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कोरोना फैलने की नई स्टडी से बड़ा खुलासा, अब बात करने से भी फैल सकता है कोरोनावायरस

एक औसत मरीज के मुंह से निकले तरल में कोरोनावायरस जेनेटिक मटेरियल की गणना करने वाली स्टडी से मिली जानकारी के आधार पर शोधकर्ताओं ने बाताया कि, एक मिनट तक तेज बोलने पर करीब एक हजार वायरस युक्त बूंदें बन सकती हैं।

 Shiv Kumar Mishra |  20 May 2020 8:06 AM GMT  |  दिल्ली

कोरोना फैलने की नई स्टडी से बड़ा खुलासा, अब बात करने से भी फैल सकता है कोरोनावायरस
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कोरोनावायरस बेहद संक्रामक है। कोई भी स्वस्थ्य व्यक्ति किसी दूसरे संक्रमित व्यक्ति के नजदीक भर जाने से ही बीमार हो सकता है। ऐसे में एक और नई खोज हमें डरा सकती है। हाल ही में हुई एक स्टडी में पता चलता है कि कुछ हालातों में बीमार व्यक्ति के साथ बात करने पर भी आप कोविड 19 का शिकार हो सकते हैं। फिर भले ही मरीज बेहद मामूली लक्षणों का सामना क्यों न कर रहा हो। स्टडी में पता चला है कि खांसने या छींकने के अलावा बात करने से भी हजारों वायरल बूंदे निकल सकती हैं।

द प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज में प्रकाशित एक शोध की मदद से हम यह जान सकते हैं कि कम लक्षणों से ग्रस्त मरीज भी ऑफिस, नर्सिंग होम जैसी छोटी जगहों पर दूसरों तक संक्रमण पहुंचा सकता है। इस स्टडी को अभी वास्तविक हालातों में किया जाना होगा। हालांकि डॉक्टर्स को अभी भी यह पता नहीं चल सका है कि किसी को संक्रमित करने के लिए कितने वायरस की जरूरत पड़ती है। लेकिन इससे यह साफ होता है कि मास्क के उपयोग से बीमार होने की संभावनाएं कम हो जाती हैं।

एक खांसी में निकलती हैं 3 हजार सांस की बूंदें, जबकि छींकने से 40 हजार बूंदें

प्रयोगों से पता चला है कि खांसने या छींकने से कैसे हवा में सलाइवा और म्यूकस मिल जाते हैं। जिससे लाखों इन्फ्लूएंजा और दूसरे वायरस कण बनते हैं। एक खांसी से करीब 3 हजार रेस्पिरेट्री ड्रॉपलेट्स बनती हैं, जबकि छींकने से लगभग 40 हजार।

बातचीत के दौरान कितनी बूंदें निकलती हैं, इस बात का पता करे के लिए वैज्ञानिकों ने वॉलंटियर्स से बार बार 'स्टे हेल्दी' बोलने के लिए कहा। सभी सहयोगियों ने एक कार्डबोर्ड बॉक्स में इन शब्दों को बोला, जिसके बाद वैज्ञानिकों ने ग्रीन लेजर की मदद से बूंदों को ट्रेक किया।

एक मिनट तक तेज बोलने पर करीब एक हजार वायरस युक्त बूंदें बन सकती हैं

लेजर स्कैन से पता चला कि बातचीत के वक्त हर सेकंड में 2600 छोटी बूंदें निकलती हैं। वैज्ञानिकों ने पुरानी स्टडीज के आधार पर जब इन बूंदों की संख्या और आकार का अनुमान लगाया तो पाया कि तेज बोलने से बड़े कण बनते हैं और इनकी संख्या भी ज्यादा होती है। हालांकि साइंटिस्ट ने मरीजों के बोलने पर निकलने वाली बूंदों को रिकॉर्ड नहीं किया है।

एक औसत मरीज के मुंह से निकले तरल में कोरोनावायरस जेनेटिक मटेरियल की गणना करने वाली स्टडी से मिली जानकारी के आधार पर शोधकर्ताओं ने बाताया कि, एक मिनट तक तेज बोलने पर करीब एक हजार वायरस युक्त बूंदें बन सकती हैं।

वैज्ञानिकों ने पाया कि मुंह से निकलने के बाद डिहाइड्रेशन के कारण बूंदें छोटी हो सकती हैं। इसके बावजूद यह बूंदें हवा में 8 से 14 मिनट तक तैर सकती हैं। स्टडी के मुताबिक इससे यह बात साफ होती है कि, एक बंद माहौल में बात करने से वायरस फैलने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। शोधकर्ताओं ने बताया है कि प्रयोग एक नियंत्रित माहौल में रुकी हुई हवा के बीच किया गया था।

6 फीट से ज्यादा दूरी तक भी जा सकती हैं बूंदें

सेंटर्स फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन ने कहा है कि सांसों की बूंदों से बचने के लिए कम से कम 6 फीट की दूरी रखें। लेकिन कई वैज्ञानिकों ने तर्क दिए हैं कि यह कण 6 फीट से ज्यादा का सफर भी तय कर सकते हैं। यह मुंह से निकलने की ताकत, आसपास के तापमान और दूसरी स्थितियों पर निर्भर करती हैं। एक अन्य स्टडी में शोधकर्ताओं ने बताया कि, कुछ निश्चित आवाजें ज्यादा कण बना सकती हैं। इनमें 'थ' जैसे शब्द शामिल हैं।

फेस टू फेस बात करने से बचें

फिलहाल शोधकर्ताओं को यह नहीं पता कि हर बात, खांसी और छींक में ये बूंदें होती हैं या नहीं, जिनमें वायरस के कण बराबर संख्या में शामिल होते हैं। या किसी को बीमार करने के लिए कितने वायरस की जरूरत होती है। वर्जीनिया टेक में सिविल और एनवायरमेंटल इंजीनियरिंग की प्रोफेसर लिन्से मार बताती हैं कि नई स्टडी ने इस दूरी बनाए रखने के मामले में नई चीजें शामिल की हैं कि वायरस की रोकथाम के लिए लोगों से शारीरिक दूरी बनाए रखना जरूरी है। डॉक्टर मार ने कहा कि इस सबूत के आधार पर बंद जगह में नजदीक जाकर लोगों से फेस टू फेस बात करन से बचना होगा।

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