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आज ही के दिन बीस साल पहले चुनाव आयोग ने बाल ठाकरे पर की थी बड़ी कार्रवाई, नहीं जानते है आप?

सामना में बाल ठाकरे ने अपनी जिंदगी के आखिरी समय तक लिखना जारी रखा.

 Special Coverage News |  28 July 2019 4:16 PM GMT  |  मुंबई

आज ही के दिन बीस साल पहले चुनाव आयोग  ने बाल ठाकरे पर की थी बड़ी कार्रवाई, नहीं जानते है आप?
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आज से ठीक 20 साल पहले नफरत और डर की राजनीति करने की वजह से चुनाव आयोग ने बाल ठाकरे के वोट डालने और चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगा दिया था. चुनाव आयोग ने 28 जुलाई 1999 को बाला साहेब ठाकरे पर 6 साल के लिए वोट डालने और चुनाव लड़ने पर बैन लगा दिया था. हालांकि आगे चलकर 2005 में इस बैन को खत्म कर दिया गया. बैन के खत्म होने के बाद बाल ठाकरे ने पहली दफे 2006 में बीएमसी के चुनाव में वोट डाला था.

मुसलमानों पर दिए बयान और विवाद

80 के दशक में बाल ठाकरे ने कई विवादित बयान दिए थे, इनमें से सबसे ज्यादा बवाल मचा था देश के मुसलमानों पर दिए उनके बयान पर. उन्होंने कहा, 'मुसलमान कैंसर की तरह फैल रहे हैं और उनका इलाज भी कैंसर की तरह ही होना चाहिए. देश को मुसलमानों से आजाद कराने की जरूरत है और पुलिस को हिंदुओं की ऐसे ही मदद करनी चाहिए जैसे पंजाब में पुलिस ने खालिस्तानियों की मदद की थी.' 1992 में विवादित बाबरी ढांचा तोड़ने के बाद बाल ठाकरे के कहने पर शिवसैनिकों ने खुले आम उत्पात मचाया था. बाल ठाकरे पर भावनाएं भड़काने का मामला दर्ज किया गया. 1993 में उन्होंने कहा कि अगर मुझे गिरफ्तार किया गया तो पूरा देश मेरे समर्थन में उठ खड़ा होगा.

1993 दंगों पर बाल ठाकरे

अपने समर्थकों से बाल ठाकरे ने कहा था कि अगर मेरी वजह से देश में युद्ध होता है तो इसे होने दिया जाए. 1993 दंगों के दौरान मुसलमानों पर हमले करने के लिए लोगों को उकसाने के मामले में बल ठाकरे को 25 जुलाई 2000 को गिरफ्तार किया गया. उस समय भी पूरी मुंबई ठहर सी गई थी. साल 1998 में दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि हमें मुसलमानों को भी अपना ही हिस्सा मानना चाहिए. लेकिन 2008 में एक बार फिर से उनका नजरिया बदल गया. उन्होंने कहा कि मुस्लिम आतंकवाद तेजी से बढ़ रहा है और इससे निपटने के लिए हिंदुओं को भी हथियार उठाने चाहिए.

बाल ठाकरे की शुरुआी जिंदगी

बालासाहेब केशव ठाकरे का जन्म 23 जनवरी 1926 को महाराष्ट्र के पुणे जिले में हुआ था. उनके समर्थकों ने उन्हें बाला साहब का नाम दिया था. उनके पिता केशव सीताराम ठाकरे वे एक प्रगतिशील सामाजिक कार्यकर्ता और लेखक थे, जो जातिप्रथा के धुर विरोधी थे. उन्होंने महाराष्ट्र में मराठी भाषी लोगों को संगठित करने के लिए संयुक्त मराठी चालवाल आन्दोलन में प्रमुख भूमिका निभाई और मुम्बई को महाराष्ट्र की राजधानी बनाने में 1950 के दशक में काफी काम किया. बालासाहेब का विवाह मीना ठाकरे से हुआ. उनसे उनके तीन बेटे हुए- बिन्दुमाधव, जयदेव और उद्धव ठाकरे.





बाला साहेब ठाकरे की जिंदगी पर बनी फिल्म 'ठाकरे' 25 जनवरी को रिलीज हुई थी

बाल ठाकरे ने फ्री प्रेस जर्नल, मुंबई में एक कार्टूनिस्ट के रूप में अपने करियर की शुरुआत की, और वहां उनकी पहचान एक बड़े कार्टूनिस्ट के रूप के रूप में हुई. उनके कार्टून रविवार के दिन टाइम्स ऑफ इंडिया में छपते थे. साल 1960 में महाराष्ट्र में गुजराती और दक्षिण भारतीय लोगों की तादाद बढ़ने का विरोध करने के लिए बाल ठाकरे ने अपने भाई के साथ मिलकर साप्ताहिक पत्रिका 'मार्मिक' की शुरुआत की.

अपनी राजनीतिक पार्टी शिवसेना का गठन

साल 1966 में बाल ठाकरे ने अपनी राजनीतिक पार्टी शिवसेना का गठन किया, जिसका लक्ष्य मराठियों के हितों की रक्षा करना, उन्हें नौकरियां उपलब्ध करवाना और आवास की सुविधा मुहैया करवाना था. साल 1989 से शिवसेना और बाल ठाकरे के विचारों को जनता तक पहुंचाने के लिए समाचार पत्र 'सामना' को भी प्रकाशित किया जाने लगा. सामना में बाल ठाकरे ने अपनी जिंदगी के आखिरी समय तक लिखना जारी रखा.

पाकिस्तान के खिलाफ उनके बयान

बाल ठाकरे न केवल पाकिस्तान के खिलाफ बोलते रहे बल्कि पाकिस्तान से जुड़ी हर चीज का उन्होंने विरोध किया. 1991 में वानखेड़े और 1999 में फिरोजशाह कोटला की पिच शिवसेना के लोगों ने खोद दी थी. क्योंकि वहां भारत-पाकिस्तान का मैच होनेवाला था. शिवसेना के कार्यकर्ताओं के द्वारा 1999 में BCCI के ऑफिस में तोड़-फोड़ भी की गई. 2011 के क्रिकेट वर्ल्ड कप में जब पाकिस्तान की टीम सेमीफाइनल में पहुंची तो शिवसेना ने चेतावनी दी कि अगर पाकिस्तान फाइनल में पहुंचा तो उसे मुंबई में नहीं खेलने दिया जाएगा. यही नहीं दिसंबर 2012 में पाकिस्तान और भारत के बीच भारत में होने जा रही टेस्ट सीरीज का भी बाल ठाकरे और शिवसेना ने खुलकर विरोध किया. शिवसैनिकों के नाम एक संदेश में बाला साहेब ने कहा कि पाकिस्तान को भारत में खेलने से रोका जाए.

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