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बंद कमरे में तय थी मुलाकात, बीच सड़क गले मिले, लेकिन फिर 'महाराजा' सिंधिया और 'राजा' दिग्गी चलते बने

ज्योतिरादित्य सिंधिया और दिग्विजय सिंह गर्मजोशी से मिले, तस्वीरें खिंचाई और फिर अलग-अलग चल पड़े. करीब 6 साल बाद गुना में दोनों दिग्गजों की मुलाकात में एकांत चर्चा होने वाली थी, जो एक बार फिर रहस्य बनकर रह गई.

 Shiv Kumar Mishra |  24 Feb 2020 1:13 PM GMT  |  अशोकनगर

बंद कमरे में तय थी मुलाकात, बीच सड़क गले मिले, लेकिन फिर महाराजा सिंधिया और राजा दिग्गी चलते बने
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गुना/भोपाल (संदीप भम्मरकर): मध्य प्रदेश के सियासी गलियारों में इस बात की चर्चा तीन दिन से चल रही है कि आखिर ग्वालियर महाराजा ज्योतिरादित्य सिंधिया और राघौगढ़ के राजा दिग्विजय सिंह की मुलाकात में क्या होगा? एक बार मुलाकात टल चुकी थी, दूसरी दफा गुना के सर्किट हाउस में 24 फरवरी को मुलाकात तय की गई थी. लेकिन जब इस तारीख पर भी मुलाकात नहीं हो पाने के आसार बने तो दोनों गुना और अशोक नगर के बीच आरोन शहर में सड़क पर मिले.

सिंधिया और दिग्विजय गर्मजोशी से मिले, तस्वीरें खिंचाई और ​चल दिए

ज्योतिरादित्य सिंधिया और दिग्विजय सिंह गर्मजोशी से मिले, तस्वीरें खिंचाई और फिर अलग-अलग चल पड़े. करीब 6 साल बाद गुना में दोनों दिग्गजों की मुलाकात में एकांत चर्चा होने वाली थी, जो एक बार फिर रहस्य बनकर रह गई. राजनीति के धुरंधर और कांग्रेस में ही विपरीत ध्रुवों के नेता कहे जाने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया और दिग्विजय सिंह के बीच सियासी तल्खी नई नहीं है. कांग्रेस की गुटीय राजनीति में परस्पर विरोध की ये परंपरा अर्जुन सिंह और माधवराव सिंधिया के जमाने से ही निभायी जा रही है.

तब दिग्गी अर्जुन सिंह कैंप के सिपहसालार थे और अब ज्योतिरादित्य अपने पिता की राजनैतिक विरासत को निभाकर उनके गुट का झंडा बुलंद कर रहे हैं. माधवराव सिंधिया ने जब ग्वालियर छोड़कर गुना को अपना संसदीय क्षेत्र बनाया तभी से दिग्गी और सिंधिया गुट के कार्यकर्ताओं के बीच तल्खियां बढ़ गईं. लेकिन ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपने पिता की परंपरागत सीट गुना से चुनाव लड़ा तो ये परंपरा निभाई जाती रही. लेकिन पिछले कई सालों से दिग्विजय सिंह ने गुना और अशोक नगर जिले की राजनीति में ज्यादा दखल देना बंद कर दिया था.

दिग्विजय बोले बिना किसी एजेंडा के दोनों स्वाभाविक मुलाकात कर रहे हैं

बीते 17 वर्षों के दौरान दिग्विजय सिंह अशोक नगर में पहुंचे भी नहीं. कांग्रेस के कार्यक्रमों में दोनों नेता साथ जरूर नजर आते हों, और एक दूसरे को पूरा सम्मान दिखाते हों, लेकिन कांग्रेस के अंदर अपना अलग वजूद बनाए रखते हैं. अशोक नगर पहुंचने पर दिग्विजय सिंह से मीडिया ने मुलाकात की वजह पूछी तो उन्होंने जवाब दिया कि एक ही शहर में रहने के बाद नहीं मिलते तो बातें की जातीं. लोग इसे आपसी दूरियों से जोड़कर देखते. लेकिन बिना किसी एजेंडा के दोनों स्वाभाविक मुलाकात कर रहे हैं.

दोनों ने गुना-अशोक नगर सड़क पर गुजरते हुए एक दूसरे से मुलाकात की

आखिरकार दोनों की गुना के ​सर्किट हाउस में तय मुलाकात नहीं हो पाई. दोनों ने गुना-अशोक नगर सड़क पर गुजरते हुए मुलाकात की. इन दोनों की मुलाकात पर सियासी वार खूब किए गए. पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि राजा और महाराजा दरबार लगाते हैं, कांग्रेस में सर्कस हो रहा है और सभी नेता कांग्रेस को अलग-अलग दिशा में खींच रहे हैं. पूर्व मंत्री और भाजपा नेता विश्वास सारंग ने कहा कि दोनों की मुलाकात तय होने के बावजूद सड़क पर मिलने से जाहिर है कि दाल में कुछ काला है. उधर, कांग्रेस सरकार के जनसंपर्क मंत्री पीसी शर्मा ने कहा कि मुलाकात से दोनों के दिल मिले हैं.

दोनों के बीच एक रिश्ता कायम है, जिसे दोनों पर्दे के पीछे बखूबी निभाते हैं

राजनीतिक तजुर्बे में दिग्विजय सिंह भले ही ज्योतिरादित्य से कई दर्जे सीनियर हैं. लेकिन रजवाड़ों के मुताबिक दोनों के बीच एक रिश्ता कायम है, जिसे दोनों पर्दे के पीछे बखूबी निभाते हैं. दरअसल, जिस राघौगढ़ के दिग्विजय सिंह राजा हैं वह ग्वालियर रियासत में आती है. ज्योतिरादित्य सिंधिया इस रियासत के महाराज हैं. दिग्विजय सिंह गाहे-बगाहे उन्हें यह सम्मान देते हैं. सिंधिया भी सार्वजनिक मंच पर महाराज का रुतबा रखने की बजाय पूरे सम्मान के साथ दिग्विजय सिंह को संबोधन देते हैं.

एक दूसरे को माला पहनाने के लिए लालायित नजर आए दिग्गी और सिंधिया

सड़क पर हुई दोनों की मुलाकात में गर्मजोशी ये संदेश बयां करती है. दोनों एक दूसरे को फूलों का हार पहले पहनाने को लालायित नजर आए. दोनों ने एक ही साथ एक दूसरे के गले में माला डाली भी. फिर एक दसरे के गले मिलकर खिलखिलाते हुए वहां मौजूद लोगों से मुखातिब हुए. चंद मिनट की इस मुलाकात के बाद दोनों अपने गंतव्य की ओर रवाना हो गए. दिग्गी इंदौर चले गए और सिंधिया अशोक नगर की तरफ.

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