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25 मार्च को भाजपा का मुख्यमंत्री शपथ लेगा, रेस में सबसे आगे इस नेता का नाम, फैसला विधायक दल की बैठक में होगा

मध्यप्रदेश में रेस में शिवराज सिंह से आगे केंद्रीय मंत्री नरेंद्र तोमर का नाम चल रहा है. उनसे गृहमंत्री अमित शाह और मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अलग अलग बात की.

 Shiv Kumar Mishra |  22 March 2020 2:02 AM GMT  |  भोपाल

25 मार्च को भाजपा का मुख्यमंत्री शपथ लेगा, रेस में सबसे आगे इस नेता का नाम, फैसला विधायक दल की बैठक में होगा

मध्यप्रदेश के कांग्रेस नीति मुख्यमंत्री कमलनाथ के इस्तीफे के बाद मध्यप्रदेश में भाजपा की सरकार बनना तय हो गया है। भाजपा की ओर से शपथ ग्रहण के लिए 25 मार्च की तारीख तय की गई है। इससे पहले 23 को विधायक दल की बैठक होनी है और इसी में मुख्यमंत्री का नाम फाइनल होगा। अब तक शिवराज सिंह चौहान का नाम ही सीएम पद के लिए चर्चा में था। लेकिन, सूत्रों का कहना है कि अब नरेंद्र सिंह तोमर का नाम इस पद के लिए सबसे आगे है। हालांकि, मुख्यमंत्री के नाम पर फैसला विधायक दल की बैठक में किया जाएगा।

राज्यपाल से मिले भाजपा नेता

भाजपा के नेता शनिवार को गोपाल भार्गव के नेतृत्व में राज्यपाल से मिलने राजभवन पहुंचे। बताया गया है- यह मुलाकात राज्य में नई सरकार बनाने की कवायद है। इधर, भाजपा विधायक नरोत्तम मिश्रा ने दावा किया है कि दो दिन में एमपी में भाजपा की सरकार बन जाएगी।

अमित शाह ने तोमर को अलग बुलाकर बात की

पार्टी सूत्रों की मानें तो मुख्यमंत्री पद की दौड़ में शिवराज, केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर सबसे आगे हैं। फिर नरोत्तम मिश्रा के नाम की चर्चा है। हालांकि, अब तोमर का ही नाम सबसे आगे चल रहा है, क्योंकि दिल्ली में गृह मंत्री अमित शाह ने तोमर से अलग से बात की है। धर्मेंद्र प्रधान से भी दोनों की बात हुई। माना जा रहा है कि शिवराज-तोमर में से ही एक नाम को पार्टी आलाकमान प्राथमिकता दे सकती है। नरोत्तम को सरकार में पावरफुल दर्जा मिलेगा।

इससे पहले 17 दिन चली सियासी हलचल के बीच शुक्रवार को कमलनाथ ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे दे दिया था। वे शुक्रवार दोपहर 12.30 बजे मीडिया के सामने आए। करीब 25 मिनट बोले। 15 महीने पुरानी अपनी सरकार की 20 उपलब्धियां गिनाईं और 16 बार कहा कि भाजपा को हमारे काम रास नहीं आए।

उन्होंने कहा था कि भाजपा सोचती है कि वह मेरे प्रदेश को हराकर जीत सकती है। वह न मेरे प्रदेश को हरा सकती है और न मेरे हौसले को हरा सकती है। उनके इस्तीफे के बाद शिवराज सिंह चौहान ने इसे सत्य की जीत बताया था। वहीं सिंधिया ने ट्वीट करते हुए कहा था कि यह जनता की जीत है।

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