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IPS सतीश वर्मा ने मणि के आरोपों को नकारा, कहा-पूर्व नियोजित मर्डर था इशरत जहां एनकाउंटर

 Special News Coverage |  3 March 2016 5:52 AM GMT

इशरत जहां एनकाउंटर


नई दिल्ली : इशरत जहां एनकाउंटर मामले में हर दिन नए खुलासे हो रहे हैं। इस मामले की जांच के लिए गुजरात हाईकोर्ट के ऑर्डर पर एक एसआईटी बनी थी। उस टीम में अफसर रहे सतीश वर्मा का दावा है कि इशरत एनकाउंटर में नहीं मारी गई। बल्कि उसका पूरी प्लानिंग के साथ मर्डर किया गया था।

इसके साथ ही उन्होंने गृह मंत्रालय में अंडर सेक्रेटरी रहे आरवीएस मणि के दावों को खारिज करते हुए उनके आरोपों से साफ इंकार किया। उन्होंने कहा कि यदि मैंने ऐसा कुछ किया होता तो वे मेरे खिलाफ कानूनी सहायता ले सकते थे।


बता दें कि वर्मा वही अफसर हैं जिन पर एक पूर्व सेक्रेटरी मणि ने इशरत को आतंकी न बताने का दबाव डालते हुए सिगरेट से दागने का आरोप लगाया है। वर्मा ने कहा- इशरत को आईबी ने एनकाउंटर से पहले ही उठा लिया था।

अंग्रेजी अखबार ‘इंडियन एक्सप्रेस’ को दिए इंटरव्यू में वर्मा ने कहा- ”हमारी जांच में पता लगा कि इशरत और उसके साथियों को इंटेलिजेंस ब्यूरो ने कथित एनकाउंटर के कई दिन पहले ही उठा लिया था सच्चाई ये है कि आईबी की रिपोर्ट में इस बात का जिक्र नहीं था कि आतंकियों के साथ कोई महिला भी है। इशरत के बारे में कोई इनपुट नहीं था। इन लोगों को गैरकानूनी तरीके से कस्टडी में रखा गया और बाद में मार दिया गया।

एक बेगुनाह लडक़ी के बारे में राष्ट्रवाद को सिक्युरिटी से जोडक़र तर्क दिए जा रहे हैं। इसके जरिए कुछ लोग खुद को बचाने की कोशिश कर रहे हैं। इशरत जावेद शेख के संपर्क में आने से केवल 10 दिन पहले घर से गायब हुई थी। लश्कर आतंकियों को सुसाइड बॉम्बर बनने के लिए लंबा वक्त लगता है। थ्री नॉट थ्री राइफल को ठीक से चलाने के लिए भी कम से कम 15 दिन लगते हैं। इतने वक्त तो इशरत घर से बाहर रही ही नहीं। फिर वो फिदायीन कैसे हो सकती है?

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