाव के लिए जीवनशैली में सुधार की जरूरत की चर्चा करते हुए डॉ. पंकज ने नियमित व्यायाम, टहलने, तनावमुक्त रहने, धूम्रपान नहीं करने और ब्लड प्रेशर एवं मधुमेह पर नजर रखते हुए समय-समय पर चिकित्सा जांच कराते रहने की सलाह दी।
उन्होंने कहा, “चिकित्सा विज्ञान में तमाम अविष्कारों के बावजूद 2019 के आंकड़े बताते हैं कि हृदय संबंधी बीमारियों से दुनिया में 1.80 करोड़ लोगों की मौत हुई जिसमें 58 प्रतिशत लोग एशिया के थे। इसकी बड़ी वजह अनियमित नींद, मोबाइल का लगातार इस्तेमाल, जंक फूड और धूम्रपान है।”
बत्रा हास्पिटल हृदय दशकों से हृदय चिकित्सा के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है और देशभर के मरीजों की उम्मीदों पर खरा उतरा है।