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अमेरिका में सत्ता हस्तांतरण रोकने के लिए दंगा-फसाद लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए अच्छा संकेत नहीं!

अमेरिका में सत्ता हस्तांतरण रोकने के लिए दंगा-फसाद लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए अच्छा संकेत नहीं!
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जब कोई देश के संविधान में विश्वास ना करने वाला कट्टरवादी विचारधारा का कुर्सी का लालची व्यक्ति किसी देश की सत्ता की कुर्सी पर काबिज हो जाता है, तो ऐसा व्यक्ति अपनी कुर्सी बचाने के लिए आम जनमानस की लाशें बिछाने से भी पीछे नही हटता है, हाल में अमेरिका घटित घटना इसका उदाहरण है। यह घटना दर्शाती है कि हर हाल में सत्ता हासिल करने की घातक भूख आदमी को किस हद तक गिराकर पागल, अहंकारी व बुद्धिहीन बना सकती है। हाल ही में अमेरिका के मौजूदा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के समर्थकों के द्वारा वॉशिंगटन डीसी में घटित घटना इसका पूरी दुनिया के सामने सबसे भयानक सटीक उदाहरण बन गयी है। ट्रंप व उनके समर्थकों की करतूतों की वजह से अमेरिकी लोकतांत्रिक व्यवस्था के इतिहास में वर्ष 2021 की 6 जनवरी का दिन हमेशा एक काले अध्याय के रूप में दर्ज हो गया है, जिस जख्म को सदियों तक भूलना असंभव है। जिस तरह से मौजूदा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उकसावे पर उनके कुछ देशद्रोही उद्दंड समर्थकों ने लोकतांत्रिक व्यवस्था को बंधक बनाने का दुस्साहस किया, वह अमेरिका के साथ-साथ किसी भी देश में अक्षम्य अपराध है। इस घटना के लिए 20 जनवरी को राष्ट्रपति पद से हटने के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ बहुत बड़ी कार्यवाही भी हो सकती है, लोगों को अंदेशा है कि वो अपने आपराधिक कृत्य की सजा से बचने के लिए अमेरिका से बाहर जाकर किसी अन्य देश में भी शरण ले सकते हैं। आज की हालात में घटित इस घटनाक्रम की स्थिति का गंभीरता से अध्ययन करके हम यह भी कह सकते है कि यह एक तरह से राष्ट्रपति चुनावों में हार चुके मौजूदा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पक्ष में उनके देशद्रोही समर्थकों का अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडन की सत्ता का तख्तापलट करने का दुस्साहसिक षडयंत्र था, जिसको रोकने में सुरक्षाकर्मियों की जवाबी कार्यवाही में चार लोगों की जान तक चली गयी है। सम्पूर्ण घटनाक्रम पर नजर डाले तो वॉशिंगटन डीसी स्थित यूएस कैपिटल में ताकतवर अमेरिकी कांग्रेस के लोग बैठते हैं, यहां पर अमेरिका के नियमानुसार 6 जनवरी को अमेरिकी कांग्रेस में जो बाइडन को पिछले साल तीन नवंबर को हुए चुनाव में मिली जीत की पुष्टि के लिए सत्र चल रहा था, जिसमें सदन को जो बाइडन की जीत की ओपचारिक घोषणा करनी थी। क्योंकि अमेरिकी कांग्रेस अमेरिका की फेडरल सरकार का द्विसदन है, इसमें हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और सीनेट की शक्ति निहित होती हैं, इसलिए नवनिर्वाचित राष्ट्रपति की इसके द्वारा घोषणा होती है।

हालांकि सदन की यह घोषणा महज़ एक औपचारिकता मात्र होती है, लेकिन इस दौरान वहां उपस्थित रिपब्लिकन सांसदों ने कुछ चुनावी नतीजों पर सवाल उठाए थे और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार खुद उपराष्ट्रपति माइक पेंस पर गलत ढंग से दबाव डाल रहे थे कि वो नवनिर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडन को उनकी जीत का प्रमाणपत्र ना दें। ऐसे में इस सदन की यह औपचारिकता पूर्ण कार्यवाही भी बहुत अधिक अहम हो गई थी, इसलिए इस कार्यवाही को बाधित करने के उद्देश्य से वहां पर डोनाल्ड ट्रंप के दंगाई देशद्रोही समर्थकों ने अमेरिकी संसद के भीतर घुसकर स्पीकर की कुर्सी पर कब्जा कर लिया है और स्पीकर की चेयर से एक दंगाई ने डोनाल्ड ट्रंप की जीत तक का ऐलान करने का असंवैधानिक कार्य करने का दुस्साहस कर दिया, विश्व के अन्य देशों को आयेदिन लोकतंत्र का पाठ पढ़ाने वाले अमेरिका की खुद की संसद के भीतर उसके राष्ट्रपति ट्रंप के कारनामों की वजह से फायरिंग की शर्मनाक घटना तक घटित हुई। ट्रंप समर्थकों के द्वारा यह घटना एक अविश्वसनीय तख्तापलट की कोशिश है, जिसको अंजाम देने के लिए ट्रंप ने यह सब कांड करवा दिया, उन्होंने लोकतंत्र के मंदिर में जमकर बवाल काट कर लोकतंत्र को घायल करने का कार्य किया है। हालांकि अमेरिका ने अपने लोकतंत्र को बचा लिया और अमेरिकी संसद ने ट्रंप समर्थकों की तख्तापलट की कोशिश को भी सफलतापूर्वक नाकाम करके जो बाइडेन को संसद ने आधिकारिक रूप से राष्ट्रपति पद के लिए निर्वाचित घोषित कर दिया है। लेकिन अभी 20 जनवरी तक अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जब तक अपने पद पर आसीन है, तब तक उनके खुराफाती दिमाग पर लगाम लगाये रखना वहां के नीतिनिर्माताओं के लिए बहुत बड़ी चुनौती है, उसके बाद ही पता चलेगा की कि अमेरिका में लोकतंत्र की जीत होती है या तानशाही सोच की जीत होती है और डोनाल्ड ट्रंप का भविष्य में क्या होता है।

।। जय हिन्द जय भारत ।।

।। मेरा भारत मेरी शान मेरी पहचान ।।लेखक स्वतंत्र पत्रकार, स्तंभकार व रचनाकार है

दीपक त्यागी
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