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मोदी को राम नहीं बोहरा खलीफा और साईं बाबा चाहिए

 शिव कुमार मिश्र |  19 Oct 2018 10:18 AM GMT  |  दिल्ली

मोदी को राम नहीं बोहरा खलीफा और साईं बाबा चाहिए

शिव कुमार मिश्रा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी साईं बाबा को खुश करने के लिए शिरडी पहुँच गए हैं. ये जब हुआ जब संघ प्रमुख सर्कार को कानून बना कर राम मंदिर निर्माण के लिए हिदायत दे चुके हैं. नरेंद्र मोदी के शिरडी जान पर हिन्दू अतिवादियों की तरफ से सवाल उठाने शुरू हो गए हैं की शिरडी हिन्दुओ के भगवन या उपास्य नहीं हैं तो फिर प्रधानमंत्री को वहां जाने की अचानक ज़रुरत क्या पड़ गयी.


हिन्दुओ के प्रमुख शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती ने तो साईं बाबा की पूजा पर कई बार सवाल उठाये और हिन्दुओ को उनकी पूजा करने से मना किया और वहां तक कहा की साईं बाबा हिन्दू थे ही नहीं बल्कि ये तो मुसलमानो में से थे. उन्होंने कहा था साईं की पूजा करना हिन्दू धर्म को बांटने की साजिश है और जो शिरडी के साईं बाबा की पूजा को बढ़ावा दे रहे हैं।वे चाहते हैं कि हिन्दू धर्म कमजोर हो। शंकराचार्य ने कहा था की लोग भारत को हिन्दू प्रधान नहीं देखना चाहते हैं। स्वरूपानंद ने कहा कि साईं बाबा के नाम पर कमाई की जा रही है और हिन्दू धर्म को बांटने के लिए विदेशी ताकतें भी हावी हैं। शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के अनुसार हिन्दू धर्म में अवतार और गुरु की पूजा होती है। हिन्दू धर्म में जो 24 अवतार हुए उनमें कलियुग में केवल बुद्ध और कल्कि का अवतार हुआ। ऐसे में साईं की पूजा का कोई मतलब नहीं है। साईं न तो अवतार हैं और न ही गुरु के रूप में हम आंक सकते हैं। साईं का मंदिर बनाना कहीं से भी सही नहीं है। मंदिर के नाम पर केवल कमाई की जा रही है। साईं को हिन्दू-मुस्लिम एकता का प्रतीक माना जाता है। लेकिन साईं की पूजा मुस्लिम कहां करते हैं? यदि मुसलमान भी पूजा करते तब हिन्दू-मुस्लिम एकता की बात समझ में आती।

शंकराचार्य के इतना बताने पर हिन्दू समुदाय मोदी जी से सवाल कर रहा है की जब आज दशहरा के दिन जिसमे रामचंद्र जी ने रावण को मार कर लंका पर विजय पताका फहराई थी तो मोदी जी को आज रामचंद्र जी को याद करना चाहिए था तथा राम मंदिर की बनाने की बात करनी चाहिए थी. प्रधानमंत्री बनने के बाद जिस प्रकार नरेंद्र मोदी में परिवर्तन आया है उससे हिंदूवादी संगठन काफी खफा बताये जाते हैं. हिंदूवादी संगठनों के लोगो का कहना है की नरेंद्र मोदी हिंदुत्व की रक्षा तथा भारत को हिंदी राष्ट्र बनाने के नाम पर सत्ता में आये थे लेकिन सत्ता सुख भोगने के बाद वह अपने इन मुद्दों से दूर भाग रहे हैं. हिंदूवादी संगठनों का कहना है की मोदी कभी बोहरा मुसलमानो के खिलाफ की शरण में जाते हैं और कभी साईं बाबा की. ऐसा क्या हो गया है की प्रधानमंत्री को इन सबका सहारा ढूंढना पद रहा है. हिन्दुअतिवादी नेता प्रवीण तोगड़िया तो खुला सवाल करते हैं की जब चुनाव क़रीब है तो तभी संघ प्रमुख के मंदिर क्यों याद आया. चार सालो से मोदी सरकार या संघ क्या करता रहा. तोगड़िया का कहना है की हिंदुत्व के नाम पर भाजपा और संघ ने लोगो को ठगा है. बेवक़ूफ़ बनाया है.


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