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पाकिस्तानी पत्रकार ने फैलाया प्रोपगेंडा, सीआरपीएफ ने तुरंत दिया करारा जवाब

सीआरपीएफ ने कहा कि हमेशा की तरह हिंदुस्तान के सुरक्षा बल और सेना एकजुट होकर और सौहार्द्र के साथ काम कर रहे हैं. हमारे यूनिफॉर्म का रंग अलग हो सकता है लेकिन हमारे दिल में देशभक्ति और तिरंगा पूरी तरह से भरा हुआ है.

 Special Coverage News |  12 Aug 2019 1:28 PM GMT  |  दिल्ली

पाकिस्तानी पत्रकार ने फैलाया प्रोपगेंडा, सीआरपीएफ ने तुरंत दिया करारा जवाबPhoto : CRPF/Twitter

पाकिस्तान के एक पत्रकार ने जम्मू-कश्मीर में भारतीय सुरक्षा बलों के खिलाफ प्रोपगेंडा फैलाया और उनमें फूट डालने की नाकाम कोशिश की. इसके बाद सीआरपीएफ ने पाकिस्तानी पत्रकार के ट्वीट पर रिप्लाई करते हुए उसे निराधार और झूठ करार दिया.

दरअसल, एक पाकिस्तानी पत्रकार ने ट्वीट कर लिखा कि कश्मीर में तैनात भारतीय सुरक्षा बलों के बीच दरार पैदा हो गई है. साथ ही उसने लिखा कि एक गर्भवती महिला को सुरक्षा बलों ने कर्फ्यू पास नहीं होने के कारण अस्पताल तक नहीं जाने दिया, जिसके बाद एक मुस्लिम कश्मीरी पुलिसकर्मी ने 5 सीआरपीएफ के जवानों को मौत के घाट उतार दिया. इसके बाद सीआरपीएफ ने इसे झूठा करार देते हुए कहा कि हमारे वर्दी का रंग अलग हो सकता है लेकिन दिल एक ही है.

इसके जवाब में सीआरपीएफ ने कहा कि हमेशा की तरह हिंदुस्तान के सुरक्षा बल और सेना एकजुट होकर और सौहार्द्र के साथ काम कर रहे हैं. हमारे यूनिफॉर्म का रंग अलग हो सकता है लेकिन हमारे दिल में देशभक्ति और तिरंगा पूरी तरह से भरा हुआ है.

एक तरफ पाकिस्तानी पत्रकार और मीडिया संस्थान हिंदुस्तान के खिलाफ अनर्गल बातें फैला रहे हैं तो दूसरी ओर बौखलाहट में पाकिस्तान ने अपने देश के चैनलों को अधिसूचना जारी कर कहा है कि ऐसा कोई प्रोग्राम न चलाएं जिससे कश्मीरी के लोगों की भावनाएं आहत हों.

पाकिस्तानी मीडिया नियामक प्राधिकरण ने मीडिया संस्थानों से कहा है कि वे ईद-उल-अजहा पर पहले से रिकॉर्ड किए कार्यक्रमों या विशेष कार्यक्रमों को लाइव प्रसारित न करें, क्योंकि इससे "न केवल हमारे राष्ट्र, बल्कि कश्मीरी भाइयों की भावनाओं को भी चोट पहुंच सकती है."

नियामक प्राधिकरण ने शनिवार को जारी एक अधिसूचना में कहा, "कश्मीर के साथ एकजुटता जताने के लिए, ईद-उल-अजहा को धार्मिक पर्व के रूप में सादगी के साथ मनाया जा रहा है. इसलिए, यह अनुरोध किया जाता है कि कोई विशेष कार्यक्रम (पहले से रिकॉर्ड या नियोजित लाइव) न हो. ईद के जश्न के रूप में प्रसारित होने के कारण इससे न केवल हमारे राष्ट्र, बल्कि कश्मीरी भाइयों की भावनाओं को भी चोट पहुंच सकती है."

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