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काबुल में गुरुद्वारा पर हमले की साजिश रचने वाला आईएसकेपी चीफ मौलवी अब्दुल्ला गिरफ्तार

काबुल के शोर बाजार में हुए इस आतंकी हमले में 27 सिख महिला और पुरुषों की जान चली गई थी।

 Arun Mishra |  4 April 2020 2:59 PM GMT  |  दिल्ली

काबुल में गुरुद्वारा पर हमले की साजिश रचने वाला आईएसकेपी चीफ मौलवी अब्दुल्ला गिरफ्तार

अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में 25 मार्च को गुरुद्वारा हुए हमले के आरोप में आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट खुरासान प्रोविंस (आईएसकेपी) के चीफ मौलवी अब्दुल्ला उर्फ असलम फारूकी को अफगान सुरक्षा बलों ने विशेष अभियान के तहत गिरफ्तार किया है।

पाकिस्तानी नागरिक मौलवी अब्दुल्ला पहले प्रतिबंधित संगठन लश्कर-ए-तैयबा के साथ जुड़ा था और उसके बाद आतंकी संगठन तहरीक-ए-तालीबान से जुड़ा। इसके बाद असलम फारूकी ने अप्रैल 2019 में आईएसकेपी चीफ मौलवी जिया-उल-हक उर्फ उमर खुरासनी की जगह ली थी।

फारूकी पाकिस्तान-अफगानिस्तान के सीमाई इलाके ओरकजाई का रहने वाला मामोजई कबीले का है। काबुल और दिल्ली के काउंटर टेरर ऑपरेटिव्स के मुताबिक, हक्कानी नेटवर्क और लश्कर-ए-तैयबा के निर्देश पर मौलवी फारूकी ने तिकरीपुर के रहने वाले मोहसिन और तीन अन्य उर्दू-पंजाबी बोलने वाले लोगों का इस हमले में इस्तेमाल में किया था। काबुल के शोर बाजार में हुए इस आतंकी हमले में 27 सिख महिला और पुरुषों की जान चली गई थी। मुहसिन हमले में मारा गया और केरल में उसकी मौत के बारे में उसकी मां को भी इत्तिला दे दी गई थी।

मौलवी से अब अफगान नेशनल डायरेक्ट्रेट ऑफ सिक्योरिटी इस बात की पड़ताल करेगा कि आखिर किसने निर्दोष सिखों को मौत के घाट उतारने का आदेश दिया था और इस आंतकी घटना में पाकिस्तान की क्या भूमिका थी। पाकिस्तान अन्य उन आतंकी संगठनों के नाम का भी खुलासा कर सकता है जो नांगरहार, नूरिस्तान, कुनार, काबुल और कंधार इलाके में सक्रिय हैं।

काबुल हमले की जांच करेगी एनआईए

अफगानिस्तान की राजधानी काबुल के एक गुरुद्वारा पर 25 मार्च को हुए आतंकी हमले की राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) जांच करेगी। एनआईए ने बीते गुरुवार को इस हमले को लेकर केस दर्ज किया है। नरेन्द्र मोदी की सरकार ने पिछले साल एनआईए एक्ट मे संशोधन कर आतंकवाद से संबंधित मामले जो देश या फिर देश के हित से जुड़े विदेशों में हुए हों, उन्हें जांच करने का अधिकार दिया था। इसके साथ ही, साइबर क्राइम और मानव तस्करी की जांच का भी एनआई को अधिकार दिया गया। यह संशोधन 2 अगस्त 2019 को अमल में आ गया था।

इस हमले की जिम्मेदारी इस्लामिक स्टेट (इस्लामिक स्टेट खोरसन प्रोविन्स) से जुड़े संगठन ने ली थी। अफगान के राष्ट्रपति अशरफ गनी ने हमले की निंदा करते हुए कहा कि धार्मिक स्थलों पर हमले से दुश्मनों की कमजोरी का पता चलता है, धार्मिक स्थलों को निशाना नहीं बनाना चाहिए।

काबुल हमले के बाद सिख परिवारों ने पीड़ितों के अवशेषों का अंतिम संस्कार किया और सरकार से हमलों की जांच करने का आग्रह किया। कुछ सिख नागरिकों ने कहा कि वे अफगानिस्तान में रहने से थक गए हैं। मारे गए एक व्यक्ति के परिवार के सदस्य अंधार सिंह ने कहा कि कौन सी धार्मिक पुस्तक आपको मस्जिद या धर्मशाला पर हमला करने के लिए कहती है। वह किस धर्म में होता है?

शुरुआती जांच में पता चला था कि काबुल हमले का एक हमलावर मोहसिन उर्फ अबु खालिद अल-हिंदी केरल के कासरगौड जिले रहनेवाला है और उसने छह साल पहले भारत छोड़ जेहाद को ज्वाइन कर लिया था। अन्य ऐसे लोग जिन्होंने इस्लामिक स्टेट ज्वाइन करने के लिए केरल छोड़ा है वे सभी भी जांच के दायरे में हैं।

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