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महाराष्ट्र में कांग्रेस 2 सीट पर अड़ी रही तो उद्धव ठाकरे का निर्विरोध MLC बनना मुश्किल

ऐसे में कांग्रेस का तर्क है कि विधान परिषद में अगर गठबंधन मिलकर लड़ता है तो छठी सीट भी हम जीत सकते हैं. हालांकि, ऐसे में सीएम उद्धव ठाकरे के निर्विरोध नहीं चुने जाएंगे.

 Shiv Kumar Mishra |  8 May 2020 1:15 PM GMT  |  मुंबई

महाराष्ट्र में कांग्रेस 2 सीट पर अड़ी रही तो उद्धव ठाकरे का निर्विरोध MLC बनना मुश्किल
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महाराष्ट्र में 9 विधान परिषद सीटों पर 21 मई होने वाले चुनाव को लेकर सियासी बिसात बिछाई जाने लगी है. कांग्रेस ने दो विधान परिषद सीटों पर चुनाव लड़ने का दावा करके महाविकास आघाडी में शामिल शिवसेना और एनसीपी के लिए सिरदर्द बढ़ा दिया है. बीजेपी ने चार सीटों पर शुक्रवार को अपने प्रत्याशी घोषित कर दिए हैं. ऐसे में अगर कांग्रेस दो सीटों पर अड़ी रही तो उद्धव ठाकरे के निर्विरोध चुने जाने के अरमानों पर पानी फिर जाएगा.

महाविकास आघाडी में शामिल शिवसेना ने अपने दो कैंडिडेट घोषित कर दिए हैं और एनसीपी भी दो सीटों पर लड़ने की तैयारी में है, जबकि कांग्रेस को सिर्फ एक सीट दी जा रही है. कांग्रेस नेता बालासाहेब थोराट ने साफ कर दिया है कि कांग्रेस एक सीट पर राजी नहीं है. ऐसे में अगर महाविकास के तीनों दल दो-दो प्रत्याशी उतारते हैं तो 6 प्रत्याशी हो जाएंगे और बीजेपी ने चार अपने घोषित कर दिए हैं. इस तरह 9 सीटों के लिए 10 प्रत्याशी मैदान में होंगे.

बीजेपी ने विधान परिषद के लिए प्रवीण ददके, गोपीचंद पडलकर, अजित गोपछड़े और रणजीत सिंह पाटिल को प्रत्याशी बनाया है. शिवसेना की ओर से उद्धव ठाकरे और नीलम गोरे उम्मीदवार बनाए गए हैं. एनसीपी ने अपने पत्ते नहीं खोले हैं, लेकिन कांग्रेस दो सीटों को लेकर अड़ी हुई है. कांग्रेस के अध्यक्ष बालासाहेब थोरात दो सीटों को लेकर महाविकास आघाडी के नेताओं से बातचीत कर रहे हैं.

कांग्रेस की मानें तो राज्यसभा चुनाव के वक्त एनसीपी को एक सीट ज्यादा मिली थी, तब तय हुआ था कि विधान परिषद में कांग्रेस को एक सीट ज्यादा मिलेगी. ऐसे में कांग्रेस का तर्क है कि विधान परिषद में अगर गठबंधन मिलकर लड़ता है तो छठी सीट भी हम जीत सकते हैं. हालांकि, ऐसे में सीएम उद्धव ठाकरे के निर्विरोध नहीं चुने जाएंगे.

एनसीपी में भी कई नेताओं के नाम विधान परिषद की उम्मीदवारी के लिए चर्चा में है. इनमें एनसीपी महिला इकाई के अध्यक्ष रुपाली चाकणकर का नाम है और विधान परिषद से हाल ही में सेवानिवृत्त हुए हेमंत टकले के नाम प्रमुख रूप से शामिल हैं. रुपाली चाकणकर सुप्रिया सुले की करीबी हैं तो हेमंत शरद पवार के काफी पुराने और विश्वसनीय सहयोगी हैं. महाविकास आघाडी की तीसरी सहयोगी पार्टी कांग्रेस अपने दो उम्मीदवार उतारने की जिद पर अड़ी हुई है. ऐसे में कांग्रेस से सचिन सावंत, पूर्व मंत्री नसीम खान, चंद्रकांत हंडोरे, सुरेश शेट्टी और रजनी पटेल के नाम को लेकर चर्चा चल रही है.

विधान परिषद के लिए अगर 10 प्रत्याशी मैदान में उतरते हैं तो मतदान होना लाजमी है. एमएलसी का चुनाव गुप्त मतदान से होता है, ऐसे में क्रॉस वोटिंग की संभावना ज्यादा रहती है. सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही क्रॉस वोटिंग का खतरा मोल नहीं लेना चाहेंगे. इसीलिए जहां तक संभव होगा मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और एनसीपी प्रमुख शरद पवार इस चुनाव को निर्विरोध संपन्न कराने की रणनीति अख्तियार करेंगे. यह तभी हो पाएगा जब कांग्रेस और एनएसपी में से कोई एक पार्टी एक सीट पर लड़ने को राजी हो जाए.

दरअसल महाराष्ट्र के कुल 288 सदस्यीय विधानसभा में सत्ताधारी महाविकास अघाडी को 170 विधायकों का समर्थन हासिल है. इनमें शिवसेना के 56 विधायक, एनसीपी के 54 विधायक, कांग्रेस के 44 विधायक और अन्य 16 विधायक उनके साथ हैं. वहीं, बीजेपी के पास 105 विधायक हैं जबकि 2 AIMIM और एक मनसे के विधायक हैं. इसके अलावा 10 अन्य विधायक हैं.

विधान परिषद की एक सीट के लिए करीब 29 वोटों की प्रथम वरियता के आधार पर जरूरत होगी. महाविकास आघाड़ी की 5 सीटें और बीजेपी की तीन सीटें पूरी तरह से सेफ है. हालांकि, बीजेपी की चौथी और सत्तापक्ष की छठी सीट के लिए जोड़तोड़ की आजमाइश होगी. विधायकों को आंकड़ों को लिहाज से देखें तो महाविकास आघाड़ी को महज चार अतरिक्त वोटों की जरूरत होगी. वहीं, बीजेपी को अपने विधायकों के अतरिक्त कुछ अन्य विधायकों का समर्थन हासिल है. ऐसे में दोनों की नजर निर्दलीय और छोटे दलों के विधायकों पर होगी.

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