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अमित शाह ने मानी पहली बार यह बड़ी बात, चलो इसका मतलब रघुराम राजन अपनी जगह सही है!

 Special Coverage News |  17 Oct 2019 3:24 PM GMT  |  दिल्ली

अमित शाह ने मानी पहली बार यह बड़ी बात, चलो इसका मतलब रघुराम राजन अपनी जगह सही है!

नई दिल्ली. केंद्रीय गृहमंत्री (Union Home Minister) और भारतीय जनता पार्टी अध्यक्ष (BJP President) अमित शाह (Amit Shah) ने अर्थव्यवस्था में सुस्ती पर बयान दिया. अमित शाह ने कहा कि अर्थव्यवस्था में जल्द सुधार आएगा. न्यूज़18 नेटवर्क (News18 Network) ग्रुप के एडिटर इन चीफ राहुल जोशी (Rahul Joshi) को दिए एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में अमित शाह ने कहा कि मंदी सिर्फ भारत में नहीं है, ये ग्लोबल है. वैश्विक मंदी से भारत अछूता नहीं रह सकता है. दुनिया के दूसरे देशों से भारत की तुलना सही नहीं है. उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार के उठाए कदमों और अच्छे मानसून से इकोनॉमी में आगे सुधार दिखेगा.

जीडीपी के गिरते आंकड़े और लगभग सभी सेक्टरों में मंदी के माहौल पर केंद्रीय गृहमंत्री ने कहा कि जब से ग्लोबल स्लोडाउन का असर शुरू हुआ है, सरकार ने हालात बेहतर करने के लिए कदम उठाए हैं. सुस्ती से निपटने के लिए वित्त मंत्री ने ढेर सारे सेंटर्स पर जाकर उद्योगपतियों और चार्टर्ड अकाउंटेंट से मिलीं, अलग-अलग अर्थशास्त्रियों से घंटों तक संवाद किया गया है. वित्त मंत्री ने अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए कई फैसले लिए हैं. इसका असर जब आने लगेगा तो मुझे लगता है धीरे-धीरे स्थिति में सुधार आएगा.

रघुराम राजन के सवाल पर नहीं की कोई टिप्पणी

देश में कंसिस्टेंसी ऑफ पॉलिसी पर उन्होंने कहा कि पिछले 6 सालों में मोदी जी ने एक स्थायी अर्थनीति को अंजाम दिया है और इस दिशा में देश आगे बढ़ा है. अमित शाह ने भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन पर पूछे गए एक सवाल पर कहा, 'मैं रघुराम राजन की बात पर टिप्पणी नहीं करना चाहता, विवाद नहीं मोल लेना चाहता. पॉलिसी बनाने का काम देश की चुनी हुई सरकार का है.' बता दें कि रघुराम राजन ने कहा था कि मेजॉरिटेरिएनिज्म और ओवर सेंट्रलाइजेशन की वजह से निर्णय लेने का इकोनॉमिक पर्सपेक्टिव स्लो हो गया है?

फाइनेंशियल सेक्टर में स्ट्रेस के लिए यूपीए सरकार पर साधा निशाना

फाइनेंशियल सेक्टर में स्ट्रेस पर अमित शाह ने कहा कि 10 साल जिस तरह से यूपीए की सरकार चली थी जीडीपी के रेफरेंस में जो फाइनेंस होना चाहिए था, इससे कई गुना ज्यादा, शायद सैकड़ों गुना ज्यादा फाइनेंस हुआ. गेम हुआ लेकिन कभी ना कभी तो हम बैंकों के बैलेंस शीट को साफ करेंगे कि नहीं. ये काम के बोझ पर ही अपने अर्थतंत्र को खड़ा करने का प्रयास करेंगे जब यह प्रक्रिया चलती है तो थोड़े शॉक जरूर आएंगे, जो आए भी हैं. लेकिन सरकार ने इसकी डिटेल स्टडी की है. अब धीरे-धीरे अर्थतंत्र पटरी पर आ जाएगा. इसको ठीक करने की जिम्मेदारी जनता ने हमें दी है और मैं मानता हूं मोदी जी ने साहसपूर्ण कदम उठाकर इस को अच्छी तरह से देखा है. इस समस्या का समाधान जरूर होगा.

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